#kshmiri pandit

     कश्मीर से जब हिन्दुओ को राज्य छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था। तब किसी ने पुरुस्कार वापस क्यों नही किये थे। पांच लाख हिन्दुओ ने किन परिस्थितियों में कश्मीर छोड़ा होगा  जरा उसकी कल्पना करके देखो।
     आप शायद उन परिश्थितियो की कल्पना नही कर पा  रहे होंगे। एक साथ पांच लाख की संख्या किस तरह से अपना राज्य रातो -रात छोड़ती है।  उस वक्त आप उसका दर्द नही समझ पाये होंगे। वहाँ  के हिन्दू पिता के सामने उनके बेटो को मौत के घाट उतार  दिया जाता था। उसके मांस को परिवार वालो को खाने के लिए मजबूर किया जाता था। अपने अजीज को भोजन के रूप में एक हिन्दू के लिए खाना आप सोच सकते है कितना मुश्किल होता है।  उन दिनों कांग्रेस की सरकार थी इसलिए इस तरह की खबरों पर पाबंदी थी। अधिकतर लोग इन सबसे अनजान रहे।
        90  के दशक में लोगो के लिए हिन्दुओ का जीना  या मरना कोई मायने नही रखता था। कोई समाचार इस तरह की खबरों को छापता भी नही था। हिन्दुओ की औरतो को सरे आम उठा लिया जाता था आप उन औरतो  के साथ मुसलमान किस तरह का सलूक करते होंगे कल्पना करके देखो।
     यदि मुसलमानो के साथ हिन्दुओ जैसा व्यवहार हो रहा होता तो आपको लगता है ये बयानबाजी करने के लिए भारत में होते। आज एक भी कश्मीरी पंडित का बयान  किसी जगह सुनाया जाता है। मेने कही उनके दर्द को बयान करते हुए किसी नेता या बुद्धिजीवी को  नही  सुना है। सारे मुसलमानो को सर आँखों पर बिठाया जा रहा है। लेकिन उस पर ये भारतीयों के लिए कुफ्र बक रहे है। लेकिन भारतीय फिर भी इन पर कुर्बान हुए जा रहे है।
     1984  के दंगो में ३००० हजार सिक्खो का कत्लेआम किया गया। तब किसी ने अपने पुरुस्कार क्यों नही लौटाए।  भारत में रहने वाले केवल मुस्लिम लोगो का दर्द ही सबको द्रवीभूत करता है। किसी सिक्ख या कश्मीरी पंडित का दुःख कोई मायने नही रखता। उन्हें किसी तरह की सुविधा नही मिलती।
     उन्हे  अपने राज्य से निकाल  दिया गया है। इसलिए उन्हें शरणार्थी के फायदे भी नही मिल सकते क्योंकि शरणार्थी दूसरे देश से आये  हुए लोगो को समझा जाता है। उनकी समस्या का आकलन करने का अब तक कोई पैमाना तय ही नहीं किया गया है। जबकि ये समस्या कमसकम 25  साल से हमारे सामने खड़ी  है एक हिन्दू राष्ट्र में कश्मीरी  हिन्दुओ का दर्द कोई नही समझ रहा. हम असहिष्णु है  या मुसलमान जो कश्मीरी पंडितो के दर्द से अनजान है। 
       मोदी उनके कश्मीर में पहुँचाने की कोशिशे कर रहे है। कश्मीर के लोगो को मदद के रूप में हजारो करोड़ रूपये दिए जा रहे है लेकिन वहाँ की सरकार कोई कार्यवाही उन्हें लौटाने की नही कर रही लेकिन कोई उनकी तरफदारी करने के लिए तैयार नही है। जितनी  तरफदारी कर रहे हे वे केवल मुसलमानो के भले के लिए सोच रहे है। एक भी हिन्दू कश्मीरी पंडितो के लिए आवाज क्यों नही उठा रहा। जब हिन्दू ही कश्मीरी पंड़ितों के दर्द में उनका साथ नही  दे रहे तो आप किसी और धर्म के लोगो से कैसे मदद की उम्मीद कर सकते है। 

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