#nilesh ka badlata rup

      नीलेश के जाने के  बाद मीना  को सारी  रात  नींद  नही आई वह बेचैनी की हालत में सारी  रात  तड़पती रही। उसे भगवान  पर गुस्सा आ  रहा था। उसकी किस्मत में ये सब क्यों लिख दिया। जिसका बयान दुसरो के सामने करना घर की बर्बादी का कारण बन  जाता  न बताने पर घर की सारी मर्यादाये भंग  हो जाती।
       अगले दिन  सुबह उसके लिए रौशनी लेकर नही आई बल्कि और ज्यादा कालापन उसमे छिपा था। उसका अपनी ससुराल के लोगो से  अच्छे सम्बन्ध नही थे। इसलिए वह अपनी हालत किसी से साझा नही कर सकी उसका मन बहुत भारी हो रहा था इसलिए  उसने अपने मायके में अपनी माँ को इस बारे में जानकारी दी। मीना  के पिता की मृत्यु कुछ साल पहले हो चुकी थी। इसलिए उसे पिता का सहारा भी प्राप्त नही  हो  सकता था।
      मीना  की माँ हरप्यारी उसकी विपदा सुनते ही उसे सहारा देने के लिए उसके पास आ  गयी। हरप्यारी  इस बारे में सुनते ही सकते में आ  गयी थी। इस तरह की कल्पना करना भी सभी को पाप लगता है। इस सच्चाई को पचा पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।
     हमारे समाज में पुलिस के लोग भी ऐसे इंसान के प्रति निर्दयी हो जाते है। कोई भी नीलेश का लिहाज नही कर रहा था। पुलिस की यातनाओं ने उस पर से हवस का भूत उतार  दिया था। अब उसे अपनी गलती का अहसास हो गया  था। जो नीलेश मीना  के सामने हठधर्मी से अपने किये को उचित ठहरा रहा था। वही  पुलिस के सामने एकदम नकार गया। उसने सारा इल्जाम मीना  पर लगा दिया।
      पुलिस वालो ने  उसकी बात का यकीन करने से पहले उसकी दोनों बेटियो की जाँच करवाई। जिससे साफ हो गया। उसकी दोनों बेटियो का कौमार्य भंग  हो चुका  है। दोनों बेटियो के ब्यानो से भी बात की सच्चाई पता चल गयी थी।  दोनों बेटियो की उम्र बहुत कम  थी। इसलिए उन बेटियो को चालबाज भी पुलिस समझ नही सकी।
      नीलेश की तरफदारी करने के लिए कोई  रिश्तेदार तैयार नही था। नीलेश के सभी रिश्तेदार संभ्रांत थे। उनका कभी पुलिस वालो से वास्ता नही पड़ा था। इसलिए किसी के मन में उसके प्रति हमदर्दी पैदा नही हो रही थी।  वह पुलिस वालो की मिन्नते करता जिससे उसे अपने रिश्तेदारो को फोन करके अपने जेल में होने की बात बता सके।  उनसे मदद की गुहार लगाता तो वह पिघल कर उससे मिलने चले आये ।
      नीलेश की सारी  दबंगाई  अब खत्म हो गयी थी। वह उनसे कहता - मेरी पत्नी  चरित्रहीन है  वह बहुत लालची है। वह मेरे  मकान पर कब्ज़ा करना चाहती है। मेरी सारी  धन -दौलत  हड़प लेना चाहती है। इसलिए वह मुझ पर ऐसा गलीज इल्जाम लगा रही है..
     वह भूल जाता जिसकी बुराई वह कर रहा है। उसे इस परिवार में आये  हुए 22  साल बीत  गए है। इतने सालो में सबके गुण -दोषो का पता चल जाता है। किसी को समझने के लिए इतना लम्बा अरसा बहुत होता है। कोई भी औरत जो साधनहीन और लाचार है  अपने छोटे-छोटे पांच बच्चो के बाप पर झूठा इल्जाम लगाने से पहले 10  बार सोचेगी।
     यदि वह चरित्र हीन  होती तो  जब उसपर बाँझ होने का इल्जाम लगा कर परेशान किया जा रहा था। तभी किसी और से सम्बन्ध बना लेती लेकिन उसने चुपचाप सारे  दुःख सहते हुए इसी घर में रही। वह तो चरित्र हीन  होती तो कभी का घर छोड़ चुकी होती।  नीलेश के मीना  पर लगाये इल्जाम उसे निर्दोष साबित नही कर पा  रहे थे। बल्कि मीना  से ही लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे थे। सब को मीना  पर दया आ  रही थी।  

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