सफलता मिलना अलग बात है। डिग्री होने से आपको जीवन में आगे बढ़ने के अधिक मौके मिलते हैं। आपका आत्मविश्वास बढ़ता है । जब आत्मविश्वास पूर्वक काम किया जाता है तब अधिकतर कामों मे सफलता का % बड़ता जाता है । इसका महत्व बाहरी दुनियाँ मे होता है ।
जब इंसान घर में जाता है, तब उसे बाहरी आवरण छोड़ना पड़ता है। उस समय आप पिता ,पति और बेटे होते हैं। वहाँ पहुँचने के बाद आप सहज महसूस करें। क्योंकि बच्चों के लिए पिता वह इंसान होता है जो सभी जरूरते पूरी करने के बाद बच्चों के नाज -नखरे उठाता है । उस समय वह बच्चों के साथ बच्चे जैसा व्यवहार करता है । उनके लिए उसकी डिग्री और पद से मतलब नहीं होता है ।
अभिभावकों के लिए उनका बेटा कभी बड़ा नहीं होता है वह आज भी उसकी मूल आवश्यकता पूरी करके खुशी महसूस करते है । वह उसके बाहरी दुनियाँ मे ऊंचाई छूने पर गर्वित होते है लेकिन वह घर मे घुसने के बाद उसे आज्ञाकारी बालक के समान देखना पसंद करते है । वह अब भी अधिकार पूर्वक उससे काम के लिए कहते है। वह बचपन के सम्बोधन का इस्तेमाल करते है बाहर भले आपके साथ लोग जी , साहब लगाते है लेकिन घर मे आप उनके बारे मे न सोचे ।
बहिन-भाई के लिए आज भी झगड़ते रहने वाला साथी होता है जिससे बराबरी की जाती है । जिसकी शिकायत लगाने में उन्हें देर नहीं लगती है ।
पत्नी को यदि आप खुद के समान समझेंगे, तभी वह आपके साथ सहज रह सकेगी । आपसे मन की बात कहने में सक्षम होगी । वरना वह आपसे कोई बात नहीं कहेगी । वह आपके सामने कठपुतली के समान काम करेगी । जो आपकी मूल आवश्यकता पूर्ण करने के बाद आपके सामने नहीं रहेगी ।आपने सुना होगा कि जहां दो बर्तन होते हैं, वे खटकते हैं। इसलिए दो प्राणी होने पर ही मान मनुहार और तकराहटे होती है ।
मेरे ख्याल से आप अपने पिता के जीवन से अपनी तुलना कर रहे हैं। जहां पिता के घर के घर में घुसते ही शांति छा जाती थी । सब कौनों मे छिप जाते थे । माँ भी पिता को बात कह देने के नाम पर आपको डराया करती थी । आप भी पिता के नाम से सुधर जाते थे । पिता को शब्दों की जरूरत नहीं पड़ती थी । उनके नाम से ही घर मे खौफ छा जाता था । वह इंसान घर में आने के बाद घर के किसी कमरे में जाकर बैठ जाता था । जिसमें पास कोई नहीं जाता था । वह किसी से बात भी करना चाहे तो सभी हकलाने लगते थे ।
आप एक बार उस खौफ को अलग करके सोचे, तब महसूस करेंगे वह इंसान कितना अकेला होता होगा जहां उसके साथ कोई बात करने वाला नहीं होता । जो अपने मन की उलझन किसी से साझा नहीं कर सकता । अधिकतर पुरुष अपनी बीमारी की अवस्था मे अकेले दर्द सहते रहते है । वह किसी से अपनी तकलीफ साझा नहीं कर पाते ।
अधिकतर पुरुषों की उम्र औरतों की अपेक्षा कम होती है क्योंकि वह परिवार के सभी सदस्यों को कमजोर समझते है अपने को मजबूत साबित करने की कोशिश मे सभी मानसिक और शारीरिक दुख दर्द अकेले सहन करते रहते है जिसके कारण वह अंदर से खोखले हो जाते है इन सबके बाबजुद कराह तक नहीं पाते है ताकि परिवार के अन्य सदस्यों को परेशानी न हो ।
पुरुषों में औरतों की अपेक्षा कम बोलने की आदत होती है । लेकिन वह खुशियाँ पाना चाहते हैं, अपने मन की घुटन निकालना चाहते हैं। जिसके कारण उन्हें मानवीय बनना पड़ेगा । जो इंसान हंस बोल सकता है । उसके लिए सहज होना जरूरी है ।उसे बच्चों के सामने बच्चे की तरह व्यवहार करते समय पद के बारे मे नहीं सोचना चाहिए । बच्चों को पद का मतलब नहीं पता होता। उनके पापा संसार के सबसे अच्छे इंसान होते है जो उनकी सभी जरूरते पूरी करते वक्त खुद को भुला देते है ।
पत्नी आपके बराबर उम्र की होती है जिसके कारण वह आपको समझ सकती है यदि वह आपसे लड़ाई भी करती है तब वह आपकी और परिवार की भलाई के लिए करती है वह आपको और परिवार को अपना समझती है जिस दिन वह चुप हो जाएगी । तब भी आप दुखी होंगे क्योंकि आपको भी बोलने के लिए साथी नहीं मिलेगा । लड़ने-झगड़ने को जीवन का हिस्सा समझने वाले सामान्य जीवन जीते हैं।
आपके पास परिवार है, इसलिए समस्या है । जिनसे आप परेशान हो रहे हैं। यदि परिवार आपसे छिन जाएगा तबकी कल्पना करके देखे उस समय आपका जीवन आज से भी अधिक दुखदायी होगा । उस समय आप दूसरों के परिवार को देखकर कैसा महसूस करोगे?
बचपन से लड़कों को विशेष सहूलियत दी जाती है जिसके कारण वह खुद को साधारण नहीं समझ पाते है अभिभावक बच्चों को भगवान का दिया वरदान समझकर उसके हर नाज नखरे उठाते है ।उनके पालन-पोषण करते हुए खुद को भूल जाते हैं। अब आप उनकी भूमिका मे आ गए है । अब आपको बचपना छोड़ना पड़ेगा । अन्य की अधिकतर बातों को मन से न लगाए । क्योंकि आप ऐसी दीवार बन गए हैं जो परिवार के लिए सुरक्षा कवच है, जिससे सभी विपदाएं टकराकर खत्म हो जाए । इसलिए परिवार में जाते समय मन को एक तरफ रख दे । परिवार मे सम्मान पाने जैसी चीजे महत्व नहीं रखती है परिवार वह जगह होती है जहां इंसान निसंकोच सभी कार्य करता है जहां दिखावे की जरूरत नहीं होती है ।
सारा वक्त दिखावे का जीवन जीते हुए आपको बोरियत नहीं होती कभी तो आपको सहज जिंदगी के बारे मे सोचना चाहिए जहां सब कुछ मन माफिक किया जा सके ।परिवार में अधिकतर लोगों को इज्जत नहीं मिलती क्योंकि जो इंसान काम करता है, उससे शिकायत की जाती है ।
जो काम नहीं करता है, उससे कुछ नहीं कहा जाता है । आपको समझना पड़ेगा, आप वह वटवृक्ष हैं जिसमें सभी को छाया मिल रही है। परिवार के सभी सदस्य अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। उनके कामों में ही कमियाँ निकाली जाती हैं। जो काम नहीं करेगा, उससे किस बात की शिकायत करें। आप संवेदनशील प्राणी हैं, जिसके कारण आप दुखी हैं। जीवन जीने के लिए चिकनी मिट्टी का घड़ा बना पड़ता है जिस पर शिकायतों रूपी पानी न टीके ।
आधुनिक इंसान जितना काम करता है उससे अधिक सोचता है आपको सिर्फ काम के बारे मे सोचना चाहिए उसके बाद सब कुछ भुला दे । उतना करें जितनी सामर्थ्य है, उससे अधिक सोचकर केवल स्वास्थ्य खराब करेंगे । अपनी और दूसरों की सीमा को पहचानकर काम करके सभी का भला होगा ।
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