आमिर खान और शाहरुख़ खान के बयानों ने खलबली मचा दी है .उनके शब्दों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया है। यदि भारतीय असहिष्णु होते तो ये मुसलमान सितारे अपने नाम के साथ इतनी बुलंदियों तक पहुंच सकते थे। उनके शब्दों की इतनी अहमियत होती। ये इतने अधिक अमीर हो सकते थे। ये भारत छोड़ने की बात कर रहे होते या किसी और देश में रह रहे होते।
जो लोग गर्मी होते ही विदेश चले जाते है। बारिश या घर की साफ -सफाई के समय में बड़े होटलों में रहने चले जाते है। वे असहिष्णु देश में कैसे रह सकते थे। उनके केवल शब्द ही उनके व्यवहार की पोल खोल रहे है।
आज ये किसी देश का नाम नही ले रहे कि हम इस देश में रहना चाहते है। क्योंकि भारत जैसा सहिष्णु देश इन्हे संसार में कही और नही मिलेगा। मुस्लिम देश अपनी कटटरता से दहक रहे है। वहाँ रहने वाले लोग दूसरे देशो के शरणार्थी बनने के लिए ढेरो परेशानी उठा रहे है। अपने देश को छोड़ना आसान नही होता है। जिंदगी के आखिरी समय तक इंसान अपनी जमी छोड़ने के लिए तैयार नही होता बहुत जयादा मज़बूरी में ही इंसान शरणार्थी के रूप में पनाह लेता है।
में तस्लीमा नसरीन के विचारो से प्रभावित हूँ - वह बांग्लादेशी है उसे भारत में शरण मिली हुई है। उसने शब्दों में कभी इस्लाम धर्म के बारे में कुछ गलत नही कहा है। बल्कि उसने अपने उपन्यास में एक पात्र के माध्यम से इस्लाम धर्म के ऊपर कटाक्ष किया है जिसके एवज में उसे पुरे संसार में इधर से उधर जिंदगी के लिए भागना पड़ रहा है.तमान देश उस की सुरक्षा में लगे है कही उसे कोई मुस्लिम मार ने दे। अंतत वह अपने को भारत में महफूज समझ रही है।
आज मुसलमान अपने आप को डरा हुआ महसूस कर रहा है। पश्चिमी देश और वहाँ के लोग मुसलमानो से सम्बन्ध रखने से डर रहे है। एयरपोर्ट पर मुसलमानो की विशेष रूप से जाँच होती है। लोगो के लिए इस्लाम आतंक का दूसरा नाम बन गया है। उनके धर्म के नियम कानून उनकी असहिष्णुता लोगो और समाज को परेशानी में डाल देती है। उनके कटटर होने से समाज को कितनी परेशानी होती है। उन्हें इसका अहसास नही होता है।
जो लोग गर्मी होते ही विदेश चले जाते है। बारिश या घर की साफ -सफाई के समय में बड़े होटलों में रहने चले जाते है। वे असहिष्णु देश में कैसे रह सकते थे। उनके केवल शब्द ही उनके व्यवहार की पोल खोल रहे है।
आज ये किसी देश का नाम नही ले रहे कि हम इस देश में रहना चाहते है। क्योंकि भारत जैसा सहिष्णु देश इन्हे संसार में कही और नही मिलेगा। मुस्लिम देश अपनी कटटरता से दहक रहे है। वहाँ रहने वाले लोग दूसरे देशो के शरणार्थी बनने के लिए ढेरो परेशानी उठा रहे है। अपने देश को छोड़ना आसान नही होता है। जिंदगी के आखिरी समय तक इंसान अपनी जमी छोड़ने के लिए तैयार नही होता बहुत जयादा मज़बूरी में ही इंसान शरणार्थी के रूप में पनाह लेता है।
में तस्लीमा नसरीन के विचारो से प्रभावित हूँ - वह बांग्लादेशी है उसे भारत में शरण मिली हुई है। उसने शब्दों में कभी इस्लाम धर्म के बारे में कुछ गलत नही कहा है। बल्कि उसने अपने उपन्यास में एक पात्र के माध्यम से इस्लाम धर्म के ऊपर कटाक्ष किया है जिसके एवज में उसे पुरे संसार में इधर से उधर जिंदगी के लिए भागना पड़ रहा है.तमान देश उस की सुरक्षा में लगे है कही उसे कोई मुस्लिम मार ने दे। अंतत वह अपने को भारत में महफूज समझ रही है।
आज मुसलमान अपने आप को डरा हुआ महसूस कर रहा है। पश्चिमी देश और वहाँ के लोग मुसलमानो से सम्बन्ध रखने से डर रहे है। एयरपोर्ट पर मुसलमानो की विशेष रूप से जाँच होती है। लोगो के लिए इस्लाम आतंक का दूसरा नाम बन गया है। उनके धर्म के नियम कानून उनकी असहिष्णुता लोगो और समाज को परेशानी में डाल देती है। उनके कटटर होने से समाज को कितनी परेशानी होती है। उन्हें इसका अहसास नही होता है।
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