दूसरों से अपेक्षा रखने की जगह खुद पर विश्वास रखने वाले सफलता पाते है । जो दुसरो से अपेक्षा रखते है उनकी जरूरत पूरी नहीं होती है । आपने बचपन मे किसान और पक्षी के घोंसले की कहानी सुनी होगी । जिसमे पक्षी तब तक बच्चों को लेकर नहीं उड़ता जब तक किसान कहता है मै दूसरों से काम करवाऊँगा । जिस दिन वह कहता है अब मै कल खुद फसल काटूँगा । उस दिन वह बच्चों के साथ उड़ जाती है । दूसरों की परेशानियाँ और मजबूरीया उसे काम करने से रोकती है जब हमारा अपना काम होता है उसके लाभ हानि का असर हमे उठाना पड़ता है तब इंसान मजबूरीया भूल कर हर हालत मे काम करता है ।
जो इंसान अपने भरोसे काम करता है उसे काम मे आने वाली परेशानियाँ पता होती है जिसके कारण उन उलझनों को सुलझाते हुए आगे बड़ता है । उलझने सुलझाते हुए उसका आत्मविश्वास बड़ता चला जाता है । बड़े हुए आत्मविश्वास के सहारे इंसान सफलता की सीडियाँ चड़ता जाता है ।
जो इंसान अपेक्षा रखना बंद कर देता है वह सही समय पर काम करता है क्योंकि वह किसी से उम्मीद नहीं रखता है जब खुद काम करना है तब उसे किसी तरह का व्यवधान रोक नहीं पाता है। वह दिन रात कभी भी काम कर सकता है उसे नियत समय पर काम करना जरूरी नहीं लगता है ।
जो किसी से अपेक्षा नहीं रखते उन्हे दूसरों मे दोष नहीं दिखाई देते है क्योंकि वह आत्मनिर्भर होता है । आत्मनिर्भर लोग केवल सामने वाले के गुणों पर विचार करते है उन्हे किसी के बारे मे सोचने का समय नहीं होता है ।
उनके लिए समय काटना आसान होता है क्योंकि समय का सही उपयोग करने के कारण फालतू समय नहीं होता है । वह हमेशा अच्छे काम करते दिखाई देते है ।वह कामचोर नहीं होते है वह हमेशा जोश से भरे दिखाई देते है।
उनके शब्दों मे कड़वाहट नहीं होती है क्योंकि किसी से उम्मीद नहीं करते है वह खुद काम करने के कारण उसमे आई परेशानियों को समझते है वे दूसरे के काम न कर पाने को उसकी मजबूरी समझकर नजरअंदाज कर देते है ।
अपेक्षा रखने वाले अधिकतर नकारात्मक तरीके से सोचते है यह सोच हमेशा के लिए बन जाती है । वह हमेशा लोगों और भगवान को दोष देते रहते है । उन्हे जीवन मे अच्छाई नजर नहीं आती है । वह हमेशा बुराई देखते है । वे जीवन से खुश होना भूल जाते है ।
दुख के कारण उनके शरीर मे दुख देने वाले हार्मोन्स निकलते है जो उनकी खुशियां छीन लेते है ऐसे लोग भूल जाते है खुशी का महत्व अधिक होता है खुश रहने वाला इंसान हमेशा स्वस्थ रहता है वह अपने शरीर पर अधिक ध्यान देता है । यह खुशियां समाज मे समाँजस्य स्थापित करवाती है । खुशमिजाज लोगों के दोस्त अधिक होते है । वह हर महफ़िल की रौनक बनते है ।
अपेक्षा रखने वाले अपने सभी गुणों को समझ नहीं पाते है जिसके कारण उनका आत्मविश्वास कम रहता है । वे हमेशा मददगार ढूँढने की कोशिश करते है । जीवन मे वही इंसान मदद करता है जिसे आपसे फायदा हो रहा होता है जब उसे फायदा नहीं होता तब उसे आपको नकारने मे देर नहीं लगती है । यह स्थिति दुखदायी होती है ।
जो इस स्वभाव को समझता है वह दूसरों से अपेक्षा रखने से पहले सोचता है जिससे उम्मीद कर रहा हूँ वह मेरा क्यों काम करेगा उसे इससे क्या फायदा हो रहा है । वह हमेशा तुलना करता है फिर उससे काम की उम्मीद करता है । अधिकतर लोग मदद उसी से मांगते है जिसकी मदद कर चुके होते है या उसे काम करने के फायदे बता कर उसका सहयोग पाते है ।
फायदे के रूप मे पैसा देने से भी नहीं हिचकते है । वह हर काम की कीमत तय करते है उसी के अनुसार सहयोग देते या पाते है । इस तरह के लोगों को व्यवहारिक कहा जा सकता है । जो जितना दुसरो को देते है उतने की उम्मीद करते है ज्यादा दूसरों से नहीं मांगते इसलीये हर काम मे सफलता पाते है।
अपेक्षा न रखने वाले लोग इंसानी व्यवहार समझने के कारण सफलता हासिल करते है उनका अपने पर भरोसा बना रहता है । उनका आत्मविश्वास हमेशा आगे बड़ाता है । यह आत्मविश्वास लोगों को उनकी तरफ खींचने का काम करता है । उनके आने से महफ़िल मे रौनक आती है । लोग उन्हे देखकर खुश होते है लोगों को उनकी नजदीकी पसंद आती है । क्योंकि कोई इंसान बेकार मे काम करना पसंद नहीं करता है । सब मददगार लोगों की तलाश मे रहते है ।
समाज मे ग्राह्य बनने के लिए अपेक्षा करना बंद कर देना चाहिए ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें