सच्चा प्यार 

आजकल प्यार को अनेक रूप मे विभाजित किया जा रहा है इसकी परिभाषा बनाई जा रही है । प्यार भावना है जो हर इंसान करना चाहता है प्यार से इंसान खुद को पूर्ण समझने लगता है वह खुद से ज्यादा दूसरे के दुख दर्द मे शामिल होना चाहता है उसके लिए अपने सुख से ज्यादा महत्व साथी के दुख का होता है जिसे वह दूर करने की हर संभव कोशिश करता है ।

प्यार मे इंसान काम करना सीखता है । वह जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हो जाता है वह थका होने के बाबजुद दूसरे की खुशी के लिए उठ खड़ा होता है उसके अंदर कभी अपना सुख मायने नहीं रखता है । भारत मे प्यार को शब्दों मे बताने का रिवाज नहीं है लेकिन खुद से ज्यादा दूसरों के बारे मे सोचकर बेचेन होना प्यार है जहां संभव होता है हर मुमकिन काम करता है । अपनी जान पर खेलने के लिए भी तैयार हो जाता है । बीमार होने की स्थिति मे काम को करना प्यार का रूप है ।

जिसे आप 10 मिनट का सच्चा प्यार कह रहे है । उसमे इंसान खुद को भूल जाता है ।प्यार मे इंसान सही तरह से सोचना भी भूल जाता है । उसे अच्छे बुरे का अहसास खत्म हो जाता है । उसके अंदर इस तरह के हार्मोन्स निकलते है जो अच्छा महसूस कराते है । जिसे महसूस करने के लिए इंसान बहुत कुछ खर्च करने और देने के लिए तैयार हो जाता है ।

उसे पाने के लिए जान की बाजी लगाते देखे जा सकते है । उसे देखने के लिए लंबी दूरी तय करने के लिए भी तैयार हो जाते है । प्यार को शब्दों मे बांधना कठिन है इसे महसूस किया जा सकता है । प्यार करने वाले लगातार साथी को देखते रहते है । उसके हर इशारे को समझ कर पूरा करने की कोशिश करते है ।

प्यार के लिए जिम्मेदारी सारी उम्र वहन करने के लिए तैयार हो जाते है । उन्हे खुशी से स्वीकार करते है । वह हर समय साथ निभाने की कोशिश करते है । उनके लिए अच्छा या बुरा समय मायने नहीं रखता है । उसकी शारीरिक कमजोरी भी उसका मन डिगा नहीं पाती है कोई भ्रमजाल हमेशा बना रहता है ।

आज के मापदंड पर लैला -मजनू की सुंदरता का महत्व नहीं है उस समय मे उन्हे उनसे अधिक सुंदर साथी मिल सकता था लेकिन उन्हे उस सुंदरता की जरूरत महसूस नहीं हुई । वह दोनों एक दूसरे के अलावा किसी अन्य की चाहत नहीं रखते थे । जब मिलने की आशा खत्म हो गई तो उन्होंने जीवन भी खत्म कर लिया ।

इस तरह का प्यार अहसास दिलाता है इंसान प्यार मे बलिदान कर सकता है । उसके लिए अपना अस्तित्व के मायने खत्म हो जाते है । कुछ दूसरों के लिए सब कुछ खोने के लिए तैयार हो जाते है ।

जिस प्यार की आजकल दुहाई दे रहे है वह आकर्षण है जिसका रूप बदलता रहता है । यह प्यार जिम्मेदारी नहीं लेना चाहता है । वह सुख पाना चाहता है । जीवन मे सुखी इंसान की कल्पना पाने वाले से करना चाहोगे तो वह कुछ समय के लिए सुखी होता है । जितना सुख पाने मे महसूस किया जाता है वह सुख धीरे -धीरे कम होता जाता है । एक समय बाद बिल्कुल खत्म हो सकता है । आजकल इस तरह का प्यार मिलता है जिससे जल्दी मोहभंग हो जाता है । इस कारण इंसान एक से अधिक प्यार करने लगा है । इंसान पाने के लिए प्यार करता है जहां मिलना मुश्किल होता है वहाँ प्यार नहीं रहता है दूरी पनपने लगती है ।

जो प्यार 10 मिनट मे पनपता है वह 10 साल मे खत्म हो जाए तो बड़ी बात न होगी । आजकल का प्यार स्थाई नहीं होता है । उसे आकर्षण कहना सही होगा । आजकल प्यार मे त्याग करने वाले लोग कम मिलेंगे सभी प्यार पाकर पूर्णता चाहते है । जहां अधूरापन महसूस होता है वहाँ प्यार खत्म हो जाता है ।

भारत मे अनेक उदाहरण ऐसे मिल जाएंगे जिसमे इंसान बिना शादी किए भी सारी उम्र उसके सपने को पूरा करने मे जीवन लगा देते है इस तरह के लोग कम होते है लेकिन मिलते अवश्य है । इंसान बिना शादी किए भी उसके मरने के बाद उसके सपने को पूरा करने के उद्देश्य को लेकर चलते है । उसमे खुद को पूर्ण समझने लगते है ।

सच्चा प्यार साथी को देना चाहता है जब मांगने की इच्छा जुड़ जाती है उसे आकर्षण कहा जाता है आजकल प्यार को आकर्षण कहना सही होगा । क्योंकि यह अधूरा मिलने पर खत्म करते देर नहीं लगाते है । उनके अंदर तू नहीं तो और सही का भाव रहता है । त्याग करने से अधिक पाने की इच्छा सच्चे प्यार मे नहीं होती है।

आजकल इस तरह के प्यार को प्लेटोनिक प्यार कहा जाता है । जहां इंसान दूसरे के सुख की खातिर जीता है । आज भी भारतीय परिवेश मे इस तरह का प्यार अधिक मिलता है क्योंकि इसमे शारीरिक रूप से प्राप्त करने की इच्छा नहीं होती है । आज भी अधिकतर भारतीय शारीरिक संबंध एक से बनाते है लेकिन प्यार वह अनेक से करते दिखाई दे जाएंगे जिसके लिए अपना सुख दुख भी भुला देते है ।

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