काफी समय पहले की बात है। मुझे कुछ समय के लिए घर से बाहर जाना था। इसलिए मै अपने बच्चो को घर पर छोड़ कर चली गयी। उनके साथ उनके बड़े कजिन भी थे। वे भी केवल आठ साल के आस -पास थे। मेरी छोटी बेटी उस समय केवल १ साल की थी उनके भरोसे छोड़ कर मै चली गयी। इसी बीच छोटी बेटी कविता ने पोटी कर ली। उन सब ने इस समस्या से निकलने के लिए अपना -अपना दिमाग लगाया। उन्हें कविता की पोटी कैसे साफ करनी चाहिए।
कविता की बड़ी बहन को जो उस समय 5 साल की थी उसे उन्होंने आदेश दिया -ये तेरी बहन है। इसकी पोटी तुझे साफ करनी चाहिए क्योंकि तू बड़ी है।
उसने आदेश का पालन करते हुए कविता की पोटी साफ कर दी। इतने में उसकी कजिन ने कहा -अभी ये अच्छी तरह से साफ नही हुई है। इसे साबुन से साफ कर।
सविता को ज्यादा जानकारी नही थी। उसने उसकी पोटी दूसरी बार कपडे धोने के साबुन से अच्छी तरह रगड़ -रगड़ कर साफ कर दी। क्योंकि वे इतने छोटे थे कि उन्हें नहाने और कपडे धोने वाले साबुन का अंतर मालूम नही था।
उन्हें इस बार भी संतुष्टि नही मिली। उसके भाई ने जो कुछ ही साल बड़ा था। उसने कहा -अभी इसकी पोटी अच्छी तरह से साफ नही हुई है। इसे कपडे धोने के ब्रश से साफ करना चाहिए।
अबकी बार सविता ने फिर से उनके आदेश का पालन करते हुए ब्रश को उस पर जोर से रगड़ना शुरू कर दिया। सर्दी के समय में कविता की सफाई इस तरह हो रही थी। कविता पर क्या गुजर रही है। इसका ध्यान रखे बिना सारे बच्चे लगे हुए थे। उन्हें कविता के रोने की आवाज से कोई फर्क नही पड़ रहा था।
काफी समय तक कविता की सफाई के चककर में सबने उसे ठन्डे पानी से थोड़ा साफ करने की जगह उसे पूरा भीगो दिया था। ठण्ड के कारण वह चीख -चीख कर रो रही थी। लेकिन उसके कजिन पर कोई असर नही हो रहा था। वे पूरा मन लगा कर अपने काम में लगे हुए थे।
कविता के रोने की आवाज सुन कर उसकी ताई जी आई उन्होंने कविता का हाल देख कर उसे अपनी गोद में ले लिया और उन्होंने कविता को इस यातना से मुक्ति दिलाई। आपको भी अपने इस तरह के कारनामे की याद आई या नही।
कविता की बड़ी बहन को जो उस समय 5 साल की थी उसे उन्होंने आदेश दिया -ये तेरी बहन है। इसकी पोटी तुझे साफ करनी चाहिए क्योंकि तू बड़ी है।
उसने आदेश का पालन करते हुए कविता की पोटी साफ कर दी। इतने में उसकी कजिन ने कहा -अभी ये अच्छी तरह से साफ नही हुई है। इसे साबुन से साफ कर।
सविता को ज्यादा जानकारी नही थी। उसने उसकी पोटी दूसरी बार कपडे धोने के साबुन से अच्छी तरह रगड़ -रगड़ कर साफ कर दी। क्योंकि वे इतने छोटे थे कि उन्हें नहाने और कपडे धोने वाले साबुन का अंतर मालूम नही था।
उन्हें इस बार भी संतुष्टि नही मिली। उसके भाई ने जो कुछ ही साल बड़ा था। उसने कहा -अभी इसकी पोटी अच्छी तरह से साफ नही हुई है। इसे कपडे धोने के ब्रश से साफ करना चाहिए।
अबकी बार सविता ने फिर से उनके आदेश का पालन करते हुए ब्रश को उस पर जोर से रगड़ना शुरू कर दिया। सर्दी के समय में कविता की सफाई इस तरह हो रही थी। कविता पर क्या गुजर रही है। इसका ध्यान रखे बिना सारे बच्चे लगे हुए थे। उन्हें कविता के रोने की आवाज से कोई फर्क नही पड़ रहा था।
काफी समय तक कविता की सफाई के चककर में सबने उसे ठन्डे पानी से थोड़ा साफ करने की जगह उसे पूरा भीगो दिया था। ठण्ड के कारण वह चीख -चीख कर रो रही थी। लेकिन उसके कजिन पर कोई असर नही हो रहा था। वे पूरा मन लगा कर अपने काम में लगे हुए थे।
कविता के रोने की आवाज सुन कर उसकी ताई जी आई उन्होंने कविता का हाल देख कर उसे अपनी गोद में ले लिया और उन्होंने कविता को इस यातना से मुक्ति दिलाई। आपको भी अपने इस तरह के कारनामे की याद आई या नही।
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