कुछ ज्यादा ही डर लगने लगे तो क्या करना चाहिए?
Madhurima Pathak की प्रोफाइल फ़ोटो

डरना बड़ी बात नहीं है संसार के सभी प्राणी काम के आरंभ मे डरते है । इससे जीवन बचता है । इंसान अनुभव के बाद डर पर काबू करना सीखता है । आप बच्चे के उदाहरण से सीख सकते है वह आरंभ मे माँ को किसी हालत मे छोड़ना नहीं चाहता इसका कारण उसका असुरक्षित महसूस करना है जब एक बार उससे दूर रहना पड़ता है उसके लिए वह तैयार हो जाता है ।

आरंभ मे सभी को सभी कामों से डर लगता है । इंसान सबसे अधिक अपने शरीर की सुरक्षा करना चाहता है। सुरक्षित रहने की इच्छा उसे डरना सिखाती है । डर के समय शरीर से निकलने वाले हार्मोन्स उन्हे काम करने के लिए प्रेरित करते है । साधारण लोग असाधारण लोगों की अपेक्षा अधिक सुरक्षित रहते है वे बिना सुरक्षा उपाय के घर से बाहर निकलते है बड़े लोगों को अनेक तरह से सुरक्षित रहने के उपाय करने पडते है उनके साथ सुरक्षाकर्मी तैनात होते है ।

यदि साधारण इंसान को मौत का भय होगा तो वह घर से बाहर निकलना भी पसंद नहीं करेगा । लेकिन बड़े लोग मौत के बीच में रहते हुए सभी काम करते हैं। वह मौत को अवश्यंभावी समझते हैं, इसलिए वह मौत की परवाह करना छोड़ देते हैं। वह सिर्फ काम के बारे मे सोचते है ।

एक बार मे जोन एफ केनेडी की आत्मकथा पड़ रही थी वह दूसरे विश्व युद्ध के समय अपनी कमान के साथ जापानी द्वीप पर उतरे । उनकी सारी टीम घायल थी वह घायल होने के बाबजुद उनसे कुछ अच्छी स्थिति मे थे इसलिए उनकी सुरक्षा के इंतजाम के लिए बाहर निकले वह इतने घायल थे कि चलते -चलते बेहोश हो जाते फिर होश मे आने के बाद आगे बड़ते उन्हे पता नहीं चलता था वे बेहोशी की अवस्था मे कितनी देर रहे । अपनी टीम को जीवित रखने के लिए वह अपने घायल होने के बारे में अधिक नहीं सोच सके । इस स्थिति के बावजूद वह खुद को और अपनी टीम को सुरक्षित वहाँ से निकालने में सफल रहे ।

राष्ट्रपति बनने के बाद वह विशेष रूप से सुरक्षित किए गए थे उस समय उन्हे गोली मार दी गई। इसे जीवन की विडंबना ही कह सकते हैं।इसलिए जो होना है वह होकर रहेगा इसलिए डर के बाबजुद उसे रोकना कठिन है इसलिए केवल काम के बारे मे सोचे जितना काम करना नसीब मे है आप उतना काम करोगे । उससे एक भी काम अधिक करना मुश्किल है । इसलिए डरने से फायदा नहीं होता है ।

जितने सफल लोग हैं, वे हमसे अधिक डरते हैं, लेकिन वे हमेशा सोचते हैं कि डरकर दुबके रहने से कुछ नहीं होगा । वे निर्भय होकर डर का सामना करो । वह हमेशा जीवन में प्लान बी बनाकर रखते हैं। एक बार गलती होने पर रुकते नहीं है । उनके हिसाब से डर के आगे जीत है ।

जब सुरक्षित माहौल मे हम पहली बार किसी काम को करते है उस समय मन काम नहीं करना चाहता है हम किसी कौने मे छिप जाना चाहते है जिससे काम न करना पड़े लेकिन दूसरी बार उसी स्थिति का आसानी से सामना कर लेते है । हर काम पहली बार करने के लिए कोई तैयार नहीं होता है जब डर निकल जाता है तब हालत का सामना करना आसान हो जाता है ।

इसलिए जीवन मे हर स्थिति का अभ्यास करते रहना जरूरी है। आप कितनी भी सावधानी से काम करें, उसके बावजूद गलतियाँ होती हैं, इसलिए उनसे डरना नहीं चाहिए । जो काम करते है वह गलतियों के लिए तैयार रहते है वह खुद को सर्वश्रेष्ठ नहीं समझते इसलिए गलतियाँ करने से नहीं डरते है । वह कहते हैं—'काम करेंगे तो गलतियाँ होंगी । जो काम नहीं करते, वही गलतियों से बचते हैं।

वह एक बार गलती करके दोबारा वही गलती नहीं करते, इसलिए असाधारण बनते हैं। उनकी सोच सकारात्मक होती है उन्हे विश्वास होता है वह हालत को बदल सकते है । वह हमेशा सकारात्मक लोगों के साथ रहता है । इसलिए हमेशा जोश से भरे रहते हैं।

वे व्यवहारिक होकर काम करते हैं, उन्हें काम जीवन का हिस्सा लगता है । वह छोटे-छोटे काम करने के बाद बड़े काम में हाथ डालते हैं। मैंने एक औरत ऐसी देखी जो टॉइलेट भी अकेले नहीं जा सकती थी, वहाँ के लिए उसे साथी चाहिए होता था । आप उससे तो बहादुर हो इसलिए केवल अपनी बहादुरी का विचार करे । जिनसे डर लगता है उनके बारे मे न सोचे ।

जब मुझे कही जाने के लिए कहा जाता है सबसे पहले मन वहाँ जाने से इनकार करता है उसके बाद मन पक्का करके जब वहाँ जाती हूँ उसमे रम जाती हूँ । उस वक्त केवल उस माहौल में समाकर खुशी महसूस करती हूँ । इस कारण लोग मेरा साथ पसंद करते हैं। मैं वर्तमान में जीना पसंद करती हूँ । जो माहौल मिला है, उसके हर पल को महसूस करके खुश रहती हूँ ।

आपने जितने काम सफलतापूर्वक किए हैं, हमेशा दिमाग में उन बातों को रखें; नकारात्मक बातें आपको डराएँगी। जीवन मे सभी को बुरे अनुभव होते है उनसे निकलने वाले ही आगे बडते है ।

जब अधिक डर लगे तो घूंट -घूंट करके पानी पिए उस समय लगता है दिमाग से निकल कर डर पेट मे जा रहा है हम सामान्य होने लगते है । उस स्थिति में लंबी गहरी साँसे लेने से डर कम होता है । जीवन में हर उलझन को सुलझाने की कोशिश करें। सिर्फ उन कामों के बारे मे सोचे जिनसे आप सफलता पूर्वक सुलझा सके है । जिनमे नकामी मिली है उनपर विचार न करे । नाकामी को जीवन का हिस्सा समझकर भुला दे ।

जिस इष्टदेव को आप मानते हैं, डर के समय उसे याद करने से घबराहट दूर हो जाती है । हमे लगता है वह हमे बचाने आ गए है ।

डरना स्वाभाविक है, इसलिए उसके कारण काम करना न रोके । सभी डरते हुए काम करते हैं, उसके बाद सफलता मिलने पर उसमें मज़ा आने लगता है । हमेशा सोचें, डर के आगे जीत है । आपको जीवन में जीतना है, इसलिए डर के साथ जीना सीखें।

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