चिंता इंसानी स्वभाव है । वह जितना वर्तमान में जीता है, उससे ज्यादा वह भूतकाल और भविष्य के बारे में सोचता है । जिसके कारण उसकी एकाग्रता भटकती रहती है । वह न चाहते हुए भी चिंतित रहता है । भूतकाल को बदलना उसके वश मे नहीं होता लेकिन उसके बारे मे सोच कर हमेशा दुखी रहता है वह यादे उसे चैन से रहने नहीं देती है । उनके बारे मे सोचकर वर्तमान को भी दुखदायी बना लेता है ।

वर्तमान में रहते हुए भूतकाल के बुरे अनुभव का दोहराव दुखी करता है । उसे हमेशा डर लगा रहता है कि ऐसा वक्त उसके जीवन में दोबारा न आए। भूतकाल का विश्लेषण वर्तमान मे करते समय उसे बहुत सारी बाते गलत लगती है जिसे वर्तमान मे रहकर सुधारा नहीं जा सकता है । वह पल दुबारा न आये इसलीये हमेशा चिंतित रहता है । उसकी चिंता परिवार से संबंधित होती है, जिस पर नियंत्रण करना उसके लिए कठिन होता है ।

वह भूतकाल से चिंतित होकर भविष्य में उसका दोहराव नहीं चाहता है । वह जितने काम करता है भविष्य को सुधारने के लिए करता है भविष्य अनजान और अंधेरा होने के कारण हम जान नहीं पाते वह सुखद होगा या दुखद । हम हमेशा सुख की चाह करते हैं। इंसान खुद नहीं जानता कि उसका सुख कहाँ और किस रूप में आएगा ।

जिस सुखद अहसास के लिए हम जीते हैं, जब वह वर्तमान में होता है, इंसान उसे पूरी तरह महसूस नहीं कर पाता है । उसे उस समय लगता है कि इसे किसी अन्य प्रकार से होना चाहिए था । ऐसी कल्पना मैंने नहीं की थी ।

इंसान जो जीवन जीता है, उससे संतुष्ट नहीं होता है; वह हमेशा सुख के लिए कुछ और ढूंढ रहा होता है । संसार में सभी दूसरे के जीवन को अच्छा समझते हैं, बनिस्बत अपने जीवन के ।प्राप्त से बहुत जल्दी मन बेजार हो जाता है । उससे दूर हटना चाहता है जो संभव नहीं हो पाता है ।

जो हमसे दूर होता है, उसे पाना बहुत कठिन होता है । अनचाहे की चाहना और प्राप्त को छोड़ना जिंदगी को दुखद बना देता है ।

मैंने अपने जीवन में जो चाहा, वह बहुत समय बाद मिला , जिसके कारण हमेशा दुखी रही । जब उस बारे में सोचना बंद करके खुद को नाकाबिल समझने लगी, तब उसकी प्राप्ति हुई ।उस समय उसकी प्राप्ति के समय उसे संभालना मुश्किल लगा । उसकी प्राप्ति के साथ अनेक उलझन भी प्राप्त हुई जिसे संभालना कठिन था उसके कारण दिन रात की नींद उड गई । हमेशा जिस रूप में कल्पना की थी उससे अलग तरह से प्राप्त होने के कारण उस पर नियंत्रण करना कठिन हो गया ।

मानवीय स्वभाव को समझना कठिन होता है । जिसके कारण हम किसी को सशरीर प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन उसके मन को समझना कठिन होता है । सबका स्वभाव हमारी उम्मीदों से परे होता है । जिसके कारण अनेक मुश्किलें पैदा हो जाती हैं। उस समय हम और अधिक चिंतित हो जाते हैं।

हमेशा प्राप्ति के बाद सुगमता के बारे मे सोचा था लेकिन उस समय अन्य तरह की उलझन पैदा हो गई जिसके कारण उसे सुलझाना कठिन हो गया । हमेशा दूर की चीज अच्छी लगने के कारण जब वह पास आती है तब दूसरी तरह की उलझन साथ लाती है जिसकी कल्पना नहीं कर पाते है ।

जीवन सुख और दुख का मिश्रण होता है । हमेशा सुख नहीं रहता है और दुख भी स्थायी नहीं होता है । जीवन मे कुछ प्राप्य होने के बाद कुछ छोड़ना भी पड़ता है यह छोड़ना दुख का कारण बनता है ।

इंसान जीवन को नियंत्रित करना चाहता है । जो संभव नहीं हो पाता है । एक सुख के साथ कुछ दुखद अवश्य आता है जिसके बारे मे सोचा नहीं होता है ।

हम दूसरे के जीवन को अपने अनुसार बनाना चाहते हैं जो संभव नहीं होता है । यदि संभव हो भी जाए तो उसके बाद आने वाली अनेक परेशानियों की कल्पना न करने के कारण वह सुख नहीं देता है । जैसे अधिकतर दंपत्ति बच्चे की इच्छा रखते हैं, उसके बिना उन्हें जीवन व्यर्थ लगता है । बच्चा आने के बाद दिनरात उसके अनुसार बिताने के कारण हमेशा इंसान यह सोचकर दुखी रहता है हमारे पास अपने अनुसार जीने का समय नहीं बचा । हम बहुत व्यस्त हो गए। यह इच्छा भी इंसान को दुखी बनाती है ।

इंसान इसे भगवान की माया समझ कर स्वीकार कर ले तो चिंता खत्म हो जाएगी ।जो संतुष्ट जीवन जीते हैं, वे भगवान की सत्ता को सर्वोपरि समझते हैं। वे जीवन के हर रूप को स्वीकारते है ।

भगवान पर आस्था रखने वाले कभी दुखी नहीं रहते हैं। वे संसार के कण -कण मे भगवान को देखते है । वह खुद को और कामों में भगवान की मर्जी तलाशते हैं, जिसके कारण सुखी रहते हैं। वह खुद को भगवान का बनाया खिलौना समझने के कारण किसी पर नियंत्रण नहीं करना चाहता है । जो हो रहा है, उसे केवल देखते हैं, उसमें बदलाव लाने की कोशिश नहीं करते हैं। जहां बदलाव की इच्छा पैदा होती है वही दुख की शुरुरात होती है। हम परिवार और समाज से जुड़े होने के कारण सबकी चिंता करते है एक चिंता के खत्म होने पर दूसरी चिंता उठ खड़ी होती है जिसके कारण सुख का अहसास नहीं हो पaता है ।

ज्ञानी जनों ने कहा है नानक दुखिया सब संसार । यानि जो दुनियाँ में आया है वह चिंतित अवश्य रहेगा । उसे हमेशा दूसरे सुखी और खुद को वह हमेशा दुखी समझता रहेगा ।

जो वैरागी है, यानी जो लापरवाह है, वही सुखी रह सकता है । सुखी रहने के लिए सोच बदलने की जरूरत है । हम किसी के जीवन मे बदलाव नहीं ला सकते है जीवन मे बदलाव लाने की शक्ति केवल भगवान के हाथों मे है चिंता से बचने के लिए जो भगवान की सत्ता को स्वीकारते है वही सही मानो मे संतुष्ट और सुखी रहते है।

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