#jindgi ki muskan priya

                जिंदगी की मुस्कान पारियां 

नन्ही सी एक जिंदगी लाई है , खुशियाँ हजार। 
हलकी सी मुस्कान उसकी ,भरे है  सबमे जान। 
पड़कर कदमो की छाप से उसके, बड़ी हे घर की शान।। 
आने से एक परी के घर में ,बढ़ी  है  खुशियाँ हजार।। 

बड़ी हुई है, बढ़े  है सपने, पढ़ रही है बाते चार। 
सीखा रही है घर में सबको, पाया है जो नया ज्ञान। 
चला यह कारवां पल -पल हर घर , जहाँ है बेटियाँ ,जान।। 
प्यार है घर की बेटियाँ , लगाए  है चाँद हजार।। 

चंचल मन बढ़ चली, पकड़ी है संजीदगी की चाल। 
चहकती हँसी के पीछे , सजा है सबका ध्यान। 
बनी है सहारा आज जग का ,चले है अब सब साथ।। 
हर कदम पर ,हर डगर पर ,बाँटे है काम में हाथ।। 

थामा था जिन हाथो ने जन्म से , रखे है उनका ख्याल। 
बढ़ चली है जिंदगी ,सँवारा है एक नया साथ। 
बुनी है एक नई डोरी प्यार की , रखा है सबको साथ ।। 
बड़ी हुई वो नन्ही परी ,लाई  है एक परी आज।। 

ज़िन्दगी की मुस्कान है ये पारियां , पाओ न खुशियाँ आज । 
प्यार है घर की बेटियाँ। सजाओ न घर को आज।।  
                कवयित्री - श्रुति पाठक 

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