आजकल आप आये दिन सुन रहे होंगे भारतीय हिन्दू असहिष्णु हो रहे है। इसकी सच्चाई पर आपको यकीन आता है। मुझे ये सब नेताओ और संचार माध्यमो के द्वारा फैलाया भ्रम जाल लग रहा है। इसी संदर्भ में मै आपको कुछ उदाहरण देना चाहती हूँ।
शाहरुख़ खान ने अपने जन्मदिन पर ये शव्द दोहराये। जिनको सुनकर मै तिलमिला गयी। आज आप सोच के देखे। शाहरुख़ खान की फिल्मे क्या सिर्फ मुस्लिम समुदाय की बदौलत चलती है। मेरे चारो और मुस्लिम कलाकारों की फिल्मो को देखने वालो का जमावड़ा है। जो मुस्लिम कलाकारों (सलमान खान ,सैफ अली खान. इमरान खान, इमरान हाश्मी ,इरफ़ान खान.नवाजुद्दीन सद्दीकी, कमल हासन। आमिर खान ) की कोई फिल्म हॉल पर नही छोड़ते। वे कोशिश करते है उसकी फिल्म पहला दिन और पहले शो को देखे। आपको लगता है वे सब मुस्लिम है। ये सारे खान भारत में सुपर हिट है. ये केवल मुस्लिम समुदायों के लोगो के कारण इतने हिट हो सकते है कभी नही।
एक भारत ही ऐसा देश है जो 80 % हिन्दू आबादी का देश कहलाता है। हिन्दू आबादी को दबाने के लिए सारी सरकारें अपना पूरा प्रयास करती है। इसमें जो हिन्दू अपने को गौरवान्वित महसूस करे उन्हें असहिष्णु की उपाधि दे दी जाती है।
आप भारत के आलावा कोई और मुस्लिम देश जैसे ईरान ,इराक ,सीरिया ,अफगानिस्तान ,पाकिस्तान , मिस्र,आदि में उन्हें जाने के लिए कहिये ये किसी और देश में जाने के लिए तैयार नही होंगे क्योंकि उन्हें पता है केवल भारत ही ऐसा देश है ,जहॉ बहुसंख्यक आबादी को कितना भी गलत बोल दो। वे एक शब्द भी अपने हित की बात बोल देंगे तो उन्हें सांप्रदायिक की संज्ञा दे सकते है।
एक भारत ही ऐसा देश है जहॉ ऊँची जगहों पर पहुंचे लोग हिन्दुओ के लिए असभ्य शब्द बोल देते है ,उन्हें कोई गलत नही कहता। लेकिन एक हिन्दू जहॉ इसका विरोध करता है ,तो सारी संवेधानिक संस्थाये उसे दबाने में अपना पूरा जोर लगा देती है।
भारत के आलावा किसी भी मुस्लिम देश में आप एक भी हिन्दू अभिनेता या नेता का नाम मुझे बताये। मेने इतनी किताबे पड़ी ,काफी जगह ढूंढा लेकिन एक भी देश में मुझे कोई भी हिन्दू नही दिखाई दिया। आपको लगता है इन देशो में हिन्दू निवास नही करते या उनमे आगे बढ़ने की योग्यता नही है। आप उन देशो में रहने वालो को सांप्रदायिक कहेंगे या भारतीय हिन्दुओ को सांप्रदायिक कहेंगे।
भारत में रहने वाली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा नेहरू की शादी फिरोज से हुई थी। वह ईरान से आये पारसी समुदाय का सदस्य था। जहाँ की सरकार ने पारसियों को अपने देश से खदेड़ दिया था। वह समुदाय मुस्लिम समुदाय से निकला हुआ था। उस समुदाय के द्वारा उनके नियमो का पालन ना करने के कारण उनसे ईरान में रहने का अधिकार छीन लिया गया था। ईरान में उनके नियमो का पालन न करने वाले उस देश में नही रह सकते है। वह देश सांप्रदायिक है या भारत। जवाहर लाल नेहरू की बेटी ने उससे शादी की.
नेहरू खुद इस शादी के विरुद्ध थे। लेकिन गांधी जी के कहने पर उन्होंने अपनी बेटी की शादी एक मुस्लिम से कर दी। उसकी जाति पर मुलम्मा चढ़ाने के लिए महात्मा गांधी ने उन्हें गोद लेकर अपना गांधी उपनाम दिया। वह भारत के सर्वोच्च पद पर बैठी।
किस कारण से भारत पाकिस्तान का विभाजन हुआ था। नेहरू और जिन्ना की दुश्मनी सत्ता के सर्वोच्च पद तक पहुँचने के कारण हुई थी। गांधीजी इस वैमनस्य को मिटाने के लिए पाकिस्तान को बनने से रोकने के लिए सारे उच्च पद मुस्लिमो को देने के लिए तैयार थे लेकिन नेहरू अपने सत्ता के मोह के आगे झुकने के लिए तैयार नही हुए। धर्म के नाम पर पाकिस्तान का उदय हुआ।
आपने नेहरू परिवार के आलावा किसी और परिवार का उपनाम कभी नेहरू सुना है। मेने आजतक नही सुना। आपको हैरानी नही होती सत्ता के सर्वोच्च पद पर रहने वाले परिवार का उपनाम कैसे पड़ा या किसी ने इस उपनाम को अपनाने में अपने को गौरवान्वित क्यों महसूस नही किया। जरा इस पर विचार करके मुझे इसका जबाब देने का कष्ट करे।
दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दिक्षित की बेटी ने मुस्लिम से शादी की है कितनो को इसका पता हे। भारत के अधिकतर हिन्दू नेताओ के पारिवारिक लोग मुस्लिम है। लेकिन उनको भारतीयों ने सत्ता के गलियारों तक पहुचने से कभी रोका है ? कभी नही।
एक भारतीय हिन्दू पड़ा -लिखा और जागरूक है। वह इस बात को अधिक महत्व नही देता। लेकिन उसे ही दू सरे समुदाय के अल्पसंख्यक असहिष्णु कह रहे है। पुरुस्कार लौटा रहे है।
ये सब उन नेताओ के कहने पर हो रहा है। जिनकी चालबाजियों के कारण भारत तीन हिस्सों में बंटा। और वे भारत को और कई हिस्सों में बाँटने में लगे है। भारत में ही सर्वोच्च स्थानो पर दूसरे समुदायों के लोग मिलेंगे। फिर भी हिन्दुओ को असिष्णु कहने का अधिकार उनको किसने दिया भारतीय बहुसंख्यक आबादी ने। इसे उन्हें कभी नही भूलना चाहिए।
शाहरुख़ खान ने अपने जन्मदिन पर ये शव्द दोहराये। जिनको सुनकर मै तिलमिला गयी। आज आप सोच के देखे। शाहरुख़ खान की फिल्मे क्या सिर्फ मुस्लिम समुदाय की बदौलत चलती है। मेरे चारो और मुस्लिम कलाकारों की फिल्मो को देखने वालो का जमावड़ा है। जो मुस्लिम कलाकारों (सलमान खान ,सैफ अली खान. इमरान खान, इमरान हाश्मी ,इरफ़ान खान.नवाजुद्दीन सद्दीकी, कमल हासन। आमिर खान ) की कोई फिल्म हॉल पर नही छोड़ते। वे कोशिश करते है उसकी फिल्म पहला दिन और पहले शो को देखे। आपको लगता है वे सब मुस्लिम है। ये सारे खान भारत में सुपर हिट है. ये केवल मुस्लिम समुदायों के लोगो के कारण इतने हिट हो सकते है कभी नही।
एक भारत ही ऐसा देश है जो 80 % हिन्दू आबादी का देश कहलाता है। हिन्दू आबादी को दबाने के लिए सारी सरकारें अपना पूरा प्रयास करती है। इसमें जो हिन्दू अपने को गौरवान्वित महसूस करे उन्हें असहिष्णु की उपाधि दे दी जाती है।
आप भारत के आलावा कोई और मुस्लिम देश जैसे ईरान ,इराक ,सीरिया ,अफगानिस्तान ,पाकिस्तान , मिस्र,आदि में उन्हें जाने के लिए कहिये ये किसी और देश में जाने के लिए तैयार नही होंगे क्योंकि उन्हें पता है केवल भारत ही ऐसा देश है ,जहॉ बहुसंख्यक आबादी को कितना भी गलत बोल दो। वे एक शब्द भी अपने हित की बात बोल देंगे तो उन्हें सांप्रदायिक की संज्ञा दे सकते है।
एक भारत ही ऐसा देश है जहॉ ऊँची जगहों पर पहुंचे लोग हिन्दुओ के लिए असभ्य शब्द बोल देते है ,उन्हें कोई गलत नही कहता। लेकिन एक हिन्दू जहॉ इसका विरोध करता है ,तो सारी संवेधानिक संस्थाये उसे दबाने में अपना पूरा जोर लगा देती है।
भारत के आलावा किसी भी मुस्लिम देश में आप एक भी हिन्दू अभिनेता या नेता का नाम मुझे बताये। मेने इतनी किताबे पड़ी ,काफी जगह ढूंढा लेकिन एक भी देश में मुझे कोई भी हिन्दू नही दिखाई दिया। आपको लगता है इन देशो में हिन्दू निवास नही करते या उनमे आगे बढ़ने की योग्यता नही है। आप उन देशो में रहने वालो को सांप्रदायिक कहेंगे या भारतीय हिन्दुओ को सांप्रदायिक कहेंगे।
भारत में रहने वाली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा नेहरू की शादी फिरोज से हुई थी। वह ईरान से आये पारसी समुदाय का सदस्य था। जहाँ की सरकार ने पारसियों को अपने देश से खदेड़ दिया था। वह समुदाय मुस्लिम समुदाय से निकला हुआ था। उस समुदाय के द्वारा उनके नियमो का पालन ना करने के कारण उनसे ईरान में रहने का अधिकार छीन लिया गया था। ईरान में उनके नियमो का पालन न करने वाले उस देश में नही रह सकते है। वह देश सांप्रदायिक है या भारत। जवाहर लाल नेहरू की बेटी ने उससे शादी की.
नेहरू खुद इस शादी के विरुद्ध थे। लेकिन गांधी जी के कहने पर उन्होंने अपनी बेटी की शादी एक मुस्लिम से कर दी। उसकी जाति पर मुलम्मा चढ़ाने के लिए महात्मा गांधी ने उन्हें गोद लेकर अपना गांधी उपनाम दिया। वह भारत के सर्वोच्च पद पर बैठी।
किस कारण से भारत पाकिस्तान का विभाजन हुआ था। नेहरू और जिन्ना की दुश्मनी सत्ता के सर्वोच्च पद तक पहुँचने के कारण हुई थी। गांधीजी इस वैमनस्य को मिटाने के लिए पाकिस्तान को बनने से रोकने के लिए सारे उच्च पद मुस्लिमो को देने के लिए तैयार थे लेकिन नेहरू अपने सत्ता के मोह के आगे झुकने के लिए तैयार नही हुए। धर्म के नाम पर पाकिस्तान का उदय हुआ।
आपने नेहरू परिवार के आलावा किसी और परिवार का उपनाम कभी नेहरू सुना है। मेने आजतक नही सुना। आपको हैरानी नही होती सत्ता के सर्वोच्च पद पर रहने वाले परिवार का उपनाम कैसे पड़ा या किसी ने इस उपनाम को अपनाने में अपने को गौरवान्वित क्यों महसूस नही किया। जरा इस पर विचार करके मुझे इसका जबाब देने का कष्ट करे।
दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दिक्षित की बेटी ने मुस्लिम से शादी की है कितनो को इसका पता हे। भारत के अधिकतर हिन्दू नेताओ के पारिवारिक लोग मुस्लिम है। लेकिन उनको भारतीयों ने सत्ता के गलियारों तक पहुचने से कभी रोका है ? कभी नही।
एक भारतीय हिन्दू पड़ा -लिखा और जागरूक है। वह इस बात को अधिक महत्व नही देता। लेकिन उसे ही दू सरे समुदाय के अल्पसंख्यक असहिष्णु कह रहे है। पुरुस्कार लौटा रहे है।
ये सब उन नेताओ के कहने पर हो रहा है। जिनकी चालबाजियों के कारण भारत तीन हिस्सों में बंटा। और वे भारत को और कई हिस्सों में बाँटने में लगे है। भारत में ही सर्वोच्च स्थानो पर दूसरे समुदायों के लोग मिलेंगे। फिर भी हिन्दुओ को असिष्णु कहने का अधिकार उनको किसने दिया भारतीय बहुसंख्यक आबादी ने। इसे उन्हें कभी नही भूलना चाहिए।
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