रम्या और महेश का मिलना लोगो से छुप न सका। रम्या के पिताजी को इस बारे में सुनकर बहुत गुस्सा आया।
वे बोले -तुझे पढ़ने की छूट दी थी। इस तरह से प्यार करने की छूट नही मिली है। अब तुझे घर से बाहर जाने का कोई हक़ नही है।
रम्या बोली -पिताजी एक बार आप उनसे मिल के देखिये आप को मेरा चुनाव बुरा नही लगेगा। .
रम्या के पिताजी उसकी हठधर्मी देखकर दंग रह गए। उन्हें इस तरह से उसका बोलना नागवार लगा। लेकिन अपने पर नियंत्रण रख कर बोले - ठीक है. कल उसे मुझसे मिलवाने लाना। मै उसे देखना चाहता हूँ।
महेश से मिलने पर रम्या ने उसे घर चलने के लिए कहा। महेश को इतनी जल्दी उसके घर मिलने का बुलावा आने की उम्मीद नही थी। वह उसके शब्द सुनकर सकपका गया। लेकिन उसकी सेना की नौकरी ने उसे डरना नही सिखाया था।
उसने मुस्कुराते हुए कहा -बताओ कब चलना है।
रम्या बोली -अभी. पिताजी आपका इंतजार कर रहे है।
महेश बोला -तुम्हे मुझे पहले फोन करके बताना चाहिए था। मै सही ढंग से तैयार हो कर आता। मैने सही तरीके से कपड़े भी नही पहने। मै कल तुम्हारे घर चलूँगा।
रम्या बोली - पिताजी के सामने आने से डर गए. मैने अभी आपके आने के लिए कहा था। वे आपका इंतजार कर रहे है। तुम्हे अभी मेरे साथ चलना पड़ेगा। वरना मै समझूंगी तुम मुझसे शादी नही करना चाहते हो।
महेश बोला -मेरा मतलब यह नही था। मै अभी चलने के लिए तैयार हूँ।
रम्या के पिताजी महेश से मिलने के बाद खुश नही हुए। उन्हें सैनिक से अपनी बेटी की शादी पसंद नही थी
. उन्होंने महेश के जाने के बाद रम्या को मना कर दिया- तुम आगे से महेश से नही मिलोगी। मुझे फौजी से तेरी शादी नही करनी इनकी जिंदगी का भरोसा नही होता। मुझसे तेरा गम देखा नही जायेगा।
रम्या उनके शब्दों को सुनकर रोने लगी लेकिन उसके पिताजी पर उसके आंसुओ का कोई असर नही हुआ। वह रोते हुए दूसरे कमरे में चली गयी।
वे बोले -तुझे पढ़ने की छूट दी थी। इस तरह से प्यार करने की छूट नही मिली है। अब तुझे घर से बाहर जाने का कोई हक़ नही है।
रम्या बोली -पिताजी एक बार आप उनसे मिल के देखिये आप को मेरा चुनाव बुरा नही लगेगा। .
रम्या के पिताजी उसकी हठधर्मी देखकर दंग रह गए। उन्हें इस तरह से उसका बोलना नागवार लगा। लेकिन अपने पर नियंत्रण रख कर बोले - ठीक है. कल उसे मुझसे मिलवाने लाना। मै उसे देखना चाहता हूँ।
महेश से मिलने पर रम्या ने उसे घर चलने के लिए कहा। महेश को इतनी जल्दी उसके घर मिलने का बुलावा आने की उम्मीद नही थी। वह उसके शब्द सुनकर सकपका गया। लेकिन उसकी सेना की नौकरी ने उसे डरना नही सिखाया था।
उसने मुस्कुराते हुए कहा -बताओ कब चलना है।
रम्या बोली -अभी. पिताजी आपका इंतजार कर रहे है।
महेश बोला -तुम्हे मुझे पहले फोन करके बताना चाहिए था। मै सही ढंग से तैयार हो कर आता। मैने सही तरीके से कपड़े भी नही पहने। मै कल तुम्हारे घर चलूँगा।
रम्या बोली - पिताजी के सामने आने से डर गए. मैने अभी आपके आने के लिए कहा था। वे आपका इंतजार कर रहे है। तुम्हे अभी मेरे साथ चलना पड़ेगा। वरना मै समझूंगी तुम मुझसे शादी नही करना चाहते हो।
महेश बोला -मेरा मतलब यह नही था। मै अभी चलने के लिए तैयार हूँ।
रम्या के पिताजी महेश से मिलने के बाद खुश नही हुए। उन्हें सैनिक से अपनी बेटी की शादी पसंद नही थी
. उन्होंने महेश के जाने के बाद रम्या को मना कर दिया- तुम आगे से महेश से नही मिलोगी। मुझे फौजी से तेरी शादी नही करनी इनकी जिंदगी का भरोसा नही होता। मुझसे तेरा गम देखा नही जायेगा।
रम्या उनके शब्दों को सुनकर रोने लगी लेकिन उसके पिताजी पर उसके आंसुओ का कोई असर नही हुआ। वह रोते हुए दूसरे कमरे में चली गयी।




