रिश्तो की डोर बहुत कमजोर हो गयी है। रिश्ते आज के समय में केवल स्वार्थ तक सिमित रह गए है। जिन रिश्तो को समाज के सामने ढाल समझा जाता था। आज वही रिश्ते जिंदगी को शर्मसार कर रहे है। ऐसे ही एक वाकया मेंरे सामने आया जिसे सुनकर में हैरान रह गयी।
मेरे घर के सामने एक परिवार रहता था। उनके घर शादी के १० साल तक कोई बच्चा नही हुआ। उनकी पत्नी को सबने बाँझ करार दे दिया। उसका अनेक तरह से लोग मजाक बनाया करते थे। वह घुट -घुट कर जीवन जी रही थी।
अचानक १० साल बाद उस घर में बच्चे की किलकारी सुनाई दी। उनकी बर्षो पुरानी तमन्ना पूरी हो गयी . उनके दिन -रात हर तरफ खुशियाँ छा गयी। दो साल बाद उनके घर फिर से एक नन्ही कली आई।
उनके ससुर जी ने सोचा -आजकल के बच्चे दो के बाद और बच्चे नही बुलाते। अब अगला बच्चा शायद ये न बुलाये उन्होंने बच्चे का बड़ा उत्सब मनाया।
दो बेटियाँ होने के बाद अब उनके मन में बेटे की आस जागी। उन्होंने तीसरा बच्चा बुलाया वह भी लड़की पैदा हो गयी। बेटे की इच्छा के कारण उनके घर चार बेटियाँ आ गयी चारो बेटियाँ बहुत सुंदर और स्वस्थ थी। यदि ये लड़कियाँ किसी और घर में पैदा हुई होती तो उनका जीवन संवर जाता लेकिन उस घर में उन लड़कियों की देखभाल करने के साधन सीमित होने के बाबजूद उनके मन में बेटे की इच्छा बलबती होती जा रही थी। उन्होंने 5 वी बार बहुत पूजा -पाठ की ज्योतिषियों के अनुसार बताये गए सारे अनुष्ठान पुरे किये अंतत भगवान ने उनकी मनोकामना पूरी कर दी। उनके घर में एक सुंदर सा बेटा पैदा हो गया।
मीना और सुरेश के घर सीमित आमदनी में घर का गुजारा चलाना मुश्किल था। ऐसे में मीना बाहर फैक्टरी से काम लाकर घर में करने लगी। पांच बच्चो का घर और बाहर का काम, उस पर फैक्टरी का काम उसे सारे काम पूरे करने के लिए पति नीलेश की मदद लेनी पड़ती थी।
पहले समय में बच्चो के काम औरते अकेली निबटा लेती थी। लेकिन नाजुक सी मीना इतनी सारी जिम्मेदारी निवटाने में असमर्थ थी। उसकी बड़ी बेटी इस बीच 10 साल की हो गयी। इतना समय कैसे गुजर गया मीना को आभास ही नही हुआ।
इन 20 सालो में मीना के ससुर की मृत्यु हो गयी। उन्होंने पुराना ससुर जी का मकान बेचकर दूसरा मकान दूसरी जगह ले लिया। वह मकान पहले से छोटा लेकिन दो मंजिला था। अब दोनों मंजिलो में मीना का परिवार रहने लगा। पहले एक मंजिले मकान में उसका पूरा परिवार उसके सामने रहता था। लेकिन घर बड़ा होने के कारण वह पुरे घर का ध्यान नही रख पाती थी। उसके बच्चे बड़े होने के कारण सारे बच्चे उसकी निगाहो के सामने नही रह पाते थे।
उसके पास बहुत अधिक काम रहने के कारण वह हर समय काम में लगी रहती थी। अब उसे इतने बड़े परिवार की जिम्मेदारी मुसीबत लगने लगी थी। इतने कामो के बीच उसके अंदर की कोमलता और मधुरता ख़त्म हो गयी थी लेकिन ये सारा संसार उसी का फैलाया हुआ था वह किसी को दोष भी नही दे सकती थी। उसकी परेशानी कोई समझ ही नही पाता था।
उसके शब्दों को सुनकर सब हंसकर कहते -ये सारा मायाजाल तुम्हारा ही फैलाया है। आजकल इतने बच्चे करने के बारे में विरले ही सोचते है। अब तो ये सब तुम्हे ही भुगतना पड़ेगा।
अब वह अपने बच्चो को दूसरो को गोद देने के बारे में सोचने लगी थी। लेकिन उसके किसी बच्चे को गोद लेने के लिए कोई रिश्तेदार तैयार नही हुआ। क्योंकि सभी रिश्तेदारो के पास बच्चे थे। आज के ज़माने में अधिक बच्चे पालना कोई नही चाहता। इसलिए दुसरो के बच्चे को अपने पास रख कर बुराई मोल लेने के लिए कोई तैयार नही हुआ। उसे अब अपने किये पर पछतावा होने लगा।
वह सोचती -इतने सारे बच्चो की जरूरते में कैसे पूरी कर पाऊँगी। हम अभी इनकी जरूरते सही तरीके से पूरी नही कर पा रहे बाद में इनकी जरूरत बढ़ेगी तब क्या होगा।
मेरे घर के सामने एक परिवार रहता था। उनके घर शादी के १० साल तक कोई बच्चा नही हुआ। उनकी पत्नी को सबने बाँझ करार दे दिया। उसका अनेक तरह से लोग मजाक बनाया करते थे। वह घुट -घुट कर जीवन जी रही थी।
अचानक १० साल बाद उस घर में बच्चे की किलकारी सुनाई दी। उनकी बर्षो पुरानी तमन्ना पूरी हो गयी . उनके दिन -रात हर तरफ खुशियाँ छा गयी। दो साल बाद उनके घर फिर से एक नन्ही कली आई।
उनके ससुर जी ने सोचा -आजकल के बच्चे दो के बाद और बच्चे नही बुलाते। अब अगला बच्चा शायद ये न बुलाये उन्होंने बच्चे का बड़ा उत्सब मनाया।
दो बेटियाँ होने के बाद अब उनके मन में बेटे की आस जागी। उन्होंने तीसरा बच्चा बुलाया वह भी लड़की पैदा हो गयी। बेटे की इच्छा के कारण उनके घर चार बेटियाँ आ गयी चारो बेटियाँ बहुत सुंदर और स्वस्थ थी। यदि ये लड़कियाँ किसी और घर में पैदा हुई होती तो उनका जीवन संवर जाता लेकिन उस घर में उन लड़कियों की देखभाल करने के साधन सीमित होने के बाबजूद उनके मन में बेटे की इच्छा बलबती होती जा रही थी। उन्होंने 5 वी बार बहुत पूजा -पाठ की ज्योतिषियों के अनुसार बताये गए सारे अनुष्ठान पुरे किये अंतत भगवान ने उनकी मनोकामना पूरी कर दी। उनके घर में एक सुंदर सा बेटा पैदा हो गया।
मीना और सुरेश के घर सीमित आमदनी में घर का गुजारा चलाना मुश्किल था। ऐसे में मीना बाहर फैक्टरी से काम लाकर घर में करने लगी। पांच बच्चो का घर और बाहर का काम, उस पर फैक्टरी का काम उसे सारे काम पूरे करने के लिए पति नीलेश की मदद लेनी पड़ती थी।
पहले समय में बच्चो के काम औरते अकेली निबटा लेती थी। लेकिन नाजुक सी मीना इतनी सारी जिम्मेदारी निवटाने में असमर्थ थी। उसकी बड़ी बेटी इस बीच 10 साल की हो गयी। इतना समय कैसे गुजर गया मीना को आभास ही नही हुआ।
इन 20 सालो में मीना के ससुर की मृत्यु हो गयी। उन्होंने पुराना ससुर जी का मकान बेचकर दूसरा मकान दूसरी जगह ले लिया। वह मकान पहले से छोटा लेकिन दो मंजिला था। अब दोनों मंजिलो में मीना का परिवार रहने लगा। पहले एक मंजिले मकान में उसका पूरा परिवार उसके सामने रहता था। लेकिन घर बड़ा होने के कारण वह पुरे घर का ध्यान नही रख पाती थी। उसके बच्चे बड़े होने के कारण सारे बच्चे उसकी निगाहो के सामने नही रह पाते थे।
उसके पास बहुत अधिक काम रहने के कारण वह हर समय काम में लगी रहती थी। अब उसे इतने बड़े परिवार की जिम्मेदारी मुसीबत लगने लगी थी। इतने कामो के बीच उसके अंदर की कोमलता और मधुरता ख़त्म हो गयी थी लेकिन ये सारा संसार उसी का फैलाया हुआ था वह किसी को दोष भी नही दे सकती थी। उसकी परेशानी कोई समझ ही नही पाता था।
उसके शब्दों को सुनकर सब हंसकर कहते -ये सारा मायाजाल तुम्हारा ही फैलाया है। आजकल इतने बच्चे करने के बारे में विरले ही सोचते है। अब तो ये सब तुम्हे ही भुगतना पड़ेगा।
अब वह अपने बच्चो को दूसरो को गोद देने के बारे में सोचने लगी थी। लेकिन उसके किसी बच्चे को गोद लेने के लिए कोई रिश्तेदार तैयार नही हुआ। क्योंकि सभी रिश्तेदारो के पास बच्चे थे। आज के ज़माने में अधिक बच्चे पालना कोई नही चाहता। इसलिए दुसरो के बच्चे को अपने पास रख कर बुराई मोल लेने के लिए कोई तैयार नही हुआ। उसे अब अपने किये पर पछतावा होने लगा।
वह सोचती -इतने सारे बच्चो की जरूरते में कैसे पूरी कर पाऊँगी। हम अभी इनकी जरूरते सही तरीके से पूरी नही कर पा रहे बाद में इनकी जरूरत बढ़ेगी तब क्या होगा।
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