आधुनिक समय मे मुसकुराना जीवन की जरूरत बन गया है । लोग गमगीन रहकर दूसरों से मिलेंगे तो लोग उनसे मिलना पसंद नहीं करते है । उन्हे सुखद क्षण जीवन मे पसंद होते है । उसे पाने के लिए वह हर कोशिश करते है । जीवन के सारे तामझाम जीवन मे खुशी के लिए किए जाते है ।
आप जिसे जीवन मे दर्द समझ रहे है वह जीवन मे न रहे तो जीवन अधिक दुखद हो जाता है । जो दुख जरूरी होते है उन्हे कबूलने मे बुराई नहीं है। अधिकतर लोग परिवार की जरूरतों को पूरी करते समय दुखी हो जाते है उस समय विचार आता है न परिवार होता न इतनी परेशानियों का सामना करना पड़ता । कोई संबंध स्थाई नहीं होता है मृत्यु या दूरी के कारण जब उनसे परिवार छूट जाता है तब वे और अधिक दुखी हो जाते है ।
पहले इंसान को हर हालत मे सुखी रहना सिखाया जाता था उन्हे समझाया जाता था जो तुम्हारे पास है उसे श्रेष्ठ समझो इसलीये बुरा लगने के बाबजुद रिश्तों को निभाने की कोशिश की जाती थी । उस समय रिश्ते स्थाई होते थे जिसके कारण लोग न चाहते हुए भी रिश्तों को तोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे ।
आजकल किसी रिश्ते मे गरिमा नहीं देख सकते । इंसान हर रिश्ते से दूर रहना चाहता है यदि वह उन रिश्तों मे रहता है तब जीभरकर उनकी बुराई करने से पीछे नहीं रहता है । इनसे बचने के लिए घर देर से जाना पसंद करते है । वह भूल जाता है यदि वह परिवार से दूरी बनाएगा एक समय बाद परिवार भी उसके बिना जीना सीख जाएगा । उस समय वह अधिक दुखी होगा । दूसरों को नकारना सुखद लगता है लेकिन जब दूसरे नकारते है उसे सहना कठिन होता है । इसलीये अपना महत्व बनाए रखने के लिए दूसरों को महत्व देने वाले सुखी रहते है । आजकल लोग दूसरों को महत्व नहीं देते है यदि दुसरो को महत्व दोगे तभी तुम्हें महत्व मिलेगा ।
हम जीवन मे स्वीकारना भूल गए है हमे अपने से ज्यादा दूसरों की चीजे और लोग अच्छे लगते है ।जिन्हे पाना मुश्किल होता है वह अधिक अच्छा लगता है । जो पास होता है उससे इंसान दूर जाना चाहता है यह दूरी इंसान को खुश रहने नहीं देती है । जिसे पाना चाहते है वह हमारे पास नहीं आ सकता जिससे दूरी चाहते है उसे दूर करना कठिन हो रहा होता है जिसके कारण दुख कभी खत्म नहीं होते है।
जिन चीजों से दूर होना चाहते है उन्हे दूर करना कठिन होता है उन्हे दूर करने मे ज्यादा कठिनाई का सामना करना पड जाता है साथी गलत मिलने पर उससे तलाक लेने मे इंसान की अधिकतर उम्र गुजर जाती है । जिस इंसान से नजदीकी दुखद लग रही होती है । उससे छूटने मे बरसों का समय और मानसिक शांति खत्म हो जाती है । उसके बाद जीवन के मायने नहीं रहते है ।
हम फिल्मों के समान जीवन को आसान समझते है जीवन मे हम जैसा सोचते है वैसा कभी नहीं होता है । जिस तरह का जीवन मिलता है उसे स्वीकारना कठिन होता है । इसलीये जीवन मे हमेशा परेशानी रहती है।
आपने बच्चों के लिए लोगों को परेशान देखा होगा । उसी प्रकार जिनके बच्चे नहीं होते है वे बच्चे के न होने के गम से कभी निकल नहीं पाते है इसके लिए सारी दुनियाँ को दोष देते मिल जाएंगे । उनके जीवन मे बच्चों के कारण रंग आते उनकी जिंदगी उनके अभाव मे बेरंग हो गई है ।
जीवन मे दुख देने वाले 1% लोग होते है 99% दुख हम खुद अपने जीवन मे लाते है क्योंकि जो हमारे पास होता है उसे कबूलना कठिन हो रहा होता है ।
हम अधिकतर उन लोगों की बेकार बातों को याद कर रहे होते है जो दूसरे कहकर भूल गए होते है उनके लिए उन शब्दों का महत्व नहीं रहता है लेकिन एक बार कहे उन शब्दों को हम लाखों बार सोचते और दोहराते रहते है । जिससे जिंदगी दुखदायी बन जाती है । यह दुख हमारा खुद का पाला होता है । इन सब से इंसान की मानसिक स्थिति खराब हो जाती है उसकी शांति खत्म हो जाती है इंसान अनेक बीमारियों का शिकार हो जाता है । फिर बीमारियो से परेशान रहते है ।
मै पहले फालतू की बातों को मन से लगा कर दुखी रहती थी जिसके कारण मानसिक शांति खत्म हो गई थी । लाइलाज बीमारियों ने घेर लिया था । जिसका दर्द सहना कठिन हो रहा था । मै मरने की दुआ मांगने लगी थी । उस समय दूसरों की सलाह से मैंने बुरई बाते सोचना छोड़ा । कुछ दिन बाद डॉ की दवाई का असर होने लगा मै फिर से स्वस्थ होने लगी । इसलीये मन से दुख लगाने वालों का दुख बड़ता जाता है लापरवाह और खुशमिजाज लोग अच्छा जीवन जीते है ।
जब हम बिना बात के मुसकुराते है तब एक समय बाद अनजाने मे सच्ची हंसी आने लगती है । हम दुख को भूल जाते है । यह मेरा खुद का अनुभव रहा है । मे खुशमिजाज और दुखी दोनों तरह के लोगों के साथ रह चुकी हूँ । बातबेबात पर हँसने वालों के साथ रहने पर हम जैसे लोगों को भी हंसी आने लगती है । मे इस तरह के लोगों के साथ रहना पसंद करती हूँ बनिस्बत उन लोगों के जो हर इंसान और काम मे कमियाँ निकालते है ।कमियाँ निकालने वालों के साथ रहने के कारण हम भी लोगों के गुणों की जगह दोष देखने लगते है । दोष देखने मे मजा आने लगता है ।
हम अधिकतर दूसरों से तुलना करते है उसके कारण खुद को कमतर महसूस करके दुखी होते है यदि उनके अंदर घुसने का मौका मिले तो आपको कोई इंसान सुखी नहीं मिलेगा । जिनके कारण हम दुखी हो रहे होते है ।
सुख और दुख हमारे मानने से होता है । जो इंसान हर हालत मे खुश रह सकता है वही सुखी है वरना दुखी तो हर जगह मिल जाएंगे । उनके दुखद घाव बिखरने मे देर नहीं लगती है ।
हिन्दू धर्म के अनुसार 84 लाख योनियों के बाद इंसान का शरीर मिलता है इसका मतलब हमारा जीवन बहुमूल्य है इसे दुखों मे बिताना गलत है । जीवन के हर रूप और क्षण मे मुस्कुराने से अनजाने मे हमारे जीवन मे खुशियां आती है । आपको समाज स्वीकारने लगता है । जब भी मौका मिले खुल कर हंसने और मुस्कुराने मे बुराई नहीं है इस तरह के लोगों को पसंद करते है ।
लेखकों के शब्दों मे जाने की जगह अपनी खुशी ढूंढिए और जिंदादिल बने । संसार मे आकर सभी को सभी खुशी नहीं मिल सकती जो मिल गई है उसे महसूस करके खुश हो जाए । मुस्कुराने वाले लोग अनजाने मे खुशियों को दावत दे रहे होते है ।
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