कुछ समय पहले तक करवा चौथ के त्यौहार का बहुत महत्व होता था। ये कुछ समय पहले की बात है उस समय औरत की तबियत के बारे में सोचा नही जाता था। बल्कि त्यौहार सही तरह से ना मनाने के कारण उनके बेटे का अनिष्ट न हो जाये सास सिर्फ इस बारे में सोचा करती थी। इस का खामियाजा कई बार बहु का अस्पताल पहुचने से भी उन्हें कोई फर्क नही पड़ता था। ऐसे ही कुछ उदाहरण में आपके सामने बताने जा रही हूँ।
राधा ने पहली बार करवा चौथ का ब्रत रखा। उसकी एक महीने बाद बच्चा होने की तारीख डॉ ने दी थी। उसकी नन्द ने जो की शादी शुदा थी अपनी माँ से कहा -इसे चाय और पानी पीने की छूट दे दो। हमारे यहाँ सभी चाय और पानी पी लेते है। इसकी हालत व्रत करने के लिहाज से सही नही है। यदि इसे कुछ हो गया तो परेशानी हो जाएगी।
लेकिन सास ने इसके बारे में जबाब नही दिया। राधा चुपचाप व्रत करती रही। लेकिन शाम तक उसकी तबियत ख़राब हो गयी। उसको अस्पताल ले जाना पड़ा। व्हाँ उसका बच्चा समय से एक महीने पहले हो गया। लेकिन उसकी सास को केवल अपने बेटे की चिंता थी बहू और नए मेहमान की चिंता नही हुई।
दूसरा उदाहरण मै क्षमा के बारे में बता रही हूँ। क्षमा और उसके पति के बीच बहुत झगड़ा हो गया था। दोनों का तलाक तक होने की सम्भावना बन रही थी। क्षमा के पति का काम पूरी तरह ख़त्म हो गया था। उसके लिए कर्जदारो का सामना करना कठिन हो गया था। इसलिए वह मायके जाकर रह रही थी। उसका पति उससे समझोता करने के स्थान पर उसकी मेहनत करने को लेकर गलत बोलता। उसको अपमानित करने की कोशिश करता था।
ऐसे माहौल में उसने गुस्से में आकर करवा चौथ का व्रत नही रखा। कुछ समय बाद उसके पति ने ख़ुदकुशी कर ली।
इसके लिए ससुराल के सारे लोगो ने क्षमा को कसूरवार ठहराया और कहा -यदि वह इस दिन व्रत रख लेती तो उसके पति को इतना दुःख नही पहुँचता। वो ऐसा खतरनाक कदम ना उठता।
इस समय तक पति की मौत के लिए हर तरह से पत्नी को जिम्मेदार ठहराया जाता था। कई बार मुझे ऐसे विचारो पर हंसी आती है। कि पति को यदि व्रत न रखने से मौत के घाट पहुँचाया जा सकता है तो लोगो को अपने पति की हत्या करने के लिए इतने अधिक पैसो की अपराधियो को सुपारी देने की क्या जरूरत है।
आज की नारी अपने मन के हिसाब से व्रत रखती है। मै ऐसा उदाहरण आपके सामने रख रही हूँ। नंदा ने इस त्यौहार के लिए काफी सामान खरीदा। हाथो में सुहाग की मेहँदी भी लगवा ली। सारा सामान घर में आ गया था। सास -ससुर भी उनके साथ रहते थे।सास ने अपने पति के लिए व्रत रखा था। नंदा जिस परिवार से आई थी वहाँ परम्पराओ को निभाया जाता था। अर्थात व्रत रखा जाता था।
करवा चौथ से एक दिन पहले पति और पत्नी के बीच लड़ाई हो गयी। नंदा को इतना तेज गुस्सा आ गया उसने करवा चौथ का व्रत नही रखा। उसने इस मामले में सास -ससुर का लिहाज करके व्रत रखने का दिखावा करना तक गवारा नही किया। आप इससे क्या मतलब निकालेंगे। क्या उसका पति अब जीवित रहेगा या नही रहेगा। ये मै आप पर छोड़ती हूँ।
राधा ने पहली बार करवा चौथ का ब्रत रखा। उसकी एक महीने बाद बच्चा होने की तारीख डॉ ने दी थी। उसकी नन्द ने जो की शादी शुदा थी अपनी माँ से कहा -इसे चाय और पानी पीने की छूट दे दो। हमारे यहाँ सभी चाय और पानी पी लेते है। इसकी हालत व्रत करने के लिहाज से सही नही है। यदि इसे कुछ हो गया तो परेशानी हो जाएगी।
लेकिन सास ने इसके बारे में जबाब नही दिया। राधा चुपचाप व्रत करती रही। लेकिन शाम तक उसकी तबियत ख़राब हो गयी। उसको अस्पताल ले जाना पड़ा। व्हाँ उसका बच्चा समय से एक महीने पहले हो गया। लेकिन उसकी सास को केवल अपने बेटे की चिंता थी बहू और नए मेहमान की चिंता नही हुई।
दूसरा उदाहरण मै क्षमा के बारे में बता रही हूँ। क्षमा और उसके पति के बीच बहुत झगड़ा हो गया था। दोनों का तलाक तक होने की सम्भावना बन रही थी। क्षमा के पति का काम पूरी तरह ख़त्म हो गया था। उसके लिए कर्जदारो का सामना करना कठिन हो गया था। इसलिए वह मायके जाकर रह रही थी। उसका पति उससे समझोता करने के स्थान पर उसकी मेहनत करने को लेकर गलत बोलता। उसको अपमानित करने की कोशिश करता था।
ऐसे माहौल में उसने गुस्से में आकर करवा चौथ का व्रत नही रखा। कुछ समय बाद उसके पति ने ख़ुदकुशी कर ली।
इसके लिए ससुराल के सारे लोगो ने क्षमा को कसूरवार ठहराया और कहा -यदि वह इस दिन व्रत रख लेती तो उसके पति को इतना दुःख नही पहुँचता। वो ऐसा खतरनाक कदम ना उठता।
इस समय तक पति की मौत के लिए हर तरह से पत्नी को जिम्मेदार ठहराया जाता था। कई बार मुझे ऐसे विचारो पर हंसी आती है। कि पति को यदि व्रत न रखने से मौत के घाट पहुँचाया जा सकता है तो लोगो को अपने पति की हत्या करने के लिए इतने अधिक पैसो की अपराधियो को सुपारी देने की क्या जरूरत है।
आज की नारी अपने मन के हिसाब से व्रत रखती है। मै ऐसा उदाहरण आपके सामने रख रही हूँ। नंदा ने इस त्यौहार के लिए काफी सामान खरीदा। हाथो में सुहाग की मेहँदी भी लगवा ली। सारा सामान घर में आ गया था। सास -ससुर भी उनके साथ रहते थे।सास ने अपने पति के लिए व्रत रखा था। नंदा जिस परिवार से आई थी वहाँ परम्पराओ को निभाया जाता था। अर्थात व्रत रखा जाता था।
करवा चौथ से एक दिन पहले पति और पत्नी के बीच लड़ाई हो गयी। नंदा को इतना तेज गुस्सा आ गया उसने करवा चौथ का व्रत नही रखा। उसने इस मामले में सास -ससुर का लिहाज करके व्रत रखने का दिखावा करना तक गवारा नही किया। आप इससे क्या मतलब निकालेंगे। क्या उसका पति अब जीवित रहेगा या नही रहेगा। ये मै आप पर छोड़ती हूँ।
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