इसे मानवीय स्वभाव कहा जा सकता है । इंसान उसके बारे में अधिक सोचता है जो उसके पास नहीं होता है, जो उसके पास होता है उससे बेज़ार हो जाता है। जैसे जब गिलास मे पानी दिया जाता है उसे देखकर विचार आता है इसमे कितना पानी है । उसे देखकर लगता है कि इससे हमारी क्प्याया स बुझ सकेगी । इसमें कम पानी क्यों है? हमें ज्यादा पानी मिलना चाहिए था । उसे पीने के बाद हमारी प्यास बुझ जाती है फिर भी हम कम पानी के बारे मे अधिक सोचते है ।
ग्लास आधा भरा होने पर सबसे पहले कम पानी का विचार आता है। भरे पानी को देखकर खुश नहीं हो पाते हैं। इंसानी मानसिकता हमें खुश नहीं होने देती है । उसी प्रकार जिनके साथ हम रहते है उनकी अधिकतर कमियों का आकलन करते है उसकी अच्छाई के बारे मे सोच नहीं पाते है ।
यदि बुराई को नकारने लगे, तब हर समय हर जगह खुशी का अहसास होगा । जिनके साथ रहते हैं, उनमें केवल कमियाँ देखते हैं। उनकी कमियों के कारण उनसे दूर होना चाहते है जो दूर होते है उन्हे पाने की तड़प हमे परेशान करती रहती है । जो पास होते है भारतीय समाज मे उनसे दूर होना कठिन होता है जो दूर होते है उनके पास मुश्किल से जा सकते है ।
जीवन अनिश्चित है । हमेशा अनिश्चितता हमें दुख देती रहती है। जो हमारे पास है उससे दूरी पसंद नहीं आती है । जो समय के बाद होता है । जैसे अभीभवकों से अलग होना , शादी के बाद साथी को अपनाना, फिर बच्चे , कुछ समय बाद बच्चों से दूरी यह सबके जीवन मे होता है । सब कुछ एक समय बाद दुख का कारण बन जाता है जीवन मे कुछ भी स्थाई नहीं होता है अस्थायित्व को स्वीकारना कठिन होता है । लोग आधे जीवन इस दुख के साथ बीता देते हैं। उनके लिए मिलने से ज्यादा जुदाई का गम दुखदाई होता है ।
असंभव की तलाश में इंसान खुद को दुखी करता है । ईश्वर ने जो हमारे लिए उचित होता है, वही देता है, लेकिन उससे कोई इंसान सुखी नहीं होता है । जिस चीज की कामना में हम तड़पते रहते हैं, दूसरा इंसान जिसने वह सब पा लिया है, वह उससे सुखी नहीं होता है । वह उस अच्छी चीज से दूर होने की कोशिश करता रहता है । जो संभव नहीं हो पाता है ।
गरीब अमीर को सुखी समझता है जबकि अमीर को गरीबी मे रहने वाले मानसिक रूप से सुखी लगते है । अमीर हमेशा दूसरों को शक की निगाह से देखने के कारण मानसिक रूप से दुखी रहता है । अमीर को भौतिक सुखों से असंतुष्टि होने लगती है । उसे वह सुख महत्वपूर्ण नहीं लगते है अमीर इंसान को इच्छा करते ही सभी जरूरत पूरी हो जाती है । एक समय बाद उसे उनसे ऊब होने लगती है ।
बिना मेहनत के इच्छा पूर्ण होने के कारण वह उनका महत्व नहीं समझते है । उन्हे दिलाने वाले की मेहनत की तारीफ नहीं करते है । अधिकतर अमीरों के बच्चे सुविधायुक्त जीवन जीने के कारण मोटे हो जाते है । यह मोटापा बहुत सारी बीमारियों को बुलाता है । जिसके कारण जीवन जीना कठिन हो जाता है, इतनी तकलीफों के कारण वह मौत मांगते दिखाई दे जाएंगे । जब उनकी बीमारियों को लाइलाज साबित कर दिया जाता है । तब उन्हें पैसे से नफरत होती है ।
उनके लिए मोटापा कम करना कठिन होता है मोटापे को कम करने के लिए जितनी मेहनत की जरूरत होती है । उतनी मेहनत करके शरीर मे बहुत दर्द होता है इसलीये अधिकतर मोटे लोग मेहनत नहीं कर पाते है जबकि मोटापे से वे खुद भी दुखी होते है अधिकतर मोटे लोगों का आत्मविश्वास कम होता है दूसरों को स्वस्थ देखकर उनसे तुलना करने के कारण वह खुद को कम समझ कर परेशान होते है।
इंसान का सबसे बड़ा दुख बिना संघर्ष के पाने की इच्छा है । यह किसी को नसीब नहीं होता है । जब मेहनत दूसरों के हिसाब से करनी पड़ती है, तब वह दुख में डूब जाता है । वह भूल जाता है संघर्ष के बाद मिली सफलता अनमोल और स्थायी होती है ।
हम खुशियां दूसरों मे ढूंढते है हम भूल जाते है खुशियां हमारे अंदर होती है बाहरी लोग जब खुद दुखी जीवन जी रहे है तो वह हमे सुख कैसे दे सकते है । वह हमारे पास खुशी की तलाश मे आते है ।
इंसान वर्तमान मे जीने की अपेक्षा अधिकतर भूतकाल और भविष्य मे जीता है वह भूल जाता है हम जो काम कर सकते है वह केवल वर्तमान मे करते है जिससे भविष्य का निर्माण होता है । भविष्य मे सुख के सपने देखते हुए वर्तमान को दुख मे गुजार देता है , जबकि सुख केवल वर्तमान मे पाया जा सकता है ।
जीवन मे सुख और दुख को मात्र भावना के रूप मे लेना चाहिए । यह हमारे अंदर पैदा होती है बाहरी लोगों के शब्दों पर ध्यान देने की जगह केवल खुश करने वाले शब्दों तक सीमित रहने वाले सुखी रहते है । 70% लोग अनजाने में गलत शब्द बोल जाते हैं जबकि उनके मन में बुरा नहीं होता है । हम बुरे शब्दों के कारण जिंदगी भर पीड़ित रहते है । जबकि बोलने वाला बोलकर भूल चुका होता है ।
आधुनिक इंसान संतुष्ट रहना भूल चुका है, इसलिए वह हमेशा दुखी रहता है । हम भौतिक चीजों में सुख तलाश रहे हैं। पाश्चात्य सभ्यता की नकल के कारण मानसिक खुशी का महत्व भूलकर दुख भरा जीवन जी रहे हैं। मानसिक सुख कभी भी भौतिक चीजों या अन्य के माध्यम से नहीं मिलता है, वह अपने अंदर ढूँढना पड़ता है ।
इंसान अपने विचारों को बदलकर हमेशा खुश रह सकता है । बाहरी दुनियाँ इतना दुख नहीं देती जितना दुख हम खुद अनुभव करते है ।
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