dhamki

          शारदा की शादी माँ ने उससे पूछे बिना तय कर दी थी । शारदा शहर में रहने बाली  लड़की थी उसके सपने आम लड़कियों जैसे थे । सुंदर सा मकान ,पढ़ा -लिखा लड़का जो शहर में रहता हो, उसकी अच्छी आमदनी हो । उसके माँ -बाप ने छोटे शहर अलीगढ़ का लड़का उसके लिए पसंद किया । वह लड़का शारदा को बिलकुल पसंद नही आ रहा था । उसने अपनी माँ से कई बार शादी का विरोध किया । उसके अभिभावक उसकी बात सुनने के लिए तैयार नही होते थे । उसके बड़ो ने उससे कहा -" एक बार तुम श्याम से मिल लो । उसके बाद कहना । तुम्हे वह केसा लगा । बिना देखे उसमे नुक्स मत निकालो ।"उन्होंने दोनों को आपस में मिल सके ऐसा इंतजाम करवा दिया ।
       शारदा को पहले तो श्याम का नाम पसंद नही था । उसपर अलीगढ़ जैसी जगह के बारे में सुनकर उसके होश उड़ गए थे उसे लगता था छोटी जगह पर रहने वालो की सोच भी छोटी होती है । उसे परम्पराओ में बंधा हुआ डरा -सहमा जीवन जीना पड़ेगा वह छोटे परिवार में रहने वाली सबकी लाड़ली थी । उसके दिल में अपने परिवार से बिछड़ने का भी डर  था । उसे लग रहा था । इतनी दूर जाकर उसे अपनी परेशानियों का साथी कहा मिलेगा । सारे बंधू उससे दूर हो जाएगें अभी उसकी शादी की उम्र ज्यादा नही थी । उसके परिवार में जल्दी शादी हो जाती थी । इसलिए उसके अभिभावकों को उसकी शादी की जल्दी हो रही थी ।
       श्याम और शारदा परस्पर मिले तो शारदा को श्याम के विचार अच्छे नही लगे । शारदा ने श्याम से पूछा -" आप काम क्या करते हो । " श्याम ने जबाब दिया -" अभी मैने  काम करने के बारे में सोचा नही है ।" शारदा को बहुत हैरानी हुई । उसने ऐसे इंसान की कल्पना नही की थी जो शादी करने जा रहा है । पर नौकरी के बारे में सोच भी नही रहा ।  अभी ऐसी बहुत जगह है जहाँ बेटे की शादी बाप की हैसियत के हिसाब से हो जाती है । शारदा शहर की लड़की थी ।  उसे ये जबाब बड़ा अटपटा लगा । बाकी का वार्तालाप से वह और भी दुखी हो गयी । जब वह घर वापस आई उसने शादी से साफ मना कर दिया । उसने माँ से कहा -"ऐसे लड़के से तुम मेरी शादी करना चाहती हो जो नौकरी करने के बारे में सोचता ही नही है । शादी के बाद मेरा खर्चा कौन उठाएगा । में ऐसे लापरवाह लड़के से शादी नही करूंगी ।" दिल्ली में रहने वाली लड़कियों के लिए ये अचम्भे  की बात है । उसकी माँ उसे रोज मनाती  -"उसके पिता अच्छी नौकरी में है । उनका मकान बहुत बड़ा है । छोटा परिवार है । समाज में उनकी बहुत इज्जत है । परिवार देखा भाला  है । सभी अच्छे लोग हे ऐसा रिश्ता किस्मत वालो को मिलता है ।" इन सब बातो का शारदा पर कोई प्रभाव नही पड  रहा था । शारदा की माँ को ये रिश्ता बहुत पसंद था । वे अनेक तरह से उसे मनाने की कोशिश करती रहती । किसी तरह शारदा इस रिश्ते के लिए राजी हो जाए ।                      शारदा ज्योतिष के हिसाब से मंगली थी । मंगली होने के कारण उसकी कुंडली किसी  लड़के से मिल नही पा  रही थी । वे शारदा के ग्रहो के ऐसे प्रभाव के कारण निराश होते जा रहे थे । शारदा की माँ ने उसकी शादी के लिए पूजा करनी शुरू कर दी ,मनौती मांगी । किसी तरह उनकी बेटी श्याम से शादी के लिए राजी हो जाए । लेकिन शारदा पर उनकी मिन्नत और मनोतियो का कोई असर नही हो रहा था । इस तरह दो साल बीत गए । हर तरह से उसकी माँ ने उसकी खुशामद की । शारदा किसी तरह शादी के लिए तैयार नही हो रही थी । एक दिन उसकी माँ को शारदा पर गुस्सा आ गया उन्होंने कहा -"तू अपने को समझती क्या है । तू बहुत सुंदर है । तेरा बाप बहुत अमीर है । जिससे चाहेगी उससे तेरी शादी हो जाएगी । " शारदा बोली -"में श्याम से शादी नही करूंगी ।" उसकी माँ बोली - "तेरी रिपोर्ट कार्ड उसे दिखा दूंगी तो वो भी शादी करने से मना कर देगा । तू  इतने कम नंबरों से पास हुई  है ।"शारदा की माँ की धमकी काम आ गयी । इसके बाद शारदा ने शादी का विरोध नही किया । 

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