रम्या की सुंदरता और उसका चुलबुला पन अन्य सभी को उसकी और देखने के लिए मजबूर कर देता था। एक दिन रम्या अपनी सहेली के घर उसकी जन्मदिन की पार्टी में गयी। वहाँ पर उसे कई निगाहे देख रही थी। वह अपनी बेख्याली में अपने काम में लगी हुई थी। उसके लिए इन सब के देखने का असर नही हो रहा था। उसकी उम्र अभी केवल 18 साल थी। उसके लिए केवल मौज मस्ती ही जीवन था। उसके लिए किसी की निगाहो का अंतर कोई मायने नही रखता था। वह उन सब के बारे में सोचना जरूरी नही समझती थी।
रम्या को अकेले देखकर एक लड़का उसके पास आया। उससे दोस्ती करने के हिसाब से उसने पूछा - मेरा नाम महेश है। मै आपसे मिलने की बहुत कोशिश कर रहा था। भगवान का शुक्र है। जो मै आपसे बात कर सका।
रम्या बोली -आप मुझसे किसलिए बात करना चाहते है। मै आपको जानती नही हूँ। मै अनजान लोगो से बात नही करती।
महेश बोला -मेरा इरादा आपको परेशान करने का नही है। आप मुझे बहुत अच्छी लगी। मै स्नेहा का चचेरा भाई महेश हूँ।
रम्या बोली -ठीक है।
रम्या वहाँ से चली गई। महेश हाथ मलता रह गया। अपनी खीझ उतारने के लिए उसके हाथ अपने बालो को संवारने लगे।
ऐसे कई मौके आये। जब रम्या और महेश का आमना -सामना हुआ। लेकिन रम्या ने उसकी और ध्यान नही दिया। लेकिन उसके मन में उसके प्रति कुछ कोमलता जगने लगी । उसे अब महेश का इंतजार रहता भले ही दोनों आपस में बात नही कर पाते।रम्या के चेहरे पर मुस्कुराहट दिखाई देने लगी।
रम्या की तरफ से अच्छा अनुभव करने के बाद महेश ने उससे पूछा -मुझे आप बहुत अच्छी लगती हो। मै आपके साथ एक कप काफी पीना चाहता हूँ।
रम्या ने उसकी बात का जबाब देने की जगह, मुस्कुरा दी।उसकी मुस्कुराहट देखकर उसकी हिम्मत बढ़ गयी। उसने कहा -सामने रेस्टोरेंट में चलते है। वहाँ आराम से बैठ कर बाते करेंगे।
महेश बोला -मै सेना में नौकरी करता हूँ। आप मुझे सड़क -छाप मत समझिए। मैने जब से आपको देखा है। दिल काबू में नही है। ऐसा इससे पहले मैने कभी महसूस नही किया। आप अगर मेरी भावनाओ को समझेंगी तो मेरी हालत के बारे में जान सकेंगी। यदि आपको कोई और पसंद है तो मै आपके रास्ते से हट जाऊँगा। आपको मेरे कारण रुसवाई का सामना नही करना पड़ेगा।
रम्या उसके व्यक्तित्व से पहले ही प्रभावित थी। उसके बोलने के तरीके पर वह फ़िदा हो गयी। उसने अपने मन की बात अभी महेश पर जाहिर नही की। लेकिन उसका दिल महेश की तरफ झुक गया था।वह चुपचाप महेश की बात सुनकर मुस्कुराती रही। इतने में कब समय बीत गया इसका उन्हें एहसास ही नही हुआ।
रम्या ने अपनी घडी देखकर कहा -अब मुझे चलना चाहिए बहुत देर हो चुकी है घर में सभी इतजार कर रहे होंगे।
महेश बोला -मै कल फिर यही तुम्हारा इंतजार करूंगा।
रम्या बोली -मै कल नही आ सकूँगी।
महेश बोला -मै फिर भी तुम्हारा इंतजार करूंगा।
अगले दिन रम्या का कोई इरादा महेश से मिलने का नही था लेकिन जैसे -जैसे समय करीब आता जा रहा था उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। उसकी बेचैनी इस कदर बढ़ गयी कि उसके लिए घर में रहना मुश्किल हो गया उसने बाहर निकलने के बहाने सोचने शुरू कर दिए।
वह माँ से बोली -माँ सब्जी ले आउ घर में कोई सब्जी नही है।
माँ को ख़ुशी हुई चलो बेटी को घर की जिम्मेदारी महसूस हुई। उसने कहा -ठीक है। चार -पांच तरह की सब्जी लेती आना। रोज कौन बाहर सब्जी लेने जायेगा।
इस तरह रोज रम्या नया बहाना तलाश करके महेश से मिलने जाने लगी।
रम्या को अकेले देखकर एक लड़का उसके पास आया। उससे दोस्ती करने के हिसाब से उसने पूछा - मेरा नाम महेश है। मै आपसे मिलने की बहुत कोशिश कर रहा था। भगवान का शुक्र है। जो मै आपसे बात कर सका।
रम्या बोली -आप मुझसे किसलिए बात करना चाहते है। मै आपको जानती नही हूँ। मै अनजान लोगो से बात नही करती।
महेश बोला -मेरा इरादा आपको परेशान करने का नही है। आप मुझे बहुत अच्छी लगी। मै स्नेहा का चचेरा भाई महेश हूँ।
रम्या बोली -ठीक है।
रम्या वहाँ से चली गई। महेश हाथ मलता रह गया। अपनी खीझ उतारने के लिए उसके हाथ अपने बालो को संवारने लगे।
ऐसे कई मौके आये। जब रम्या और महेश का आमना -सामना हुआ। लेकिन रम्या ने उसकी और ध्यान नही दिया। लेकिन उसके मन में उसके प्रति कुछ कोमलता जगने लगी । उसे अब महेश का इंतजार रहता भले ही दोनों आपस में बात नही कर पाते।रम्या के चेहरे पर मुस्कुराहट दिखाई देने लगी।
रम्या की तरफ से अच्छा अनुभव करने के बाद महेश ने उससे पूछा -मुझे आप बहुत अच्छी लगती हो। मै आपके साथ एक कप काफी पीना चाहता हूँ।
रम्या ने उसकी बात का जबाब देने की जगह, मुस्कुरा दी।उसकी मुस्कुराहट देखकर उसकी हिम्मत बढ़ गयी। उसने कहा -सामने रेस्टोरेंट में चलते है। वहाँ आराम से बैठ कर बाते करेंगे।
महेश बोला -मै सेना में नौकरी करता हूँ। आप मुझे सड़क -छाप मत समझिए। मैने जब से आपको देखा है। दिल काबू में नही है। ऐसा इससे पहले मैने कभी महसूस नही किया। आप अगर मेरी भावनाओ को समझेंगी तो मेरी हालत के बारे में जान सकेंगी। यदि आपको कोई और पसंद है तो मै आपके रास्ते से हट जाऊँगा। आपको मेरे कारण रुसवाई का सामना नही करना पड़ेगा।
रम्या उसके व्यक्तित्व से पहले ही प्रभावित थी। उसके बोलने के तरीके पर वह फ़िदा हो गयी। उसने अपने मन की बात अभी महेश पर जाहिर नही की। लेकिन उसका दिल महेश की तरफ झुक गया था।वह चुपचाप महेश की बात सुनकर मुस्कुराती रही। इतने में कब समय बीत गया इसका उन्हें एहसास ही नही हुआ।
रम्या ने अपनी घडी देखकर कहा -अब मुझे चलना चाहिए बहुत देर हो चुकी है घर में सभी इतजार कर रहे होंगे।
महेश बोला -मै कल फिर यही तुम्हारा इंतजार करूंगा।
रम्या बोली -मै कल नही आ सकूँगी।
महेश बोला -मै फिर भी तुम्हारा इंतजार करूंगा।
अगले दिन रम्या का कोई इरादा महेश से मिलने का नही था लेकिन जैसे -जैसे समय करीब आता जा रहा था उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। उसकी बेचैनी इस कदर बढ़ गयी कि उसके लिए घर में रहना मुश्किल हो गया उसने बाहर निकलने के बहाने सोचने शुरू कर दिए।
वह माँ से बोली -माँ सब्जी ले आउ घर में कोई सब्जी नही है।
माँ को ख़ुशी हुई चलो बेटी को घर की जिम्मेदारी महसूस हुई। उसने कहा -ठीक है। चार -पांच तरह की सब्जी लेती आना। रोज कौन बाहर सब्जी लेने जायेगा।
इस तरह रोज रम्या नया बहाना तलाश करके महेश से मिलने जाने लगी।
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