हमारा जीवन कभी इतना उलझ जाता है। जिसमे से निकलना असंभव लगने लगता है। ऐसा ही मेरे साथ हुआ। मेरे जीवन में सुनयना का पदार्पण हुआ। जो कभी मेरे लिए प्रेरणा स्रोत्र हुआ करती थी। आज उसका जीवन उलझनों का पुलिंदा बन गया था। वह मुझसे बड़ी है। और खुद को समझदार समझती है। इसलिए उनसे साफ शब्दों में कुछ कहना। मेरे लिए उचित नही था। मेने छिपे हुए शब्दों में उन्हें समझाना चाहा। लेकिन वो इस कदर भावनाओ के समंदर में डूबी हुई थी। उनके दर्द को मै कम करने में असमर्थ रही।
मुझे लोगो की समस्या दूर करने का शगल नही है। मेरा उनसे वास्ता भी कम पड़ता है। उनका दर्द जब मैने समझा तो मै घबरा गयी। वे मेरे सामने आते ही रो पड़ी। उनका रोने का कारण वाजिब नही था। उन्हें कुछ समय तक सांत्वना देने की कोशिश की। उनसे उलझे हुए रिश्ते सुलझाने के लिए कहा।
उन्होंने जबाब दिया -जो ख़त्म हो गया। उसे में फिर से जोड़ नही सकती।
मै उनकी समस्याओं से आपको मिलवाती हूँ। ऐसी समस्याएं आज घर -घर में पैठ बनाये बैठी है। जिन्हे सुलझाना किसी को नही आ रहा है।
उनकी बेटी किसी और समुदाय के इंसान से शादी करना चाहती है। वे उससे अपनी बेटी की शादी करने के लिए तैयार भी है। लेकिन लड़के की माँ इस रिश्ते के लिए तैयार नही है।
वह लड़का साफ शव्दो में कहता है -जब तक मेरी माँ शादी के लिए हाँ नही करेगी तब तक मै तुमसे शादी नही करूँगा।
इस तरह उन्हें इस रिश्ते में बंधे हुए दो साल बीत गए लेकिन वह लड़का अपनी माँ को मनाने में कामयाब नही हुआ. दोनों एक दूसरे से मिलना बंद नही कर रहे थे। सुनेंना को लगने लगा था वह लड़का शादी ना करने का बहाना बना रहा है बल्कि उस लड़की का गलत फायदा उठा कर उसे छोड़ देना चाहता है वरना बालिग और समर्थ लड़का माँ का बहाना कब तक बनाएगा कभी तो शादी के लिए उसे तैयार होना चाहिए था इसलिए सुनयना ने अपनी बेटी को 6 महीने से रिश्तेदार के घर भेज रखा था। ताकि समय के अंतराल में वह उसे भूल जाये या उसके जीवन में किसी और लड़के का आगमन हो जाये। जिससे उसकी दूसरी जगह शादी की जा सके। उसे उसकी किसी से भी शादी पर एतराज नही है लेकिन शादी का मतलब केवल शादी होना चाहिए। वह अपनी बेटी की शादी जबरदस्ती कर नही सकती क्योंकि माँ के इशारो पर चलने वाली लड़की वह नही है। वह बेटी का दिल दुखा कर उसकी शादी किसी अन्य से नही करना चाहती। वह शादी के लिए बेटी की रजामंदी का इंतजार कर रही है।
इस बीच सुनैना और उसके पति रमेश में अनबन हो गयी थी। वह पांच साल पहले तक अपने बड़ो के साथ रहते थे। उस समय दोनों में बहुत प्यार था। उनको देख कर लोग उनके प्यार की दुहाई देते थे। रमेश सुनैना के हर इशारे को समझ कर समय से पहले सब काम कर देता था। रमेश जैसा कर्मठ पति के बारे में सोच कर हम जैसे लोगो को जलन होती थी। लेकिन उनके जीवन में इतनी ज्यादा गलत फ़हमिया आ गयी है कि दोनों एक दूसरे को बर्दास्त नही कर सकते है।
उनके जीवन में झाँकने का मुझे शौक नही है। लेकिन उन जैसे बहुत से परिवार है। जिनकी उलझने इतनी बड़ी नही है। जितना उन्होंने बना दी है। उन्हें देख कर लगता है। ये मामला नही सुलझा तो एक दिन रमेश पागल हो जायेगा और सुनैना खुदकशी कर लेगी।
ऐसे रिश्तो को सँभालने के लिए मेने उनके बड़ो का फोन नंबर लेकर उन्हें फोन करने के बारे में सोचा। लेकिन मुझे कही से उनका नंबर नही मिला। सुनैना अपने सगे रिश्तेदारो से मिलने के लिए तैयार नही है। साथ रहते हुए हर रिश्ते में कड़वाहट आ जाती है। लेकिन समय उनसे गर्द हटा भी देता है क्योंकि खून के रिश्ते इतनी मजबूती से जुड़े होते है कि बच्चो का अनिष्ट कोई भी बड़ा सहन करने की जगह उन्हें माफ़ करने में भलाई समझता है।
कुछ रिश्तो का अलगाव इंसान को तोड़ देता है य़ही हालत इस रिश्ते की है। उनके बीच की चुप्पी किसी तरह से टूट जाये और वे एक साथ बाते करना शुरू कर दे तो उनकी उलझने सुलझ जाये। मुझे लगता है। उनकी सहज बातचीत धीरे -धीरे उनके अंदर के गुबार को बाहर निकाल देगा। सभी रिश्तेदारो से मिलने पर उनकी परस्पर नफरत भी ख़त्म हो जाएगी।
आपने सुना होगा संयुक्त परिवार में रहने वाले दम्पत्ति दूसरो की बुराई भले कर ले। वे आपस में प्यार से रहते है। जबकि अकेले रहने वाले दम्पत्ति आपस में दुश्मनो की तरह व्यवहार करने लगते है। इसी कारण बहुत ज्यादा तलाक हो रहे है। कई लोगो के साथ मन की बात करने से हमारे मन में किसी एक इंसान के प्रति दुर्भावना नही रहती बल्कि वह बंट जाती है। हमारा मन भी हल्का हो जाता है।
मुझे लोगो की समस्या दूर करने का शगल नही है। मेरा उनसे वास्ता भी कम पड़ता है। उनका दर्द जब मैने समझा तो मै घबरा गयी। वे मेरे सामने आते ही रो पड़ी। उनका रोने का कारण वाजिब नही था। उन्हें कुछ समय तक सांत्वना देने की कोशिश की। उनसे उलझे हुए रिश्ते सुलझाने के लिए कहा।
उन्होंने जबाब दिया -जो ख़त्म हो गया। उसे में फिर से जोड़ नही सकती।
मै उनकी समस्याओं से आपको मिलवाती हूँ। ऐसी समस्याएं आज घर -घर में पैठ बनाये बैठी है। जिन्हे सुलझाना किसी को नही आ रहा है।
उनकी बेटी किसी और समुदाय के इंसान से शादी करना चाहती है। वे उससे अपनी बेटी की शादी करने के लिए तैयार भी है। लेकिन लड़के की माँ इस रिश्ते के लिए तैयार नही है।
वह लड़का साफ शव्दो में कहता है -जब तक मेरी माँ शादी के लिए हाँ नही करेगी तब तक मै तुमसे शादी नही करूँगा।
इस तरह उन्हें इस रिश्ते में बंधे हुए दो साल बीत गए लेकिन वह लड़का अपनी माँ को मनाने में कामयाब नही हुआ. दोनों एक दूसरे से मिलना बंद नही कर रहे थे। सुनेंना को लगने लगा था वह लड़का शादी ना करने का बहाना बना रहा है बल्कि उस लड़की का गलत फायदा उठा कर उसे छोड़ देना चाहता है वरना बालिग और समर्थ लड़का माँ का बहाना कब तक बनाएगा कभी तो शादी के लिए उसे तैयार होना चाहिए था इसलिए सुनयना ने अपनी बेटी को 6 महीने से रिश्तेदार के घर भेज रखा था। ताकि समय के अंतराल में वह उसे भूल जाये या उसके जीवन में किसी और लड़के का आगमन हो जाये। जिससे उसकी दूसरी जगह शादी की जा सके। उसे उसकी किसी से भी शादी पर एतराज नही है लेकिन शादी का मतलब केवल शादी होना चाहिए। वह अपनी बेटी की शादी जबरदस्ती कर नही सकती क्योंकि माँ के इशारो पर चलने वाली लड़की वह नही है। वह बेटी का दिल दुखा कर उसकी शादी किसी अन्य से नही करना चाहती। वह शादी के लिए बेटी की रजामंदी का इंतजार कर रही है।
इस बीच सुनैना और उसके पति रमेश में अनबन हो गयी थी। वह पांच साल पहले तक अपने बड़ो के साथ रहते थे। उस समय दोनों में बहुत प्यार था। उनको देख कर लोग उनके प्यार की दुहाई देते थे। रमेश सुनैना के हर इशारे को समझ कर समय से पहले सब काम कर देता था। रमेश जैसा कर्मठ पति के बारे में सोच कर हम जैसे लोगो को जलन होती थी। लेकिन उनके जीवन में इतनी ज्यादा गलत फ़हमिया आ गयी है कि दोनों एक दूसरे को बर्दास्त नही कर सकते है।
उनके जीवन में झाँकने का मुझे शौक नही है। लेकिन उन जैसे बहुत से परिवार है। जिनकी उलझने इतनी बड़ी नही है। जितना उन्होंने बना दी है। उन्हें देख कर लगता है। ये मामला नही सुलझा तो एक दिन रमेश पागल हो जायेगा और सुनैना खुदकशी कर लेगी।
ऐसे रिश्तो को सँभालने के लिए मेने उनके बड़ो का फोन नंबर लेकर उन्हें फोन करने के बारे में सोचा। लेकिन मुझे कही से उनका नंबर नही मिला। सुनैना अपने सगे रिश्तेदारो से मिलने के लिए तैयार नही है। साथ रहते हुए हर रिश्ते में कड़वाहट आ जाती है। लेकिन समय उनसे गर्द हटा भी देता है क्योंकि खून के रिश्ते इतनी मजबूती से जुड़े होते है कि बच्चो का अनिष्ट कोई भी बड़ा सहन करने की जगह उन्हें माफ़ करने में भलाई समझता है।
कुछ रिश्तो का अलगाव इंसान को तोड़ देता है य़ही हालत इस रिश्ते की है। उनके बीच की चुप्पी किसी तरह से टूट जाये और वे एक साथ बाते करना शुरू कर दे तो उनकी उलझने सुलझ जाये। मुझे लगता है। उनकी सहज बातचीत धीरे -धीरे उनके अंदर के गुबार को बाहर निकाल देगा। सभी रिश्तेदारो से मिलने पर उनकी परस्पर नफरत भी ख़त्म हो जाएगी।
आपने सुना होगा संयुक्त परिवार में रहने वाले दम्पत्ति दूसरो की बुराई भले कर ले। वे आपस में प्यार से रहते है। जबकि अकेले रहने वाले दम्पत्ति आपस में दुश्मनो की तरह व्यवहार करने लगते है। इसी कारण बहुत ज्यादा तलाक हो रहे है। कई लोगो के साथ मन की बात करने से हमारे मन में किसी एक इंसान के प्रति दुर्भावना नही रहती बल्कि वह बंट जाती है। हमारा मन भी हल्का हो जाता है।
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