नशा 

नशे के लिए निरंकुश युवा जो अपना अच्छा और बुरा समझने की सामर्थ्य नहीं रखते है।उन्हे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए । बाद मे समाज ,सरकार, सोशल मीडिया और परिवार पर इल्जाम लगाया जा सकता है । परिवार के लोग केवल बच्चे का ध्यान नहीं रखते बल्कि अपना जीवन भी जीते है अपने शरीर से संबंधित अनेक काम करने पडते है ।

उसके अलावा उन्हे परिवार के अन्य सदस्यों की जरूरत भी पूरी करनी पड़ती है । इन सब कामों मे पूरा समय खत्म हो जाता है । आजकल के शहरी जीवन मे यदि बिना नौकरों के घर चलाया जाए तो इंसान के पास अपने लिए भी समय नहीं बचता है । तो घर के हर प्राणी पर पूरी तरह कैसे नजर रखी जा सकती है । पिता सारा इल्जाम पत्नी पर डालना चाहता है पत्नी पिता पर डालना चाहती है । एक इंसान जो पूरे दिन घर से बाहर रहता है वह बच्चे पर कैसे ध्यान रख सकता है । पत्नी जो घर से बाहर नहीं निकलती वह बेटे की हरकतों को कैसे रोक सकेगी ।

सभी बच्चे गलत और सही का अंतर जानते है जिसके कारण वह गलत काम परिवार से छिपा कर करते है परिवार वालों को हमेशा अपना बच्चा सही लगता है जिसके कारण वे उसपर संदेह नहीं करते है । इसलीये छिपे हुए कामों को रोकने की कोशिश नहीं कर पाते है । इसके कारण उनके अनेक दोष पर निगाह नहीं जाती है । जब तक उन्हे पता चलता है वह हाथ से निकल चुका होता है ।

शहरी जीवन बहुत व्यस्त हो गया है । जिसके कारण हर इंसान अपने लिए जीना चाहता है इसलीये परिवार की जरूरत पूरी करने के बाद वह अपने लिए कुछ समय निकाल कर खुश रहने के प्रयास करता है । जिसके कारण उसकी निगाह हर चीज पर नहीं रहती है ।

आजकल किसी को त्याग और बलिदान की मूर्ति समझना गलत है वह जितना त्याग करता है उतना अपने लिए जीने को भी स्वीकारता है । उसके हिसाब से इंसानी जीवन एक बार मिला है बाद मे दुबारा वह इंसान के रूप मे आये यह संभव नहीं है इसलीये उसे जीने का अधिकार मिलना चाहिए ।

समाज के लोगों को किसी परिवार मे दखल देने का अधिकार नहीं है । लोग उनकी दखलंदाजी को बर्दास्त नहीं कर पाते है । वे हमेशा सोचते है वह उनके परिवार पर झूठा इल्जाम लगा रहा है वह उससे झगड़ने के लिए तैयार हो जाते है । जिसके कारण समाज किसी परिवार के दोषों को लेकर मुखर नहीं हो पाता है वह हमेशा सोचता है जो हो रहा है उससे हमे कोई फर्क नहीं पड़ता है तो हम उस बारे मे क्यों सोचे जब तक उसके कारण अन्य लोगों को परेशानी नहीं होती है वह गलतियों को अनदेखा करते है ।

पहले लोगों के लिए अपने परिवार के सदस्यों से अधिक बाहर के लोगों का महत्व होता था जिसके कारण समाज के लोग यदि परिवार के सदस्य को गलत हरकत करते देखते थे तब वह वही उस पर हाथ उठा देते थे यदि परिवार मे उस इंसान की हरकत के बारे मे बताया जाता था तब बच्चे की बात पर यकीन करने की जगह उसे सुधारने के मकसद से बड़े भी उस पर हाथ उठाने से बाज नहीं आते थे ।

उसके अलावा समाज के उस सदस्य से कहा जाता था तुमने सही किया लेकिन अब हालत बदल गए है । जिसके कारण समाज का डर रहता था । लोग गलत हरकते करने से रुक जाते थे । उस समय केमरे का काम समाज के लोग करते थे जिसके कारण बच्चे गलत काम करने से पहले अनेक बार सोचते थे ।

कुछ लोग सरकार पर दोष लगाना चाहते है । सरकार मे एक इंसान नहीं होता है । उसमे अनेक लोगों की नियत मायने रखती है । कुछ अच्छे और कुछ गलत होते है गलत को सुधारना कठिन होता है । वह कभी अपनी गलती नहीं मानेगा । जो गलती नहीं मान कर उसे छिपाने की कोशिश कर रहा है उसे कानून बनाकर रोकना कठिन होता है । सरकार कानून बना सकती है लेकिन लागू करने वाले भ्रष्ट लोगों के कारण उन्हे रोकना कठिन हो जाता है । वे भ्रष्टता फैलाने मे दूसरों का सहयोग भी करते है ।

सोशल मीडिया पर नशे से संबंधित विज्ञापन चलाकर नशे को रोकने की अनेक कोशिश की जाती है । इससे संबंधित चीजे आने पर नीचे लिखा रहता है यह शरीर के लिए हानिकारक है । इस संदेश का लोगों पर असर नहीं पड़ता है । जो इन चीजों का सेवन करते है वह घर वालों से छिपा कर करते है जिसका मतलब उन्हे पता है वह गलत काम कर रहे है पता होने पर भी अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे है अपने जीवन से खिलवाड़ कर रहे है तो आप बताए दोषी कौन ?

सख्त कानून बनाकर इन्हे रोका नहीं जा सकता है अधिकतर देशों मे नशे के साथ पकड़े जाने पर मौत की सजा दी जाती है फिर भी लोग पैसे के चक्कर मे जान की बाजी लगा देते है । गरीब और अमरीका जैसे देशों मे नशे का व्यापार रोकना कठिन हो रहा है । सारी कोशिश कम साबित हो रही है ।

जो लोग मानसिक रूप से मजबूत होते है वे नशे की लत से बच जाते है लेकिन ड्रग माफिया का मकड़जाल अधिकतर लोगों को फंसा लेता है वह झूठ बोलकर सबसे पहले उन्हे लत लगाते है उसके बाद वह मजबूर हो जाते है ड्रग माफिया उनका फायदा हमेशा उठाता रहता है ।

उन्हे मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार की तरफ से बहुत सारे नशा मुक्ति केंद्र खोले जा रहे है । जिससे नशेड़ी लोगों का इलाज होता है । बहुत सारे लोग इससे निकल कर अच्छी जिंदगी जीते है ।

नशा आधुनिक समय मे अमीर परिवार के सदस्य इससे ज्यादा घिरे नजर आ रहे है वहाँ पैसे की कमी नहीं होती है वह खाली समय का सदुपयोग नहीं कर पा रहे है जिसके कारण वह गलत आदतों का शिकार होने लगे है । उनका एकाकी पन उन्हे इस तरफ धकेल रहा है । उनकी तन्हाई इसमे वजूद ढूँढने लगी है । यह हालत अमीर परिवारों और अमीर देश के लोगों की है जिसके कारण इसमे रोजगार देना जरूरी नहीं होता है । क्योंकि उनके पास पैसे का आधिक्य है ।

मेरे ख्याल से बंधा हुआ परिवार और अच्छे संस्कार उन्हे रोकने की कोशिश कर सकते है । जिसके कारण युवा खुद इसके भ्रमजाल से निकलने की कोशिश करे ।

वैसे नशा ऐसी चीज है यदि गलती से एक बार इसका सेवन करा दिया जाए तो नशे की लत पूरी करने के लिए इंसान बेचेन हो जाता है । शरीर के बदलावों को सहन करना कठिन हो जाता है । आजकल छोटे बच्चों के विद्यालयों के बाहर इसे आसानी से उपलब्ध कराने की कोशिश की जाती है । पैसे के लालच मे इंसान नशे को बड़ावा दे रहा है जिसके कारण इसका व्यापार बड़ता जा रहा है ।

इसके लिए सामूहिक प्रयास करना जरूरी हो गया है सरकार के सख्त कानून ,रोजगार देना ,लोगों को बचाने के लिए नशा मुक्ति केंद्र भी नाकाफ़ी साबित हो रहे है । परिवार और समाज के सहयोग से इसे रोकने की कोशिश की जा सकती है । किसी एक तरह से रोकना कठिन हो रहा है इसके लिए सभी का मिला जुला प्रयास होने से नशा बंद करवाया जा सकता है ।

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