मीना गुस्से के कारण तिलमिला रही थी। उसे समझ नही आ रहा था। ऐसे में अपना गुस्सा किस पर उतारे। नीलेश रात 10 बजे घर लौटा। इतनी देर से वह जानबूझ कर घर आया था। उसने समझा अब तक सब सो गए होंगे। इतनी रात में चुपचाप अपने कमरे में सो जायेगा।
दरवाजा मीना ने खोला। वह इस समय गुस्से से आगबबूला हो रही थी। उसका चेहरा लाल हो रहा था। नीलेश का उसकी तरफ ज्यादा ध्यान नही था। वह सोच रहा था जैसे बड़ी बेटी के साथ के सम्बन्ध किसी को पता नही चले यह भी छिपा रहेगा।
कमरे में पहुँचते ही मीना ने उसपर प्रश्नो की बौछार शुरू कर दी। पहले तो नीलेश समझ नही पाया लेकिन कुछ समय बाद उसे अहसास हो गया उसका भांडा फुट गया है। लेकिन उसे इस समय अपने किये पर कोई शर्मिंदगी महसूस नही हो रही थी। उसने सारा दोष शिखा और हेमा पर मढ़ने की कोशिश की। मीना अब नीलेश के झांसे में आने वाली नही थी। उसका गुस्सा सीमाये तोड़ रहा था। नीलेश ने सारा दोष फिर मीना पर भी मढ़ने की कोशिश की। लेकिन मीना नीलेश को लानत भेजती रही। नीलेश ने फिर से ऐसा गलत काम करने से तौबा नही की।
उसने डंके की चोट पर कहा -मुझे ऐसा मौका मिलेगा तो वह फिर से यही सब करेगा।
मीना ने कहा -अब तक तुमने मुझे अंधकार में रखकर मेरी बेटियो का फायदा उठाया है। अब मै ऐसा हरगिज नही होने दूंगी।
नीलेश बोला -देखता हूँ। तू मुझे कैसे रोक पायेगी। अब ये सब तेरी मौजूदगी में करूँगा। देखता हूँ तू कैसे मुझे रोकती है।
मीना बोली -मै तुम्हारे किये की पुलिस में रिपोर्ट कराऊंगी।
नीलेश बोला - जरा सोच मेरे से ज्यादा तेरी बेटियो की बदनामी होगी। उनका घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जायेगा। बाहर लोगो में मेरे बारे में सब अच्छा सोचते है। तुझ पर कोई यकीन नही करेगा। आज तक दो -दो बेटियो के साथ किसी बाप ने ऐसा नही किया। तेरी बातो पर किसी को विश्वास नही होगा।
मीना बोली -तुम मुझे कितना भी कहो। अब मै अपनी मासूम बेटियो को इस तरह सिसकता नही देखूंगी।
नीलेश फिर बेशर्मी से बोला -यदि तुम मुझे पुलिस से पकड़वा दोगी तब तुम्हारे घर का खर्चा कैसे चलेगा। तुम्हारा कौन हमदर्द पैसा देने आएगा। मै ही पैसा देता हूँ इसी से ये गृहस्थी चलती है।
मीना बोली - सारी कमाई केवल तुम्हारी है मै और बच्चे बाहर से काम लाकर के पैसा कमाते है। वह तो तुम्हे दिखाई नही देता। बहुत सारी कमाई करते हो जिसका हमें घमंड दिखा रहे हो।
नीलेश बोला -मुझे पकड़वा देगी तो तेरा और तेरी बेटियो का बाहर निकलना मुश्किल हो जायेगा। उन्हें लगेगा इन लोगो में बचा ही क्या है। इस घर का अकेला मर्द हूँ मर्द के बिना सारे लोग तुम पर खूंखार जानवरो की तरह टूट पड़ेंगे। मुह छुपाने के लिए भी कोई कोना ढूंढे नही मिलेगा। ये सब तुम्हे अपनी हवस का शिकार बना लेंगे।
मीना उस समय बहुत गुस्से में थी। नीलेश की दलीले उसे रोक नही सकी। वह उसी समय घर से बाहर निकल गयी। उसे खुद पता नही था वह कहाँ जा रही है। वह विचारो में खोये हुए कब पुलिस स्टेशन पहुंच गयी। उसने fir पति के खिलाफ दर्ज करा दी।
वह पुलिस के साथ अपने घर आई। उसने दरवाजा खटखटाया। नीलेश ने दरवाजा खोला -पुलिस को देखकर नीलेश को झटका लगा। वह इत्मीनान से सोया पड़ा था। उसे बिलकुल उम्मीद नही थी। मीना पुलिस को बुला लाएगी।
उसी हालत में पुलिस नीलेश को पकड़कर थाने ले गयी।
दरवाजा मीना ने खोला। वह इस समय गुस्से से आगबबूला हो रही थी। उसका चेहरा लाल हो रहा था। नीलेश का उसकी तरफ ज्यादा ध्यान नही था। वह सोच रहा था जैसे बड़ी बेटी के साथ के सम्बन्ध किसी को पता नही चले यह भी छिपा रहेगा।
कमरे में पहुँचते ही मीना ने उसपर प्रश्नो की बौछार शुरू कर दी। पहले तो नीलेश समझ नही पाया लेकिन कुछ समय बाद उसे अहसास हो गया उसका भांडा फुट गया है। लेकिन उसे इस समय अपने किये पर कोई शर्मिंदगी महसूस नही हो रही थी। उसने सारा दोष शिखा और हेमा पर मढ़ने की कोशिश की। मीना अब नीलेश के झांसे में आने वाली नही थी। उसका गुस्सा सीमाये तोड़ रहा था। नीलेश ने सारा दोष फिर मीना पर भी मढ़ने की कोशिश की। लेकिन मीना नीलेश को लानत भेजती रही। नीलेश ने फिर से ऐसा गलत काम करने से तौबा नही की।
उसने डंके की चोट पर कहा -मुझे ऐसा मौका मिलेगा तो वह फिर से यही सब करेगा।
मीना ने कहा -अब तक तुमने मुझे अंधकार में रखकर मेरी बेटियो का फायदा उठाया है। अब मै ऐसा हरगिज नही होने दूंगी।
नीलेश बोला -देखता हूँ। तू मुझे कैसे रोक पायेगी। अब ये सब तेरी मौजूदगी में करूँगा। देखता हूँ तू कैसे मुझे रोकती है।
मीना बोली -मै तुम्हारे किये की पुलिस में रिपोर्ट कराऊंगी।
नीलेश बोला - जरा सोच मेरे से ज्यादा तेरी बेटियो की बदनामी होगी। उनका घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जायेगा। बाहर लोगो में मेरे बारे में सब अच्छा सोचते है। तुझ पर कोई यकीन नही करेगा। आज तक दो -दो बेटियो के साथ किसी बाप ने ऐसा नही किया। तेरी बातो पर किसी को विश्वास नही होगा।
मीना बोली -तुम मुझे कितना भी कहो। अब मै अपनी मासूम बेटियो को इस तरह सिसकता नही देखूंगी।
नीलेश फिर बेशर्मी से बोला -यदि तुम मुझे पुलिस से पकड़वा दोगी तब तुम्हारे घर का खर्चा कैसे चलेगा। तुम्हारा कौन हमदर्द पैसा देने आएगा। मै ही पैसा देता हूँ इसी से ये गृहस्थी चलती है।
मीना बोली - सारी कमाई केवल तुम्हारी है मै और बच्चे बाहर से काम लाकर के पैसा कमाते है। वह तो तुम्हे दिखाई नही देता। बहुत सारी कमाई करते हो जिसका हमें घमंड दिखा रहे हो।
नीलेश बोला -मुझे पकड़वा देगी तो तेरा और तेरी बेटियो का बाहर निकलना मुश्किल हो जायेगा। उन्हें लगेगा इन लोगो में बचा ही क्या है। इस घर का अकेला मर्द हूँ मर्द के बिना सारे लोग तुम पर खूंखार जानवरो की तरह टूट पड़ेंगे। मुह छुपाने के लिए भी कोई कोना ढूंढे नही मिलेगा। ये सब तुम्हे अपनी हवस का शिकार बना लेंगे।
मीना उस समय बहुत गुस्से में थी। नीलेश की दलीले उसे रोक नही सकी। वह उसी समय घर से बाहर निकल गयी। उसे खुद पता नही था वह कहाँ जा रही है। वह विचारो में खोये हुए कब पुलिस स्टेशन पहुंच गयी। उसने fir पति के खिलाफ दर्ज करा दी।
वह पुलिस के साथ अपने घर आई। उसने दरवाजा खटखटाया। नीलेश ने दरवाजा खोला -पुलिस को देखकर नीलेश को झटका लगा। वह इत्मीनान से सोया पड़ा था। उसे बिलकुल उम्मीद नही थी। मीना पुलिस को बुला लाएगी।
उसी हालत में पुलिस नीलेश को पकड़कर थाने ले गयी।
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