हाँ। यह मेरा परखा हुआ सत्य है क्योंकि मुझे आधे घंटे मे दो हार्ट अटैक पड़े । मुझे पता नहीं चला यह हार्ट अटेक है । फिर भी भगवान की कृपा से मै बच गई। यह भगवान की मर्जी के कारण संभव हुआ । उसी समय शेफाली ज़रीवाला और संजय कपूर को दिल का दौरा पड़ा । उनकी उम्र मुझसे कम थी वह हमारी हेसियत से बहुत अमीर थे । उनके पास जिंदा रहने के अनेक साधन थे । उनको बचाने के लिए डॉ. की टीम थी, उसके बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका । जबकि साधनों के अभाव में भी मैं जिंदा रही ।

मुझे उस समय धक्का लगा जब डॉ ने मेरे होश में आने के बाद कहा, 'मैं मर चुकी थी ।' उस समय हैरान रह गई। क्या इतनी आसानी से मौत आती है? इंसान को पता भी नहीं चलता । मै एक महीने तक इसके बारे मे सोचती रही तब अहसास हुआ भगवान अभी मेरे द्वारा काम करवाना चाहते है जिसके कारण मै जिंदा हूँ । अभी मेरे काम खत्म नहीं हुए जबकि मै अपनी सभी जिम्मेदारियाँ पूरी कर चुकी हूँ । यदि मै न रहूँ तब भी सभी की जिंदगी आसानी से चल जाएगी ।

कुछ लोग बिना जिम्मेदारी पूरी किए दुनियाँ से चले जाते है कुछ 95 साल की उम्र मे भगवान से मौत मांगते है लेकिन उन्हे मौत नहीं आती है । जीवन मे इतना दुख देख चुके होते है अब उनका मन जीवन से उचाट हो चुका होता है शरीर की अनेक बीमारियाँ उन्हे दर्द दे रही होती है उनके प्रियजन भी उनसे मुक्ति चाहते है लेकिन उन्हे मौत नहीं आती है ।

अधिकतर सुंदरता, बदसूरती ,किसी का घर विशेष मे जन्म लेना, बड़ों का मर जाना या जिंदा रहना इंसान के बस मे नहीं होता है देश काल और वातावरण भी कोई और निर्धारित करता है हमारे सोचने का तरीका भी अन्य के हाथ मे होता है । एक ही परिवार के सभी लोग बाद मे अलग तरह से जीवन गुजार रहे होते है । एक गरीब तो दूसरा अमीर बन जाता है। जबकि परवरिश के समय सभी को समान अवसर देने की कोशिश की गई थी।

कुछ लोग जीवन की शुरुरात मे काम के असफल होने पर हिम्मत छोड़ देते है दूसरा जीवन पर्यंत अपने लक्ष्य को पूरा करने मे लगा रहता है। किसी का उद्देश्य जीवन मे सुविधा पाना होता है उनके लिए आलस भरा जीवन सबसे सुंदर होता है तो दूसरे के जीवन का उद्देश्य केवल काम करना होता है इस तरह के लोग केवल अपने लिए नहीं बल्कि दुसरो के लिए भी काम करके खुशी पाते है ।

एक इंसान अच्छे परिवार मे पैदा होने के बाबजुद अपाहिज होता है कुछ पैदा होते ही मर जाते है। कुछ लोगों की क्षणिक जिंदगी सोचने पर मजबूर करती है । जिंदगी के रचयिता हम हैं या कोई और है? हम क्या उसके हाथ की कठपुतली हैं, जिसकी डोर वह खींचता है, उसी हिसाब से हम काम करने लगते हैं। हमारी चाहत मायने नहीं रखती है ।

बिल गेट्स ने कंप्यूटर बनाने का सपना अपने दोस्त केंट इवान्स के साथ देखा था । उसकी 17 साल की उम्र मे पर्वतारोहण करते हुए मौत हो गई । उसे कोई नहीं जानता जबकि बिल गेट्स ने कंप्यूटर की दुनिया में नाम कमाया । बहुत समय तक संसार के सबसे धनी व्यक्ति रहे । इसे ईश्वर की महिमा कहा जा सकता है ।

हम जिस पद पर पँहुचते है वह भगवान की इच्छा से पँहुचते है वह हमे उस स्थल पर देखना चाहता है उस स्थिति मे हमसे काम करवाना चाहते है जिसके कारण हम ऊंचाई छूते जाते है । ऊंचाई चुने का मतलब सामान्य लोगों से अधिक काम करना होता हे उनकी जिंदगी आम लोगों से अधिक मेहनत मांगती है ।

कुछ लोग बेकार जिंदगी जीकर दुनियाँ से चले जाते है उनके लिए काम करना सजा के समान होता है कुछ लोग रात मे कुछ घंटे सोकर काम करते रहते है उन पर थकान हावी नहीं होती ।उनके लिए जीवन के सुख मायने नहीं रखते वे बीमारी की अवस्था मे भी काम करते रहते है उस सोच के लिए ईश्वर जिम्मेदार है ।

किसी को काम करने के लिए प्रोत्साहित करना ईश्वर की मर्जी है । अभावों मे पले विख्यात अभिभावकों की संतान जीवन मे सफल नहीं हो पाती है जबकि उन्हे आगे बडने के लिए सभी सुविधा मिलती है जबकि फकीरी मे पले बच्चे भी ऊँचाइयाँ छूते मिल जाते है यह किसकी कृपा से होता है सोचने की बात है ।

सुख दुख , जीवन मरण , पद प्रतिष्ठा,स्वास्थ्य और जन्म मरण सब ऊपर वाले की कृपा से मिलता है हमारे सोचने के तरीके से सुख दुख निर्धारित होते है । मेरे ख्याल से जीवन मे मन मुताबिक कुछ भी इंसान को नहीं मिलता है कुछ जो मिल जाता है उससे संतुष्ट हो जाते है कुछ सब कुछ मिलने के बाबजुद असन्तुष्ट रहते है उन्हे सब कुछ मिलने के बाद भी दुख रहता है वह केवल उस चीज के बारे मे सोचते है जो उन्हे नहीं मिल सका होता है ।

हम उस इंसान के बारे मे सोचकर दुखी रहते है जो जीवन से संतुष्ट है जो असन्तुष्ट है उसे संतुष्टी के बारे मे समझाने पर नाकाम रहते है उसे अपना दुख संसार का सबसे बड़ा लगता है । जिसके कारण अच्छी बातों के बारे मे सोच नहीं पाता है अनजाने मे वह हमेशा अपने दुख के भंवर मे फंसा रहता है ।

मेरी अपनी सहेली से बात करने पर पता चला । उसने दुनिया के हिसाब से बेहतर जिंदगी जी थी, वह सबकुछ होने के बावजूद अपने जीवन से दुखी थी । उसके अनुसार जैसी जिंदगी उसने कल्पना की थी, जिंदगी वैसी नहीं थी । उसने काबिल होने के बावजूद जीवन से समझौता किया था । उसके मनमाफिक कभी कुछ भी नहीं रहा था । जो जैसा था उसे स्वीकारने मे जिंदगी बीता दी

मै जीवन के अंतिम पड़ाव पर पँहुच कर सोचती हूँ जो जीवन जिया वह हमारे अनुसार नहीं था । उसका विधाता कोई और था । हम केवल उसके अनुसार काम करते रहें। अंत में जो कुछ हासिल किया, उसके मायने नहीं थे । जीवनभर कठिनाइयां, सहते हुए, मर्जी के खिलाफ जीवन जीकर ,जो कुछ हासिल किया, वह सभी कुछ इसी दुनियाँ मे छोड़कर जाना पड़ेगा । जबकि अपने हाथ से किसी को इतना नहीं देते जितना इस दुनियाँ में छोड़कर जाना पड़ेगा ।

अभी भी दुख सताता है; कोई धोखा देकर सबकुछ न छीन ले, उसके लिए सतर्क रहते हैं। लेकिन जीवन की विडंबना के रूप मे सभी सुख के साधन ,हमारी मर्जी के खिलाफ, इसी दुनियाँ मे रह जाने है फिर मोह ममता क्यों और किसके लिए है जिसके कारण चिंता ग्रस्त रहते है । अपने अंतिम समय में भी निश्चिंत नहीं रह पाते हैं।

मेरे जैसी स्थिति हर उस इंसान की होती है जो जीवन की अंतिम अवस्था मे होता है हमने जो जीवन जिया वह हमारी इच्छा के हमेशा विपरीत होता है । इसका मतलब हमारे जीवन का नियंता कोई और होता है जिसकी उंगलियों पर हम नाचते हैं।

जीवन की अंतिम अवस्था में पहुँचा इंसान हमेशा दुखी रहता है। वह जो चाहता था, वैसा जीवन नहीं जी सका । उसे समझ नहीं आता कि अनिच्छा से उसने ऐसा जीवन क्यों और किसके कारण व्यतीत किया । वह क्यों विद्रोह नहीं कर सका । उसका जीवन क्यों दूसरों के अनुसार बीता? वह अपने जीवन का नियंता क्यों नहीं बन सका?

जो हालत से बगावत करके जीते हैं, उनके मन में भी खलिश रहती है । उन्होंने जो जिस रूप मे चाहा था जीवन वैसा कभी नहीं हुआ । उनकी इच्छा उसे इस रूप मे पाने की नहीं थी जिस रूप मे जीवन प्राप्त हुआ । मेरे ख्याल से बागी लोग अधिक दुख महसूस करते हैं क्योंकि वे जीवन को समझ नहीं पाते हैं।

जीवन कभी भी किसी के मन मुताबिक नहीं होता है; उसका नियंता भगवान होता है । वह पहले ही सबकुछ किस्मत में लिख देता है। जिसकी काट इंसान के बस में नहीं होती है । हमारे अंदर मेहनत करने की भावना भी उसकी कृपा से पैदा होती है । जिसके कारण जीवन सफल या असफल होता है ।

कुछ बिना मेहनत किए भगवान से सबकुछ मांगना चाहते है भगवान बिना मेहनत के कुछ नहीं देता है उस हिसाब से इंसान का दिमाग भी भगवान बनाता है । वरना कुछ हमेशा सोचते है कोई उन्हे बिना मेहनत के क्यों नहीं देता है वह खुद कुछ करने की अपेक्षा हमेशा दूसरों से उम्मीद लगाकर दुखी रहते है क्योंकि सामने वाला किसी के मन के अनुसार काम नहीं कर पाता है ।

वे किसी की मेहनत नहीं समझते, वे केवल उसे भगवान का वरद हस्त समझकर भगवान को हमेशा कोसते रहते हैं। वह सफल लोगों के जीवन की कठिनाई के बारे में नहीं सोचते, बल्कि केवल उनकी सफलता को देखकर नाखुश रहते हैं। वह भूल जाते है भगवान छप्पर फाड़ कर आजकल किसी को नहीं देता है इंसान जितना काम करता है उसे उसी हिसाब से प्राप्त होता है ।

ईश्वर सफल या असफल सोच बनाता है। इसे उसकी कृपा मानने में भलाई है ।

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