मै अपने कार्यालय में मन लगा कर काम करती थी लेकिन मेरा सहकर्मी मोहन मेरे पास आकर मुझे अपनी बातो से रिझाने की कोशिश में लगा रहता था। मै अधिकतर उसकी तरफ ध्यान नही देती थी। उसकी दिनोदिन हिम्मत बढ़ती जा रही थी। मेरी उपेक्षा , उस पर कोई असर नही कर रही थी। वह दिनों दिन और ज्यादा उद्दंड होता जा रहा था। उसकी हरकते बर्दास्त के बाहर होती जा रही थी। मै समझ नही पा रही थी। उसका किस तरह से प्रतिकार करुँ। मेरा हर तरीका उसे और अधिक बेशर्म बना रहा था।
एक बार मोहन मेरे पास एक कागज लेकर आया और बोला - देखो मेरे हस्ताक्षर कितने सेक्सी है।
मै उसकी बात सुन कर सकपका गयी अचानक उसका जबाब देने की हालत में मै नही थी। मेने उसकी तरफ ध्यान नही दिया। मैने अपने आपको दूसरे काम में मसरूफ दिखाया। मेरी बेरुखी का उस पर कोई असर नही हुआ। उसने मेरे इस व्यवहार को मेरी शर्म समझा। उसने दुवारा मेरे सामने वही प्रश्न दोहराया।
उसके ये शब्द सुनकर मेरी आत्मा तक जल गयी। मेरे लिए अपने गुस्से पर काबू रखना मुश्किल हो गया।
मेने जोर से एक थप्पड़ उसे रसीद किया और बोली -कहो कैसा लगा मेरा सेक्सी थप्पड़।
थप्पड़ लगते ही उसके होश ठिकाने आ गए। वह मुझसे माफ़ी मांगने लगा। लेकिन मेरा गुस्सा उस दिन बहुत ज्यादा बढ़ गया था।
मैने उससे कहा -अभी ये तो कुछ नही है। मै तेरी ऊपर तक शिकायत करुँगी। ताकि तुम दुसरो को परेशान करना भूल जाओ ।मेरी चुप्पी को तूने मेरा डर समझा था। इसलिए मुझे परेशान करने से बाज नही आ रहा था। अब देखना मेरी ताकत।
उसके बाद जिससे वह मिलता उससे अपनी परेशानी बताता उससे इस समस्या का समाधान पूछता -खुद को माफ़ करने की दरयाफ्त करता।
एक दिन मेरे अफसर ने मुझे बुला कर कहा -इसे दो चार थप्पड़ चाहे तो और मार ले लेकिन इसकी ऊपर शिकायत मत कर। इसकी नौकरी का सवाल है।
मेरा उसकी ऊपर शिकायत करने का कोई इरादा नही था। मेने सिर्फ उसे डराने के लिए इन शब्दों का इस्तेमाल किया था। मुझे पता था सरकारी नौकरी कितनी मुश्किल से मिलती हे। किसी की नौकरी छीन कर मै उसका जीवन बर्बाद नही करना चाहती थी। ये तो उसे रोकने के लिए केवल धमकी थी। लेकिन मेरी एक धमकी ने उसके सारे कसबल निकाल दिए थे। उसका गौरवान्वित चेहरा मुझे फिर दिखाई नही दिया। कुछ समय बाद उसने उस दफ्तर से अपना तबादला करवा लिया।
इसलिए कहा जाता है। डरने वाले पर सब हावी होते है। बहादुरो के सामने पहाड़ जैसी चुनोतियाँ भी चींटी के सामान छोटी हो जाती है।
एक बार मोहन मेरे पास एक कागज लेकर आया और बोला - देखो मेरे हस्ताक्षर कितने सेक्सी है।
मै उसकी बात सुन कर सकपका गयी अचानक उसका जबाब देने की हालत में मै नही थी। मेने उसकी तरफ ध्यान नही दिया। मैने अपने आपको दूसरे काम में मसरूफ दिखाया। मेरी बेरुखी का उस पर कोई असर नही हुआ। उसने मेरे इस व्यवहार को मेरी शर्म समझा। उसने दुवारा मेरे सामने वही प्रश्न दोहराया।
उसके ये शब्द सुनकर मेरी आत्मा तक जल गयी। मेरे लिए अपने गुस्से पर काबू रखना मुश्किल हो गया।
मेने जोर से एक थप्पड़ उसे रसीद किया और बोली -कहो कैसा लगा मेरा सेक्सी थप्पड़।
थप्पड़ लगते ही उसके होश ठिकाने आ गए। वह मुझसे माफ़ी मांगने लगा। लेकिन मेरा गुस्सा उस दिन बहुत ज्यादा बढ़ गया था।
मैने उससे कहा -अभी ये तो कुछ नही है। मै तेरी ऊपर तक शिकायत करुँगी। ताकि तुम दुसरो को परेशान करना भूल जाओ ।मेरी चुप्पी को तूने मेरा डर समझा था। इसलिए मुझे परेशान करने से बाज नही आ रहा था। अब देखना मेरी ताकत।
उसके बाद जिससे वह मिलता उससे अपनी परेशानी बताता उससे इस समस्या का समाधान पूछता -खुद को माफ़ करने की दरयाफ्त करता।
एक दिन मेरे अफसर ने मुझे बुला कर कहा -इसे दो चार थप्पड़ चाहे तो और मार ले लेकिन इसकी ऊपर शिकायत मत कर। इसकी नौकरी का सवाल है।
मेरा उसकी ऊपर शिकायत करने का कोई इरादा नही था। मेने सिर्फ उसे डराने के लिए इन शब्दों का इस्तेमाल किया था। मुझे पता था सरकारी नौकरी कितनी मुश्किल से मिलती हे। किसी की नौकरी छीन कर मै उसका जीवन बर्बाद नही करना चाहती थी। ये तो उसे रोकने के लिए केवल धमकी थी। लेकिन मेरी एक धमकी ने उसके सारे कसबल निकाल दिए थे। उसका गौरवान्वित चेहरा मुझे फिर दिखाई नही दिया। कुछ समय बाद उसने उस दफ्तर से अपना तबादला करवा लिया।
इसलिए कहा जाता है। डरने वाले पर सब हावी होते है। बहादुरो के सामने पहाड़ जैसी चुनोतियाँ भी चींटी के सामान छोटी हो जाती है।
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