हर इंसान का स्वभाव अलग होता है कुछ लोग पहली बार मिलते ही दूसरों को अपनापन का अहसास दिला देते है उनसे मिलने वाले हमेशा सोचते है इनसे अच्छा इंसान अन्य नहीं हो सकता है । उनके दोस्त बहुत होते है ।
संसार मे अनेक तरह के लोग होते है उसमे एकाकी रहने वाले लोग भी होते है जो सामने वाले मे सभी नकारात्मक गुण देखते है उन्हे नहीं पता चलता सामने वाले के अच्छे गुणों का फायदा कैसे उठाया जा सकता है । वे लोग सभी का फायदा उठाने वालों को अवसर वादी कहते है । मेरे ख्याल से अवसरवादी बनने मे बुराई नहीं है ।
मेरे हिसाब मे सभी मे अच्छे और बुरे दोनों गुण होते है । वक्त के हिसाब से सामने वाले के अच्छे और बुरे गुण हमारे सामने आते है जब कोई हमारे लिए बुरा साबित हो रहा है इसका मतलब हमारा वक्त बुरा है जिसके कारण हम उसे समझ नहीं सके है ।
मेरे हिसाब से सफल लोग किसी मे दोष नहीं देखते है । वह दूसरों के दोषों को नकार देते है केवल गुणों का ध्यान रखते है । वह हर इंसान के गुणों के हिसाब से उनके बारे मे सोचते है । जिससे उनकी सफलता का % बड़ जाता है इस तरह के लोग सामने वाले के गुण देखने के कारण खुद भी खुश रहते है दूसरों को भी खुश रखने की कोशिश करते है ।
जो लोग जल्दी दूसरों से जुड़ नहीं पाते है वह हमेशा नाखुश रहते है जिसके कारण उनकी असफलता का % बड़ जाता है । वह दूसरों से बात करने से घबराते है उनकी घबराहट दूसरों से जुडने से रोकती है । जिसके कारण वे एकाकी रह जाते है । वह महफ़िल मे जाने से बचने की कोशिश करते है । उनके दोस्त कम होते है । वह दूसरों मे कमियाँ देखते रहते है । जिसके कारण उनके संबंधी भी दूरी बनाने लगते है । उनके शब्दों मे नकारात्मकता रहती है ।
वे अधिकतर अपने मन की बात नहीं कर पाते है उनके मन का गुबार नहीं निकल पाता है । वह मानसिक रोगी बन जाते है । जिसके कारण जल्दी बीमार पड जाते है । वे हमेशा खीझे और झल्लाए रहते है ।
आपने सुना होगा डर के आगे जीत है । जो इस डर से बाहर निकल आते है उनके सामने सफलता का खुला आसमान होता है । अधिकतर इंसान हर चीज से डरते है उसमे चीजे और रिश्ते खोने का डर सबसे बड़ा होता है । हम हर चीज को स्थाई रूप से पाना चाहते है जबकि संसार मे कोई चीज स्थाई नहीं होती है । जिस कारण उन्हे खोना पड़ता है ।
जब जीवन स्थाई नहीं है तो रिश्तों मे स्थायित्व देखने वाले लोगों को डर का सामना करना पड़ता है । हर रिश्ता रूप बदलता रहता है । जिससे सबसे ज्यादा प्यार करते है उनसे भी एक समय बाद अलग होना मजबूरी बन जाता है इस कारण किसी से हमेशा जुड़े रहने के बारे मे सोचने वाले गलत साबित होने है ।
जब हमारा व्यवहार बदलता रहता है तब दूसरों से क्यों एक जैसे व्यवहार की उम्मीद करे । हमे सतर्क रहना चाहिए । सतर्कता के साथ भावना का इस्तेमाल करने वाले सफलता हासिल करते है ।
पूरी तरह से जुडने वाले कभी खुश नहीं रहते है । जो जुदाई के बारे मे सोचकर जुडते है वह हमेशा खुश रहते है ।जीवन के शुरू मे अभिभावक और भाई बहन से जुड़ना ,उसके बाद दोस्तों के साथ समय बिताना ,विवाह की उम्र मे नए रिश्ते बनना फिर बच्चों का इंतजार और बड़े होने पर उनसे जुदाई जीवन का हिस्सा है ।
मेरे हिसाब से आजकल गलत परवरिश के कारण लोग सबसे डरे रहते है वह किसी पर विश्वास नहीं कर पाते है । जीवन इस तरह से नहीं चलता है । हम कितना भी चीजों और धन को पकड़ने की कोशिश करे एक समय बाद वह हमसे जुदा हो जाता है या हम उससे ऊब जाते है उससे दूर होने की कोशिश करते है । जैसे जब बच्चों की शादी नहीं होती है हम उनकी शादी को लेकर चिंतित रहते है । उनकी शादी के बाद भी उन रिश्तों को लेकर तल्खी बनी रहती है।
इंसान खुश रहना भूल गया है हम जिसके साथ रहते है उसमे केवल कमियाँ देखते है उसके गुणों को देखना नहीं चाहते है जिसके कारण जुडने से डर लगता है । आपने एक स्लोगन सुना होगा -"डर के आगे जीत है ।" मेरे ख्याल से आपको डर से बाहर निकल कर लोगों को स्वीकारना पड़ेगा । उससे जीवन मे खुशी आएगी ।
जिंदगी मे सबसे अधिक खुशी मायने रखती है खोने के अहसास से बड़कर खुशी का महत्व है । जब जीवन मे हर चीज छोड़नी है तब डर कर क्यों जिया जाए । जो इंसान किसी को अपने हाथ से देता है वह अधिक खुश रहता है जिनके अंदर सिर्फ पाने का अहसास होता है उससे खुशियां दुर रहती है ।
हमारी संस्कृति "त्यकतें भूँजिठा " की रही है जिसका मतलब त्याग के साथ भोग करो । अधिक की इच्छा रखने वाले कभी सुखी नहीं रह पाते है । जो चीजे छोड़ने की हिम्मत रखते है वही खुलकर जी पाते है ।
जो दुखी होने से डर कर संबंध नहीं बनाते है उन्हे मजबूत नहीं कहा जा सकता है । मजबूत उसे कहेंगे जो हर हालत मे जीते है जिन्हे बदलाव से डर नहीं लगता है उन्हे मजबूत कहेंगे । जब दुखी होने से डरेंगे तो जियेंगे कैसे। इंसान फिर जंगल मे ही सुखी रहेंगे। संसार मे रहते हुई जुड़ना पड़ेगा । बिना जुड़े एकाकी जीवन दुखी होने से कैसे बड़िया हो सकता है।
इंसान समाजिक प्राणी है इसलीये जुडने मे सुख है दुखी होने से बचने के लिए एकाकी रहने वाले भी सुखी नहीं हो पाते है । उनका समाजिक लोगों की अपेक्षा जीवन अवधि कम होती है वे अनेक शरीरिक और मानसिक बीमारियों से ग्रस्त होकर जल्दी दुनियाँ से चले जाते है । जीवन मे मजबूत बनने के लिए दुखों के बीच रहते हुए खुश रहने वाले लंबा जीवन जीते है ।
मेरे हिसाब से दुखों का सामना करने मे बुराई नहीं है । आप संसार मे कोई इंसान ऐसा नहीं देख सकते जिसने दुख नहीं पाया है जीवन मे दुख को स्वीकारने वाले ही सही मायने मे मजबूत कहे जाएंगे । इसलीये बच्चों को हमेशा दुखों के साथ रहना सीखना चाहिए जिससे वे पूरा जीवन खुशी से खुलकर जिए ।
लोगों पर सतर्कता पूर्वक भरोसा रखने की कोशिश करे । दूसरों से अधिक खुद पर विश्वास करे । किसी पर अंधविश्वास न करे । जीवन मे हर पहलू का आनंद लेने वाले ही सुखद जीवन जीते है ।
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