रैना के प्रति प्रधानाचार्य का अच्छा व्यवहार नही था । इस कारण रैना का मन उदास रहता था । वह मन लगाकर काम नही कर पाती थी । उसका काम गलत हो जाता था । सभी को उसका अनमना पन खलता था । रैना की उदासी देखी नही जाती थी । कुछ लोगो का अपने मन पर नियंत्रण नही होता ।
हमारे समझाने पर कुछ समय के लिए हंसने लगती थी । पर उसपर जल्दी ही असर खत्म हो जाता था । वह फिर उदास हो जाती । उसकी उदासी हमसे देखी नही जाती थी । स्थानांतरण के लिए उसने और राधा ने फार्म भर दिए । रैना गाजियाबाद में रहती थी । उसने बॉर्डर के पास के विद्यालय के स्थानांतरण के लिए आवेदन किया । उन दिनों विद्यालय में अद्यापको की कमी थी । इस कारण प्रधानाचार्य नही चाहती थी । कोई अद्यापिका कही और जाये उन्होंने उन दोनों का स्थानांतरण रुकवा दिया । राधा तो अपनी किस्मत पर सब्र करके बैठ गयी । लेकिन रैना के पति को उसका रुकना पसंद नही था । उन्होंने पूरा जोर लगा दिया । जिससे उसका विद्यालय बदल जाए । प्रधानाचार्या उसके कामो से दुखी भी थी ,उसे पसंद भी नही करती थी उसका जाना भी उन्हें गवारा नही था । वे रैना का दुःख समझ नही पा रही थी ।
रैना के पति राकेश बहुत संवेदनशील थे । वे प्रधानाचार्य से मिलने आये । उन्होंने उनसे बहुत बहस की पर वो बहुत धाकड़ थी उनपर राकेश के अनुनय विनय का कोई असर नही हुआ । ज्यादा जोर देने पर उन्होंने कहा -"जो तुम्हारे मन में आये करो में उसे यहाँ से नही जाने दूँगी । "राकेश दृढ़ निश्चयी थे । उन्होंने सोच रखा था । "इतनी मुश्किल से रैना का स्थानांतरण करवाने हुआ । अब यदि ठहर गया तो सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा । "वे अधिकारियो से मिले उनसे अपनी विपदा सुनाई । पहले तो अधिकारी तैयार नही हुए । उनका जबाब था -"हम जो कर सकते थे हमने किया । अब आप प्रधानाचार्या से कहो । वे ही उसे जाने की इजाजत देगी । " राकेश ने कहा -"यदि वह हमारी बात सुन रही होती तो हम आपके पास क्यों आते । "
कई दिन तक राकेश अधिकारियो के दफ्तर के चककर लगाते रहे । उन्होंने अपने दफ़्तर से कई छुट्टिया ली । वे अधिकारियो के पास जाने से उकताए नही । अंतत उन्हें रैना की मुश्किल समझ आयी । उन्होंने राकेश को बुलाया और कहा -" तुम्हे देखकर लगता है तुम सच में परेशानी झेल रहे हो नही तो इतने दिनों तक कोई बारबार नही आता । ये लिखित में आदेश दे रहा हूँ । इसको नकारना मुश्किल है । " इस आदेश को लेकर जब राकेश विद्यालय गये । प्रधानाचार्या ने उन्हें अंदर आने नही दिया । वे बाहर बैठे रहे । जब काफी समय तक राकेश वापस नही गए तब उन्हें अंदर बुलाया गया । राकेश ने अधिकारियो का लिखित आदेश उनके सामने रख दिया । उसे नकारना मुश्किल था । तब प्रधानाचार्या बोली -"तुम जैसा हठी इंसान नही देखा । "उन्होंने रैना के स्थानांतरण को मंजूरी दे दी । यदि राकेश जैसा दृढ़ निश्चयी इंसान नही होता तो रैना का स्थानांतरण होना बहुत मुश्किल था । कहते है -" सीधो का भला राम करते है । "इसलिए रैना को कर्मठ राकेश जैसा पति मिल गया । जो उसकी हर मुश्किल को आसान कर देता है ।
हमारे समझाने पर कुछ समय के लिए हंसने लगती थी । पर उसपर जल्दी ही असर खत्म हो जाता था । वह फिर उदास हो जाती । उसकी उदासी हमसे देखी नही जाती थी । स्थानांतरण के लिए उसने और राधा ने फार्म भर दिए । रैना गाजियाबाद में रहती थी । उसने बॉर्डर के पास के विद्यालय के स्थानांतरण के लिए आवेदन किया । उन दिनों विद्यालय में अद्यापको की कमी थी । इस कारण प्रधानाचार्य नही चाहती थी । कोई अद्यापिका कही और जाये उन्होंने उन दोनों का स्थानांतरण रुकवा दिया । राधा तो अपनी किस्मत पर सब्र करके बैठ गयी । लेकिन रैना के पति को उसका रुकना पसंद नही था । उन्होंने पूरा जोर लगा दिया । जिससे उसका विद्यालय बदल जाए । प्रधानाचार्या उसके कामो से दुखी भी थी ,उसे पसंद भी नही करती थी उसका जाना भी उन्हें गवारा नही था । वे रैना का दुःख समझ नही पा रही थी ।
रैना के पति राकेश बहुत संवेदनशील थे । वे प्रधानाचार्य से मिलने आये । उन्होंने उनसे बहुत बहस की पर वो बहुत धाकड़ थी उनपर राकेश के अनुनय विनय का कोई असर नही हुआ । ज्यादा जोर देने पर उन्होंने कहा -"जो तुम्हारे मन में आये करो में उसे यहाँ से नही जाने दूँगी । "राकेश दृढ़ निश्चयी थे । उन्होंने सोच रखा था । "इतनी मुश्किल से रैना का स्थानांतरण करवाने हुआ । अब यदि ठहर गया तो सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा । "वे अधिकारियो से मिले उनसे अपनी विपदा सुनाई । पहले तो अधिकारी तैयार नही हुए । उनका जबाब था -"हम जो कर सकते थे हमने किया । अब आप प्रधानाचार्या से कहो । वे ही उसे जाने की इजाजत देगी । " राकेश ने कहा -"यदि वह हमारी बात सुन रही होती तो हम आपके पास क्यों आते । "
कई दिन तक राकेश अधिकारियो के दफ्तर के चककर लगाते रहे । उन्होंने अपने दफ़्तर से कई छुट्टिया ली । वे अधिकारियो के पास जाने से उकताए नही । अंतत उन्हें रैना की मुश्किल समझ आयी । उन्होंने राकेश को बुलाया और कहा -" तुम्हे देखकर लगता है तुम सच में परेशानी झेल रहे हो नही तो इतने दिनों तक कोई बारबार नही आता । ये लिखित में आदेश दे रहा हूँ । इसको नकारना मुश्किल है । " इस आदेश को लेकर जब राकेश विद्यालय गये । प्रधानाचार्या ने उन्हें अंदर आने नही दिया । वे बाहर बैठे रहे । जब काफी समय तक राकेश वापस नही गए तब उन्हें अंदर बुलाया गया । राकेश ने अधिकारियो का लिखित आदेश उनके सामने रख दिया । उसे नकारना मुश्किल था । तब प्रधानाचार्या बोली -"तुम जैसा हठी इंसान नही देखा । "उन्होंने रैना के स्थानांतरण को मंजूरी दे दी । यदि राकेश जैसा दृढ़ निश्चयी इंसान नही होता तो रैना का स्थानांतरण होना बहुत मुश्किल था । कहते है -" सीधो का भला राम करते है । "इसलिए रैना को कर्मठ राकेश जैसा पति मिल गया । जो उसकी हर मुश्किल को आसान कर देता है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें