#ma ki laparvahi

     नीलेश और हेमा का सच अभी तक किसी के सामने नही आया था। इसलिए नीलेश अपने गलत व्यवहार को भूल गया था। उसे इसके लिए शर्मिंदगी का अहसास भी अब नही रहा था।  वह अब अपनी जरूरत के लिए पत्नी के आलावा हेमा का इस्तेमाल भी करता था।
    नीलेश के अंदर अभी भी हवस पूरी नही हो पाती  थी। इसके आलावा भी उसका ध्यान इधर -उधर घूमता रहता था। उसकी पहुंच में अभी तक कोई बाहर की लड़की नही आई थी। उसका मन मीना  और हेमा से ऊबने लगा था।
      हमारे समाज में लोग अपनी इस जरूरत का इजहार इतनी आसानी से नही कर पाते इसलिए नीलेश हर समय इन्ही ख्यालो में खोया रहता। उसे फिर से एक कमसिन सी नाजुक लड़की का ख्याल सताने लगा। अब हेमा 12  साल की हो गयी थी। उसे इसकी आदत पड़  गयी थी। इसलिए नीलेश को हेमा के साथ मजा आना बंद हो गया था।
        नीलेश का ध्यान अब अपनी 10  साल की बेटी शिखा की तरफ आकर्षित हो गया। वह उसे अनेक तरह से फुसलाने की कोशिश करने लगा। लेकिन हेमा बड़ी होने के कारण पिता के व्यवहार का मतलब समझने लगी थी। अब हेमा को नीलेश के व्यवहार के मायने भी समझ में आने लगे थे।  वह अधिकतर नीलेश के काम खुद कर देती थी। वह शिखा को पिता के पास अकेले रहने नही देती थी कोई ना कोई बहाना  बना कर उसे वहाँ  से ले जाती थी।
     हेमा कब तक पिता की नापाक हरकतों से शिखा को बचा सकती थी। एक दिन हेमा और मीना  दोनों घर में नही थी उस दिन नीलेश के मनसूबे पुरे हो गए। अबकी बार उसके अंदर डर  और शर्मिंदगी का अहसास भी पैदा नही हुआ।
      शिखा  हेमा की तरह डरपोक और सहमी हुई लड़की नही थी।  शाम को जब मीना  घर आई तो उसने शिखा के बारे में पूछा तब उसे पता चला शिखा ऊपर कमरे में है। उसने शिखा को जोर से नीचे आने के लिए आवाज लगाई लेकिन शिखा नीचे  नही उतरी। हेमा लाया हुआ सामान सही जगह पर रखने में लग गयी इतने में नीलेश काम के बहाने से बाहर चला गया।   नीलेश के घर से बाहर जाने पर मीना काम खत्म करके ऊपर शिखा के पास पहुंची।
  शिखा की  हालत देखकर   माँ ने उससे इतना निढाल होने का कारण पूछा तो वह जबाब देते हुए  रोने लगी। मीना  के तसल्ली देने पर शिखा ने माँ के सामने सारा दुःख बयान कर दिया । जिसे सुन कर मीना सन्न रह गई। उसकी आवाज तक गायब हो गयी। उसने अपना माथा पकड़ लिया।
     औरते  अपना दुखड़ा पति के सामने सुना कर अपना मन हल्का कर लेती है। जिसने ऐसा कुकर्म किया हो  उसके परिवार को आड़े  हाथो लेती है। पूरे मुहल्ले में ऐसा बेटा पैदा करने पर लानत भेजती है।
       ऐसी हालत में मीना को समझ नही आ  रहा था। अब वह क्या करे। इसकी फरियाद किससे  करे। बेटी के साथ यदि कोई बाहर का इंसान गलत करता है तो पति के सामने बयान किया जा सकता है लेकिन पति ही अपनी बेटी के साथ ऐसा करे तो वह किसी से कैसे कहे। उसे कुछ भी समझ नही आ  रहा था।
      कुछ समय बाद मीना  को सारे  हालात  समझ में आये  तो वह रोने लगी शिखा को गालियाँ  देते हुए कोसने लगी.अपनी जिंदगी पर लानत भेजने लगी।
      अपनी कोख को गाली  देते हुए कहने लगी-तुम किसलिए पैदा हुई। यदि तुम्हारी जगह बेटा  पहले ही पैदा हो गया होता तो ये दिन ना  देखने पड़ते।
      शिखा और मीना  को रोते  देख कर हेमा भी रोने लगी। कुछ समय बाद मीना  ने अपने आप को संभाल  लिया। वह शिखा को तसल्ली देने लगी। शिखा उसकी सहानुभूति पाकर चुप हो गयी।
      कुछ समय बाद  मीना  का ध्यान हेमा की तरफ गया। उसने उससे रोने का कारण पूछा। उसका जबाब सुन कर वह दंग  रह गयी।   उसने इस बात की कल्पना भी नही की थी। उसके जीते जी उसका पति अपनी बेटियो के साथ ऐसा करेगा।
     मीना  को अपनी लापरवाही पर बहुत गुस्सा आ  रहा था। काम के बोझ के कारण वह अपनी  बेटियो का दर्द ना  जान सकी। वह अपनी बेटियो की माँ के स्थान पर उनके अंदर दहशत का पर्याय बन गयी थी। यदि वह सतर्क होती शुरू से बेटियो की भावनाओ को हमदर्दी के साथ समझने की कोशिश करती तो नीलेश को इस तरह से बेटियो का फायदा उठाने का मौका भी नही मिलता।" अब पछताए होत  क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत। "
     लेकिन अब मै  अपनी बेटियो के साथ ऐसा किसी हालत में नही होने दूंगी। नीलेश को उसके कृत्य की सजा दिला  कर रहूँगी। उसने इसका प्रण  कर लिया। यदि नीलेश को अभी नही रोका  गया तो वह किसी  भी बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाये बिना नही छोड़ेगा। 

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