इंसान डरता क्यों है ? यहाँ तक कि कभी - कभी सच भी नहीं बोल पाता।
Madhurima Pathak की प्रोफाइल फ़ोटो

अधिकतर इंसान के अंदर डर समाया रहता है । मै डर के भाव को गलत नहीं कहती क्योंकि इससे इंसान सावधान होकर काम करता है अपने को सुरक्षित रखने के उपाय करता है । आग से डरने का भय नहीं होता तो अधिकतर लोग खुद को जला लेते ।

पहले मानव जंगल मे निवास करता था जिसके कारण बचाव के लिए सावधानी जरूरी थी । यदि वह उनसे नहीं डरता तो अपने बचाव के उपाय न करके जल्दी खत्म हो जाता । जीवन मे विकास डर की भावना के कारण संभव हुए है हथियारों का निर्माण भी सुरक्षा के कारण हुए है ।

इंसान भविष्य के अज्ञात भय से डरता है । वह बदलाव पसंद नहीं करता है । वह जैसे माहौल मे रहता है वैसा जीवन हमेशा चाहता है । जैसे ही अच्छा या बुरा बदलाव आता है वह घबरा जाता है उस माहौल के हिसाब से बदलने मे समय लगता है । सभी के जीवन मे बदलाव आते है यह अवश्यंभावी है । आरंभ मे यह बदलाव सभी को दुखदायी लगता है ।

इंसान आरामदायक जिंदगी जीना पसंद करता है जिसके कारण परिवर्तन से बचने के हर उपाय करता है जैसे जब मेरी नौकरी लगी तब घर संभालना कठिन हो गया । घर से दूरी मुश्किल थी बच्चे की जिम्मेदारी परेशानी पैदा करने लगी । जबकि नौकरी करने की कोशिश बरसों से कर रही थी । नौकरी का अहसास सुखद था लेकिन उसके कारण उत्पन्न परेशानी डर पैदा कर रही थी ।सभी परेशानियों से डरते है ।

मन से कमजोर लोग बोलते हुए डरते है । वह सही बात भी नहीं कह पाते है । उन्हे हमेशा दूसरों से डर लगता है सामने वाला उसकी बात का बुरा मानकर अनिष्ट कर सकता है। यहाँ तक अंधेरे से डरते है । उनका डरना हमेशा गलत साबित होता है ।

डरा हुआ इंसान जोखिम नहीं लेता है । वह दूसरों के इशारे पर, बंधे बँधाये काम, एक तरह से करना पसंद करता है वह परेशानी का सामना नहीं करना चाहता है । उसके जीवन की अधिकतर परेशानियाँ दूसरे दूर करते है । वह भीड़ का हिस्सा बनते है । इस तरह के इंसान नेतृत्व नहीं कर पाते है । भीड़ मे उनका डर खत्म हो जाता है क्योंकि उसे पहचाने जाने का खतरा नहीं होता है । अधिकतर इंसान इस श्रेणी मे आते है ।

इंसान समाज से डरने के कारण अनेक अनचाहे काम करता है । समाज का भय उसे सही रास्ते पर चलने के लिए मजबूर करता है । समाज मे इज्जत पाने के लिए दिनरात मेहनत करता है । समाज मे रिश्ते बनाने की जद्दोजहद मे लगा रहता है । उसके लिए आराम से समझोंता करके दूसरों को सुख देने की कोशिश मे लगा रहता है । वह रिश्तों को खोना पसंद नहीं करता है । वह बुरे काम करने से भी डर के कारण रुकता है ।

अतीत के दुख भी डराते है बुरे अतीत के कारण भी वह भयभीत रहता है । इसके कारण वह भरोसा करने से डरता है हर इंसान को पहले संदिग्ध निगाहों से देखता है । ताकि कोई उसे हानि न पँहुचा सके ।

जीवन मे सोचा हुआ बहुत कम लोगों का पूरा होता है जिसके कारण वह भविष्य से डरते है जीवन मे काम करना हमारे हाथ मे होता है उसके परिणाम किस रूप मे मिले उससे बेचेन रहता है । कोई भी भविष्य मे बुरा नहीं चाहता है । सभी सुखद की तलाश मे रहते है । वह रिश्ते या कर्मों के बुरे फल से हमेशा डरते रहते है । कुछ इस डर से काम करने से बचते है जबकि कुछ डर के आगे जीत की भावना से काम करने के लिए तैयार रहते है ।

डर अलार्म का काम करता है डर के कारण शरीर मे बहादुरी पैदा करने वाले हार्मोन्स निकलते है जिससे इंसान सतर्क होकर जोश के साथ काम करता है जिससे हानि कम उठाकर सुरक्षित रहे । इंसान के अंदर जिस तरह भूख प्यास मूल आवश्यकता है उसी प्रकार डरना भी जन्मजात होता है । इसी के कारण इंसान अपनी रक्षा कर पाता है । यह प्राकृतिक है थोड़ा डर जरूरी है । इससे सुरक्षा मिलती है । हर समय डरते रहना गलत है ।

डर के कारण इंसान जीवन को सुविधाजनक बनाने की कोशिश करता है । डर के कारण तरक्की हो रही है । अति हर चीज की बुरी होती है उसी प्रकार अधिक डरना गलत है लेकिन थोड़ा डर जरूरी है । डर के कारण इंसान मेहनत करके अपना निर्माण करने और अनुशासन मे रहता है वरना सभी अराजक बनकर समाज का विनाश करते । कानून के डर से इंसान बुरे काम करने से रुकता है ,अनुशासन मे रहने की कोशिश करता है ।

भविष्य की असफलता के डर से सावधानी के सभी उपाय अपनाता है । कोई भी इंसान असफल रहकर सम्मान नहीं खोना चाहता है इसलीये जीवन मे लापरवाही नहीं बरतता है । जीवन मे सफलता के लिए डर होना जरूरी है ।

जीवन मे अनेक तरह के लोग है उनके भय भी अलग है इनके कारण उनके जीवन का निर्माण होता है । जीवन की विविधता का कारण भी भय है । वरना जीवन बेरंग हो जाएगा । जो डर से बाहर निकल जाते है वह नेतृत्व करते है बाकि लोग साधारण जिंदगी जीते है ।

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