रम्या बहुत प्यारी और नटखट बच्ची थी।
सबकी आँखों का तारा थी। इस कारण कुछ जिद्दी भी हो गयी थी लेकिन उसकी जिद पूरी करने से बड़ो को ख़ुशी मिलती थी। जो उसकी चचेरी बहन सौम्या करती वह भी उसकी जिद करती। उसकी जिद बढ़ती जाती थी लेकिन सब उसकी हरकतों का मजा लेते थे।
विद्यालय में प्रवेश के समय उसने अपनी चचेरी बहन सौम्या के विद्यालय में प्रवेश की जिद की। शुरू में अभिभावकों को उसका नवोदय विद्यालय में प्रवेश दिलाने की हिम्मत नही हो रही थी क्योंकि उस विद्यालय में उसे पूरे समय हॉस्टल में रहना पड़ता। नए नवोदय विद्यालय का माहौल की जानकारी के आभाव में उसके अभिभावकों की हिम्मत उसे वहाँ भेजने की नही हो रही थी।
उसकी जिद के कारण उसका विद्यालय में प्रवेश करवा दिया गया। उन्हें तसल्ली थी। उसकी बड़ी बहन रम्या से ज्यादा समझदार थी।सौम्या के उसे सम्भाल लेने के अस्वासन के कारण उनमे रम्या के प्रवेश दिलवाने की हिम्मत आ गयी।
रम्या वहाँ के अनुशासित माहौल में रहकर जिद करना भूल गयी। उसके अंदर दिनोदिन गुणों का विकास होने लगा। वहाँ पर मानसिक विकास के साथ उसको खेलो में भाग लेने के लिए भी उत्साहित किया जाता था। जिसके कारण उसका सर्वांगीण विकास हुआ। जो घर में रहकर कतई नही हो सकता।
वह 12 कक्षा की पढ़ाई के बाद कॉलेज जाने लगी। उसकी कई सारी सहेलियाँ बन गयी। अब उसके मस्ती भरे दिन फिर से आ गए। उसकी प्यारी सी हँसी सबको मदहोश कर देती थी। उसकी चुलबुली बाते सभी को उसके करीब ले आती थी। घर की नटखट बच्ची अब महफ़िल की शान समझी जाने लगी।
सबकी आँखों का तारा थी। इस कारण कुछ जिद्दी भी हो गयी थी लेकिन उसकी जिद पूरी करने से बड़ो को ख़ुशी मिलती थी। जो उसकी चचेरी बहन सौम्या करती वह भी उसकी जिद करती। उसकी जिद बढ़ती जाती थी लेकिन सब उसकी हरकतों का मजा लेते थे।
विद्यालय में प्रवेश के समय उसने अपनी चचेरी बहन सौम्या के विद्यालय में प्रवेश की जिद की। शुरू में अभिभावकों को उसका नवोदय विद्यालय में प्रवेश दिलाने की हिम्मत नही हो रही थी क्योंकि उस विद्यालय में उसे पूरे समय हॉस्टल में रहना पड़ता। नए नवोदय विद्यालय का माहौल की जानकारी के आभाव में उसके अभिभावकों की हिम्मत उसे वहाँ भेजने की नही हो रही थी।
उसकी जिद के कारण उसका विद्यालय में प्रवेश करवा दिया गया। उन्हें तसल्ली थी। उसकी बड़ी बहन रम्या से ज्यादा समझदार थी।सौम्या के उसे सम्भाल लेने के अस्वासन के कारण उनमे रम्या के प्रवेश दिलवाने की हिम्मत आ गयी।
रम्या वहाँ के अनुशासित माहौल में रहकर जिद करना भूल गयी। उसके अंदर दिनोदिन गुणों का विकास होने लगा। वहाँ पर मानसिक विकास के साथ उसको खेलो में भाग लेने के लिए भी उत्साहित किया जाता था। जिसके कारण उसका सर्वांगीण विकास हुआ। जो घर में रहकर कतई नही हो सकता।
वह 12 कक्षा की पढ़ाई के बाद कॉलेज जाने लगी। उसकी कई सारी सहेलियाँ बन गयी। अब उसके मस्ती भरे दिन फिर से आ गए। उसकी प्यारी सी हँसी सबको मदहोश कर देती थी। उसकी चुलबुली बाते सभी को उसके करीब ले आती थी। घर की नटखट बच्ची अब महफ़िल की शान समझी जाने लगी।

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