अब वेद 85 साल के हो गए थे। लेकिन उनके काम करने के तरीके में बदलाव नही आया था। वे जितने दिन बीमार रहते उतने दिन आराम करते। स्वस्थ होते ही कारखाने में बैठने लगते थे।
उन्होंने इस उम्र में नरेश के आने से काम का बोझ कम होने का हवाला देते हुए कहा - अब इस काम को देखने की अपेक्षा में कही और जाकर नई फैक्ट्री शुरू कर देता हूँ।
हमने कहा -आप अपनी दूसरी फैक्टरी कहाँ खोलना चाहते है।
वेद ने कहा -हमारे पास जयपुर से कई ग्राहक काम के सिलसिले में आते है। वे चाहते है। हम अपना एक कारखाना वहाँ खोल ले। उनके अनुसार हमको जयपुर में काम को लेकर किसी परेशानी का सामना नही करना पड़ेगा। वे हमारी भरपूर मदद करेंगे। काम हमारी उम्मीदों से ज्यादा ही मिलेगा जिसकी हम उम्मीद नही कर सकते। लाली मै सोच रहा हूँ एक बार और जयपुर में किस्मत आजमा कर देख लूँ।
मेने कहा -आप की उम्र इस तरह अनजान जगह पर रहने की नही है। अब आपकी तबियत दिनों दिन बिगड़ती जा रही है। कभी भी आपको देखभाल की जरूरत पड़ जाती है.यहाँ मदद के लिए आपके पास पहुँचना आसान है वहाँ तक पहुँचना बहुत कठिन हो जायेगा। आपकी उम्र अब अकेले रहने के लिए ठीक नही है।
वेद ने कहा -यहाँ की फैक्टरी में कोई मेरे लायक काम नही रहा। ये फैक्टरी मेरे बिना भी आराम से चल सकती है। मुझे लगता है.यहाँ का काम नरेश को दे कर मै नए काम की नींव डालू।
मेने कहा -आपकी उम्र इतना लम्बा सफर करने लायक नही रही है। उस पर आपकी तबियत कभी भी बहुत ख़राब हो जाती है। आपको अपने शरीर का होश तक नही रहता। ऐसे में बिना सहायता के आपके लिए जिंदगी जीना कठिन होगा। आप वहाँ नए काम के लिए नरेश को भेज दो। उसे जीवन की सच्चाई का सामना करना आना चाहिए।
वेद बोले -उसमे अनुभव की कमी है। उसे नही पता नया काम किस तरह शुरू किया जाता है। मेने जीवन में काफी अनुभव पा रखा है। नरेश ने अपने आप जीवन में अभी तक कुछ हासिल नही किया। वह यहाँ भी मेरे भरोसे आया है। मुझे नही लगता उसमे कुछ नया करने की काबिलियत है। नए काम के लिए बहुत मेहनत की जरूरत पड़ती है।
वेद ने दिल्ली की फैक्टरी की जिम्मेदारी नोकरो और नरेश पर छोड़ कर जयपुर के लिए प्रस्थान किया।
वेद ने ८५ साल की उम्र में जयपुर में नई फैक्टरी का काम करना शुरू कर दिया। इसे कहते है उम्र और बीमारी कभी काम करने वालो के रास्ते में नही आती। उम्र का बहाना कामचोर लोग बनाते है।
उन्होंने इस उम्र में नरेश के आने से काम का बोझ कम होने का हवाला देते हुए कहा - अब इस काम को देखने की अपेक्षा में कही और जाकर नई फैक्ट्री शुरू कर देता हूँ।
हमने कहा -आप अपनी दूसरी फैक्टरी कहाँ खोलना चाहते है।
वेद ने कहा -हमारे पास जयपुर से कई ग्राहक काम के सिलसिले में आते है। वे चाहते है। हम अपना एक कारखाना वहाँ खोल ले। उनके अनुसार हमको जयपुर में काम को लेकर किसी परेशानी का सामना नही करना पड़ेगा। वे हमारी भरपूर मदद करेंगे। काम हमारी उम्मीदों से ज्यादा ही मिलेगा जिसकी हम उम्मीद नही कर सकते। लाली मै सोच रहा हूँ एक बार और जयपुर में किस्मत आजमा कर देख लूँ।
मेने कहा -आप की उम्र इस तरह अनजान जगह पर रहने की नही है। अब आपकी तबियत दिनों दिन बिगड़ती जा रही है। कभी भी आपको देखभाल की जरूरत पड़ जाती है.यहाँ मदद के लिए आपके पास पहुँचना आसान है वहाँ तक पहुँचना बहुत कठिन हो जायेगा। आपकी उम्र अब अकेले रहने के लिए ठीक नही है।
वेद ने कहा -यहाँ की फैक्टरी में कोई मेरे लायक काम नही रहा। ये फैक्टरी मेरे बिना भी आराम से चल सकती है। मुझे लगता है.यहाँ का काम नरेश को दे कर मै नए काम की नींव डालू।
मेने कहा -आपकी उम्र इतना लम्बा सफर करने लायक नही रही है। उस पर आपकी तबियत कभी भी बहुत ख़राब हो जाती है। आपको अपने शरीर का होश तक नही रहता। ऐसे में बिना सहायता के आपके लिए जिंदगी जीना कठिन होगा। आप वहाँ नए काम के लिए नरेश को भेज दो। उसे जीवन की सच्चाई का सामना करना आना चाहिए।
वेद बोले -उसमे अनुभव की कमी है। उसे नही पता नया काम किस तरह शुरू किया जाता है। मेने जीवन में काफी अनुभव पा रखा है। नरेश ने अपने आप जीवन में अभी तक कुछ हासिल नही किया। वह यहाँ भी मेरे भरोसे आया है। मुझे नही लगता उसमे कुछ नया करने की काबिलियत है। नए काम के लिए बहुत मेहनत की जरूरत पड़ती है।
वेद ने दिल्ली की फैक्टरी की जिम्मेदारी नोकरो और नरेश पर छोड़ कर जयपुर के लिए प्रस्थान किया।
वेद ने ८५ साल की उम्र में जयपुर में नई फैक्टरी का काम करना शुरू कर दिया। इसे कहते है उम्र और बीमारी कभी काम करने वालो के रास्ते में नही आती। उम्र का बहाना कामचोर लोग बनाते है।
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