रेखा के तीन बेटे है । रेखा लम्बी ,सुन्दर और गोरी ओरतो में आती है । उन्हें देखकर लगता है । भगवान ने उन्हें फुर्सत से बनाया है । उनके तीन बेटे है । तीनो बेटे भी उनकी तरह बहुत सुन्दर है । उन्होंने अपने बड़े बेटे की शादी भी एक रूपवती और पडिलिखी युवती से की । उनका एक पोता हुआ पोते का नाम शैलेश रखा । वह सबकी आँख का तारा था ।
उनकी बहु नौकरी नहीं करती थी उनकी बहुत इच्छा थी कि बहु अच्छी जगह पर नौकरी करने लगे । कुछ गुणों की कमी या लापरवाही उसको सही जगह नौकरी नही मिल सकी ।रेखा खुद सरकारी नौकरी में है । मेने कुछ समय बाद सुना वह अपनी बहु साधना की नौकरी पर इतना जोर इसलिए दे रही है क्योंकि उनका बेटा नरेश लापरवाह है बचपन में उसके सर में चोट लग गयी थी । इस कारण वह जिम्मेदारी वाले काम नही कर सकता । वह छोटी नौकरी करता हे उस नौकरी में आज के समय में घर चलाना बहुत मुश्किल है । इसलिए वे चाहती है कि उनकी बहु की स्थाई नौकरी लग जाए । इसके लिए उन्होंने बहु की नौकरी के लिए हर तरह से कौशिश करती रहती है । बहु ने कई बार सरकारी नौकरी के पेपरों में बैठी पर पास नहीं हुई । इसके आलावा उन्होंने पैसे के बेस पर नौकरी लगवाने की कौशिश की उसमे भी असफल हो गयी । वे आज भी इस प्रयास में लगी रहती है कि किसी तरह उनकी बहु की अच्छी जगह नौकरी लग जाए । इसे किस्मत ही कह लो अभी तक उसे अच्छी नौकरी नही मिली ।
रेखा के पति भी सरकारी नौकरी में रहे है वे अपना जीवन अपने हिसाब से जीते है । उन्होंने रिटायरमेंट से दो साल पहले ही नौकरी छोड़ दी । उनके पास काफी छुटिया बची हुई थी यदि वे चाहते तो बिना परेशानी के भी समय बीता सकते थे । उन्हें नौकरी छोड़ने की जरूरत नही थी । रेखा ने उन्हें काफी समझाने की कौशिश की पर वे नहीं माने । रेखा को उनका नौकरी छोड़ना पसंद नही आया वे अपने पति को नौकरी जारी रखने के लिए राजी नही कर पाई । इस बात का उन्हें बहुत दुःख था । पति की इच्छा के सामने उन्हें सिर झुकाना पड़ा ।
रेखा पर उम्र ने रंग दिखाना शुरू कर दिया था वे अब बीमार रहने लगी थी । उन्हें चलने में भी परेशानी होती थी । इसी बीच उनकी बहु के घर जुड़वाँ बच्चो ने जन्म लिया । इनके घर में दुगनी खुशिया आ गयी । खुशियो के साथ जिम्मेदारी भी दुगनी हो गयी अब उनका शरीर भी उनका साथ नही देता था पर नई जिम्मेदारियों से पीछे हटना मुमकिन नहीं था ।
पति ने जहाँ समय से पहले नौकरी छोड़ दी वही रेखा ने रिटायरमेंट के बाद भी दो साल का एक्सटेनेंशन ले लिया ताकि बेटे के साथ उसके परिवार की जिम्मेदारी उठाने में बेटे की सहायता हो सकेगी । जबकि उनका शरीर अब उनका साथ नही दे रहा था । ये होता है । माँ का त्याग ।
उनकी बहु नौकरी नहीं करती थी उनकी बहुत इच्छा थी कि बहु अच्छी जगह पर नौकरी करने लगे । कुछ गुणों की कमी या लापरवाही उसको सही जगह नौकरी नही मिल सकी ।रेखा खुद सरकारी नौकरी में है । मेने कुछ समय बाद सुना वह अपनी बहु साधना की नौकरी पर इतना जोर इसलिए दे रही है क्योंकि उनका बेटा नरेश लापरवाह है बचपन में उसके सर में चोट लग गयी थी । इस कारण वह जिम्मेदारी वाले काम नही कर सकता । वह छोटी नौकरी करता हे उस नौकरी में आज के समय में घर चलाना बहुत मुश्किल है । इसलिए वे चाहती है कि उनकी बहु की स्थाई नौकरी लग जाए । इसके लिए उन्होंने बहु की नौकरी के लिए हर तरह से कौशिश करती रहती है । बहु ने कई बार सरकारी नौकरी के पेपरों में बैठी पर पास नहीं हुई । इसके आलावा उन्होंने पैसे के बेस पर नौकरी लगवाने की कौशिश की उसमे भी असफल हो गयी । वे आज भी इस प्रयास में लगी रहती है कि किसी तरह उनकी बहु की अच्छी जगह नौकरी लग जाए । इसे किस्मत ही कह लो अभी तक उसे अच्छी नौकरी नही मिली ।
रेखा के पति भी सरकारी नौकरी में रहे है वे अपना जीवन अपने हिसाब से जीते है । उन्होंने रिटायरमेंट से दो साल पहले ही नौकरी छोड़ दी । उनके पास काफी छुटिया बची हुई थी यदि वे चाहते तो बिना परेशानी के भी समय बीता सकते थे । उन्हें नौकरी छोड़ने की जरूरत नही थी । रेखा ने उन्हें काफी समझाने की कौशिश की पर वे नहीं माने । रेखा को उनका नौकरी छोड़ना पसंद नही आया वे अपने पति को नौकरी जारी रखने के लिए राजी नही कर पाई । इस बात का उन्हें बहुत दुःख था । पति की इच्छा के सामने उन्हें सिर झुकाना पड़ा ।
रेखा पर उम्र ने रंग दिखाना शुरू कर दिया था वे अब बीमार रहने लगी थी । उन्हें चलने में भी परेशानी होती थी । इसी बीच उनकी बहु के घर जुड़वाँ बच्चो ने जन्म लिया । इनके घर में दुगनी खुशिया आ गयी । खुशियो के साथ जिम्मेदारी भी दुगनी हो गयी अब उनका शरीर भी उनका साथ नही देता था पर नई जिम्मेदारियों से पीछे हटना मुमकिन नहीं था ।
पति ने जहाँ समय से पहले नौकरी छोड़ दी वही रेखा ने रिटायरमेंट के बाद भी दो साल का एक्सटेनेंशन ले लिया ताकि बेटे के साथ उसके परिवार की जिम्मेदारी उठाने में बेटे की सहायता हो सकेगी । जबकि उनका शरीर अब उनका साथ नही दे रहा था । ये होता है । माँ का त्याग ।
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