गंवार इंसान का ज्ञान सीमित होता है लेकिन उसे बिना दिमाग का कहना गलत है । वह ज्ञान हासिल करके दिमागदार साबित हो सकता है .
पशु को सहज ज्ञान होता है । जिससे वह जीवन यापन करता है पशु की परवरिश उसके अभिभावक कुछ समय तक करते है उसके बाद उसे जीवन जीने के लिए अकेला छोड़ देते है । वह जल्दी समर्थ हो जाते है। उसके अभिभावक सारी उम्र उनके साथ नहीं रहते है ।
शाकाहारी जानवरों के शावक यदि कुछ घंटों मे चलने नहीं लगते तब उनके अभिभावक मुश्किल से एक दिन तक उसके खड़े होने और चलने का इंतजार करते है उसके बाद उसे भाग्य भरोसे छोड़ कर चले जाते है ।
इंसान अपने बच्चों की परवरिश 25 साल तक अवश्य करता है । उसके बाद उसकी शादी और पोते -पोतियों की जिम्मेदारी लेने के लिए भी तैयार रहता है । बच्चों के होने के बाद वह अपने लिए जीना भूल जाता है । यहाँ तक मरते समय भी उनकी जान बच्चों मे बसी होती है । उस समय भी सोचते हुए दुनियाँ से रुखसत होते है उनके कुछ काम रह गए जिससे बच्चों का भला कर सकते । उनका मोह सारी जिंदगी खत्म नहीं होता है । इसक कारण वह अपना जीवन नहीं जी पाते है ।
जीवन मे दुख और निराशा का मुख्य कारण उनका मोह बन जाता है । जो अपने बच्चों की शादी के बाद जिम्मेदारी लेने से मना कर देते है समाज उनको ताने देता है । उन्हे लगता है बच्चे के दुख मे उसका सहारा बनने की जगह ये अपना जीवन सुख से कैसे बीता रहे है । वह उस समय भूल जाते हे बुडापे मे इंसान कमजोर हो जाता है अब सहारे की उन्हे जरूरत है जबकि बच्चे उनमे सहारा ढूंढ रहे है उनका सहारा वे कब तक बन सकते है ।
शूद्र मे दिमाग न होना पहले समय की बात थी जब उन्हे ज्ञान से महरूम रखा जाता था । वह कुछ काम ही करने के लिए बाध्य किए जाते थे । उन्हे ज्ञान हासिल करने से रोका जाता था । अब यह गलत साबित हो गया है अब वे ऊंचे पदों पर कार्य कर रहे है । उनके दिमाग की प्रशंसा लोग करते है ।वह साधारण मानव के समान होते है जितना ज्ञान हासिल करते है उतने ज्ञानी कहलाते है ।
नारी को पहले समय मे दिमाग विहीन कहा जाता था । क्योंकि आक्रमणकारियों के कारण उसे बाहर निकलने नहीं दिया जाता था । उसकी शिक्षा पर पाबंदी थी । ज्ञान के अभाव मे वह कूप मंडूक बन गई थी । उसकी परवरिश के कारण वह किसी के आधे -अधूरे ज्ञान का विरोध नहीं करती थी । उसे हर इंसान की जी हजूरी करने की आदत डाली जाती थी । जिसके कारण उसे खुद को बेबकुफ़ और बददिमाग कहलाने पर भी बुरा नहीं लगता था । वह बाहर निकलने के अभाव मे आर्थिक रूप से सवाबलंबी नहीं थी । पैसे की जरूरत उसे हाँ मे हाँ मिलाने के लिए मजबूर करती थी ।
आधुनिक समय मे आप हर ऊंचे पद पर औरत को देख सकते है । अधिकतर राष्ट्राध्यक्ष के पद पर औरत विराजमान है । जो कार्य पहले पुरुष करते थे उनमे भी औरत का दखल हो गया है । वह सेना मे शामिल हो रही है । वह दिमागी ही नहीं मानसिक रूप से भी सबलता दिखा रही है ।
शिक्षा के क्षेत्र मे लड़कियों के परिणाम लड़कों से बेहतर आते है । शिक्षा हासिल करने मे लड़कियां पीछे नहीं है । वह हर ऊंचे पद पर दिखाई देने लगी है ।
आजकल शादी करके आप पत्नी को कमतर साबित करने की कोशिश करेगे तो आपको कही मान्यता नहीं मिलेगी । आप किसी औरत को बद दिमाग कहने पर अवमानना के कारण जेल की सजा भी खा सकते है । ताकत के दंभ मे उस पर हाथ उठाने वाले भी जेल की सलाखों के पीछे दिखाई दे जाए तो बड़ी बात नहीं होगी ।
आजकल कानून औरतों के हिसाब से बनने लगे है जिसका ज्ञान औरतों को होने के कारण वह उसका फायदा उठा रही है । वह कानूनी रूप से सजग हो गई है । जिसके कारण पुरुषों को कानून का ज्ञान हासिल करने की जरूरत है जिससे सुरक्षित रह सके । कानून उन्हे औरत का सम्मान करने के लिए मजबूर करने लगा है ।
जो पंक्ति आपने लिखी है उसका मतलब पशु ,गंवार शूद्र और नारी को पीट कर सुधारा जा सकता है । एक बार आप गंवार को पीट सकते है । लेकिन शूद्र और नारी को पीटने पर आप जेल की सलाखों के पीछे जा सकते है । पशु को पीटने पर बहुत सारे लोग उनके पक्ष मे आवाज उठाने लगे है । आजकल फिल्मों मे भी लिखा हुआ देखा जा सकता है इस फिल्म मे किसी जानवर पर अत्याचार नहीं किया है । क्योंकि आजकल किसी रूप मे जानवर पर अत्याचार करने वाले पर कानून लागू होने लगे है ।
आपको अब अपनी भावना दबा कर रखने की जरूरत है । इस तरह के शब्दों पर आसपास वाले आपकी हाँ मे हाँ नहीं मिलाएंगे । इसलीये सावधानी से शब्दों का चुनाव करे ।
यह पंक्ति तुलसीदास जी ने अपनी रचना राम चरित मानस मे लिखी है । तुलसीदास के पत्नी के साथ संबंध अच्छे नहीं थे । उस समय पत्नी ने तुलसीदास के प्यार को महत्व नहीं दिया था जिसके कारण उनका दिल टूट गया । उन्होंने हमेशा के लिए परिवार छोड़ दिया । उनके मन मे नारी जाति के प्रति नफरत घर कर गई थी । प्यार मे टूटा हुआ इंसान की भावना कैसी हो सकती है इस पर विचार करे ।
यदि आप परिवार और पत्नी के बिना समाज मे रह सकते है तब नारी के प्रति ऐसी भावना रख सकते है । समाज मे 50% नारी है जिसके कारण कही न कही उनसे वास्ता पड़ेगा । यदि इस भावना के साथ उनके साथ व्यवहार करोगे तो समाज मे रहना मुश्किल हो जाएगा । क्योंकि अधिकतर पुरुषों को अब अपनी इस भावना को छुपाना पड रहा है कोई आपका साथ नहीं दे सकेगा क्योंकि हर पुरुष किसी न किसी रूप मे औरत के साथ जुड़ा हुआ है वह माँ ,बहिन , बेटी ,दोस्त और पत्नी किसी भी रूप मे हो सकती है । उनका अपमान करने से फायदा कम और नुकसान अधिक सहना पड़ेगा ।
तुलसीदास जी ने जब ये पंक्तियाँ लिखी थी तब भारत पर मुगलों का शासन था । वे औरतों को अगवा करके हरम मे रख लेते थे । किसी भी इंसान के लिए औरत को महफूज रख पाना संभव नहीं था । यदि आपने पद्मावत फिल्म देखी है तब इसे समझ जाएंगे । पूरी जनता,राजा और सेना भी जान पर खेल कर रानी की रक्षा न कर सकी । उसे सबकी समाप्ति के बाद जोहर करना पड़ा था । साधारण इंसान परिवार की रक्षा कैसे कर सकता था । जिसके कारण जोहर जैसी कुप्रथा बनने लगी ।
लड़कियों को इन सबसे बचाने के लिए उनका बाहर निकलना और शिक्षा बंद कर दी गई । बाल विवाह ,बेमेल विवाह होने लगे । युद्ध की स्थिति मे पुरुषों की मृत्यु अधिक होने पर भी विधवा विवाह नहीं होते थे । उनकी जिम्मेदारी से बचने के लिए सती प्रथा शुरू हुई । उस समय नारी बोझ के समान हो गई थी जिससे मुक्ति पाना सभी चाहते थे । उसके पैदा होते ही अनेक तरह से मारने के उपाय होने लगे थे ।
अब वक्त बदल गया है इसलीये सोच बदलने का वक्त आ गया है । अब इस सोच के साथ समाज मे जगह बनाना कठिन है। अब समाज मे पशु ,शूद्र ,गंवार और नारी पर अत्याचार नहीं किया जा सकता है । अब जो अत्याचार करना चाहता है उसके लिए खुद को महफूज करना मुश्किल हो जाएगा ।
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