रमेश और सुनैना जब 5 साल पहले घर वालो से अलग किराये के मकान में आने के लिए तैयार हुए मुझे उस समय इस बात की आशंका परेशान कर रही थी। सुनैना ने बहुत आराम -दायक जिंदगी बिताई थी। वह और रमेश दोनों काम करके पैसा कमाते थे। लेकिन जितनी आमदनी थी खर्चे उनके उससे ज्यादा थे.वे हमेशा पैसो के लिए परेशान रहते थे। उनकी आमदनी कम नही थी। लेकिन उनका खर्च शाही होने के कारण उनको पैसे जमा करने नही आते थे।
उन्हें मेरी कंजूसी करना पसंद नही आता था। वे मेरी कंजूसी का मजाक बनाते थे। उनके मजाक का सामना मै अपनी मुस्कुराहट से दे देती थी। जब वे अलग हुए उनकी यही दरियादिली मुझे सोचने पर मजबूर कर रही थी। उनको घर का किराया नही देना होता था। घर के नीचे उन्होंने दफ्तर बना रखा था। इसलिए उनके किराये की बचत हो जाती थी। उन्हें आने-जाने का खर्च नही देना पड़ता था। बड़ो के द्वारा दूसरे कई खर्चे बच जाते थे। लेकिन उन्होंने अपने अहंकार के सामने परोक्ष खर्चो के बारे में नही सोचा उनके बड़ो के द्वारा बेटी के ऊपर कुछ नियंत्रण बना रहता।
उस घर को छोड़ने से उन्हें धन की हानि के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी। इन दोनों परेशानियों ने और अपनों के आभाव में दोनों एक दूसरे पर दोषारोपण करने लगे। इसी कारण जो एक दूसरे के बिना रहने की कल्पना नही कर सकते थे। अब वे एक दूसरे के साथ खड़ा होने में अपनी तौहीन समझ रहे थे। कहते है पैसो का सुख और इंसानो का साथ सभी परेशानियों से निकाल देता है।
उन दोनों ने अपनी नासमझी से दोनों का साथ छोड़ दिया। उनका समाज से ज्यादा सरोकार नही रहा है। वे अपने मन के गुबार को निकालने का जरिया ढूंढने के आभाव में एक दूसरे पर गुस्सा उतारने के कारण दुनियाँ से बेजार हो गए है।
उन्होंने अपने पैसो को संभाल कर रखा होता और रिश्तो को आज भी सँभालने की कोशिश करे उनके जीवन में खुशियो के फूल महकने लगेंगे। उनके जीवन की कड़वाहट कुछ समय की है। यदि ये समय शांति से गुजारने की कोशिश करे ,थोड़ी तसल्ली रखे उनका आने वाला समय बहुत सुंदर हो सकता है। भगवान उन्हें सब्र से परेशानियों का सामना करने की हिम्मत दे। मै उनके लिए जितना कर सकती हूँ। उनका भला हर तरह से करने की कोशिश कर रही हूँ। मै उन्हें खोना नही चाहती हूँ।
उन्हें मेरी कंजूसी करना पसंद नही आता था। वे मेरी कंजूसी का मजाक बनाते थे। उनके मजाक का सामना मै अपनी मुस्कुराहट से दे देती थी। जब वे अलग हुए उनकी यही दरियादिली मुझे सोचने पर मजबूर कर रही थी। उनको घर का किराया नही देना होता था। घर के नीचे उन्होंने दफ्तर बना रखा था। इसलिए उनके किराये की बचत हो जाती थी। उन्हें आने-जाने का खर्च नही देना पड़ता था। बड़ो के द्वारा दूसरे कई खर्चे बच जाते थे। लेकिन उन्होंने अपने अहंकार के सामने परोक्ष खर्चो के बारे में नही सोचा उनके बड़ो के द्वारा बेटी के ऊपर कुछ नियंत्रण बना रहता।
उस घर को छोड़ने से उन्हें धन की हानि के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी। इन दोनों परेशानियों ने और अपनों के आभाव में दोनों एक दूसरे पर दोषारोपण करने लगे। इसी कारण जो एक दूसरे के बिना रहने की कल्पना नही कर सकते थे। अब वे एक दूसरे के साथ खड़ा होने में अपनी तौहीन समझ रहे थे। कहते है पैसो का सुख और इंसानो का साथ सभी परेशानियों से निकाल देता है।
उन दोनों ने अपनी नासमझी से दोनों का साथ छोड़ दिया। उनका समाज से ज्यादा सरोकार नही रहा है। वे अपने मन के गुबार को निकालने का जरिया ढूंढने के आभाव में एक दूसरे पर गुस्सा उतारने के कारण दुनियाँ से बेजार हो गए है।
उन्होंने अपने पैसो को संभाल कर रखा होता और रिश्तो को आज भी सँभालने की कोशिश करे उनके जीवन में खुशियो के फूल महकने लगेंगे। उनके जीवन की कड़वाहट कुछ समय की है। यदि ये समय शांति से गुजारने की कोशिश करे ,थोड़ी तसल्ली रखे उनका आने वाला समय बहुत सुंदर हो सकता है। भगवान उन्हें सब्र से परेशानियों का सामना करने की हिम्मत दे। मै उनके लिए जितना कर सकती हूँ। उनका भला हर तरह से करने की कोशिश कर रही हूँ। मै उन्हें खोना नही चाहती हूँ।
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