ATMSAMMAN

        रेखा का दूसरे बेटे  महेश की शादी एक सुन्दर और गुनी लड़की ममता से हो गयी हे । ममता दूतावास में काम करती हे उसका एक पैर भारत तो दूसरा पैर विदेश में रहता हे । परिवार बड़ा हो गया हे इसलिए रेखा ने महेश को दूसरा मकान रहने के लिए दे दिया है । दोनों दूसरे मकान में नोकरो के साथ मजे से रहने लगे । ममता को घर की कमी ज्यादा नही खली क्योंकि अभी ससुराल में रहते हुए ज्यादा दिन नही हुए थे ।
         समय उपरांत ममता के पैर भारी हो गए । अब ममता को   सास की जरूरत महसूस होने लगी । ममता ने सास को अपने साथ रहने के लिए कहा । रेखा की मजबूरी थी उसने मना  कर दिया । ममता फ़ोन द्वारा सास से सहायता लेती रहती थी । रेखा छुट्टी के दिन ममता के पास चली जाती थी पर ममता उन्हें रुकने पर जोर देने लगी । ये संभव नही था । कुछ दिन रुक कर रेखा बड़ी बहु के पास वापस आ  जाती थी ।
             ममता के घर एक बेटे का जन्म हुआ । घर खुशियो से भर गया । रेखा ममता के घर रहने आ  गयी । उसने ममता की अच्छी तरह एक महीने तक देखभाल की । एक महीने बाद रेखा ने ममता के घर से ही नौकरी पर आना शुरू कर दिया । विद्यालय से उसका घर बहुत दूर पड़ता था । उसे बहुत थकान हो जाती थी घर जाकर उसमे काम करने की हिम्मत शेष नही रहती थी । उसका कर्तव्य उसे इतना काम करने के लिए प्रेरित करता था । ममता का बच्चा अब सबा महीने का हो गया । रेखा ने कहा -"अब तुम मेरे साथ चलो । मेरे लिए दोनों जगह की जिम्मेदारी सम्भालना मुश्किल हो रहा है । " ममता के लिए दूसरे घर में जाकर रहना मुश्किल लग रहा था । पर वो सास के साथ उनकी मजबूरी समझ कर रहने आ गयी । वहाँ  रहते हुए ममता को तीन महीने हो गए । अब वह अपने घर आ गयी । जब कोई मजबूरी होती वह फ़ोन पर सास से पूछ लेती । इस तरह 6  महीने बीत  गए । ममता को अपनी नौकरी पर जाने का समय आ गया । उसका मन बच्चे को नोकरो के भरोसे छोड़ने का नही हो रहा था । उसकी नौकरी पुरे समय की थी । अब उसकी ममता बच्चे से अलग होने के लिए तैयार नही थी । ममता चाहती थी कोई अपना बच्चे के साथ रहे । ममता ने रेखा से साथ रहने के लिए मिन्नत की ।  पर रेखा अपनी मजबूरी के कारण उसके साथ रहने के लिए तैयार नही हो सकी ।
         ससुराल में कोई भी उसके घर नहीं रह सकता था । उसका झुकब मायके की तरफ हुआ । मायके में भी उसके घर आकर रहने की स्थिति किसी की भी नही थी । लेकिन उसकी माँ ने कहा _ "बच्चे को हमारे पास छोड़ दो हम संभाल लेंगे ।"ममता अपने बच्चे को  सुबह रोज मायके छोड़ कर  नौकरी पर जाने लगी  शाम को वापस आते जुए बच्चे को साथ ले आती  । उसने अपने बच्चे की देखभाल के लिए एक कामवाली लगा दी ताकि किसे को परेशानी न हो । अब ममता संतुष्ट थी उसका बच्चा सही हाथो में पल रहा हे । ममता कामवाली के पैसे खुद देती थी जब रेखा को पता चला उसे बुरा लगा । उसने ममता से कहा "आया पुरे दिन बच्चे की देखभाल के साथ उन लोगो का भी तो काम करती है । तुम उसका वेतन क्यों देती हो उनको देने दो ।" पर ममता इसके लिए तैयार नही हुई । ममता के मायके वालो की हैसियत भी अच्छी थी वे भी ममता को आया का वेतन देने से  मना करते थे । वे कहते हम दे देंगे पर ममता इसके लिए तैयार नही हुई । वो हमेशा कहती - "अपने मुझे पढ़ालिखा के इतना समर्थ बना दिया हे में अपना और बच्चे का खर्च उठा सकती हुँ तब आपका खर्च क्यों करवाऊ ।" वह आया का खर्चा उन्हें नही करने देती थी पर रेखा को आया का वेतन देना बहुत अखरता था । वह ममता के सामने कई बार ये बात ले कर आई पर ममता एक कान  से सुनकर दूसरे कान से उसकी बात निकाल देती । रेखा ममता के इस व्यव्हार से मन ही मन किलसती रहती । ममता को वेतन देने से रोक नही पाती ।
       ममता का आत्मसम्मान उसे पिता का पैसा खर्च करवाने से रोकता था । ये बात  रेखा समझ नहीं पा रही थी । ममता अपने बच्चे को मायके छोड़कर उनकी एहसान मंद थी । वह उनपर पैसो का खर्चा करवाकर अपनी निगाहो में ही गिर जाती । ये बात रेखा समझ नहीं पा रही थी । 

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