#andh vishvas

     मीना  के लिए जिंदगी में आराम नही रहा था। अब वह अपने बच्चो से भी मदद की उम्मीद करने लगी थी। बच्चो को सँभालने में उसकी बड़ी बेटी हेमा मदद करने लगी थी। लेकिन अभी वह भी छोटी थी।  वह  माँ की मदद करने की भरसक कोशिश करती लेकिन छोटी होने के कारण उससे काम में गलती हो जाती। उसकी गलती का कारण मीना  समझ नही पाती। वह सोचती काम ना  करना पड़े इसलिए जानबूझकर काम को गलत कर देती है। काम के बड़े हुए बोझ के कारण मीना हेमा को समझ नही पाती  थी। उसकी गलती पर वह अपना सारा गुस्सा उस पर उतार  देती थी। मीना उसके मनोदगार को समझने में असफल रहती थी या समझना ही नही चाहती थी.हेमा  अब माँ का सामना करने से बचने लगी थी। क्योंकि काम के अतिरिक्त बोझ के कारण मीना हेमा पर आये  दिन अपना गुस्सा निकालती रहती थी।
       हेमा का अपनी माँ से भरोसा उठ गया था। वह अपने मन की बात हेमा से कह नही पाती  थी। जो थोड़ा बहुत भरोसा था वह उसका केवल अपने पिता पर था। बाकि सारे  भाई -बहन उससे छोटे थे वह अपने मन की बात किसी को बता नही पाती थी। उसके मन में  उठा हुआ गुबार उसे परेशान करता रहता था।
    एक दिन मीना  बाजार गयी हुई  थी.
        हेमा का मन नही लग रहा था वह उदास थी।  उसकी सहेली से उसका झगड़ा हो गया था।  उसे उदास देखकर नीलेश उसे ऊपर कमरे में ले गया। वह अपने पिता के साथ चली गयी। नीलेश उसको प्यार से समझाने  लगा। हेमा अपने पिता से अपने मन की  बात कहने से गुरेज नही करती थी। उसे नीलेश पर भरोसा था। मीना बच्चो के मामले में नीलेश पर पूरा भरोसा करती थी। इसलिए वह बच्चो को छोड़कर बाजार से सामान   लेने  चली गयी। उसका भी हर समय घर में काम करते रहने  से मन  ऊबने लगा  था। इस बहाने वह बाजार का काम करके आती  थी और उसका मन भी बहल जाता था।
       नीलेश हेमा को तसल्ली देते हुए उसके शरीर पर हाथ फेर रहा था। उसके हाथ कब सीमा का उल्लंघन कर गए हेमा को अहसास नही हुआ। वह अभी केवल 10  साल की थी उसके लिए पिता और अन्य इंसान के गलत व्यवहार का अंतर कर पाना   बहुत कठिन था। उसे दुनियाँ  की समझ नही थी.उसका वास्ता अभी पुरुष के रूप में केवल पिता से पड़ा  था। बचपन से जिसका मुख देखकर वह बड़ी हुई थी। उसके व्यवहार में आये अंतर को वह समझ  नही सकी।
     जो कुछ उसके साथ हो चूका था। उसे समझ नही आ  रहा था। यह क्या था वह इतनी तकलीफ सहन नही कर पा  रही  थी वह रोने लगी। उसकी हालत बहुत ख़राब  हो रही थी। उससे उठा नही जा रहा था।
       उसके पिता नीलेश ने उसे समझाने की कोशिश की। उसे कई तरह से दिलासा दिया। उसे उपहार में उसकी पसंद की चीजे लाकर देने का वादा किया। हेमा नासमझ होने के कारण समझ ना  सकी कि  उसके साथ कुछ गलत हुआ है।
   बचपन से नीलेश हेमा की देखभाल करता आया था। इसलिए उसने इसे भी पिता के काम का हिस्सा समझ कर स्वीकार कर लिया।हेमा के लिए मीना  डर  का दूसरा नाम था। इसलिए उसने इस वाकया का उससे जिक्र नही किया।
     नीलेश हेमा की तकलीफ समझ गया था। उसने हेमा को ऊपर  आराम करने के लिए कह दिया। हेमा के वापस आने पर नीलेश ने उसे मीना की तबियत ख़राब होने की बात कह दी। हेमा को नीलेश की बातो पर यकीन  आ गया।
      उसने कहा -तुम हेमा का ध्यान रखना। मुझे बहुत काम करने है।
     मीना को सपने में भी इस बात का विचार नही आ  सका हेमा के साथ कुछ गलत हुआ है। 

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