haonsla

           नेहा की दास्ताँ सिर्फ कल्पना नहीं हे ये मेरी सहकर्मी रह चुकी है । 25 वर्ष पूर्व वो मेरे जीवन में आई थी । उन्हें देखकर नही लगता था  उन्होंने इतने दुःख अपने जीवन में सहन किये है । वे हंसमुख ,जिंदादिल, तेजतर्रार और व्यवहारिक प्राणी हे । उनके सामने हम बेहद कमजोर साबित होते थे । तब वो मजाक में कहती थी " -इतने से दुखो से डर  जाओगे तो जी ली जिंदगी तुमने ।"जिंदगी हर कदम पर इम्तिहान लेती हे । सुख और दुःख साथ -साथ चलते है । जिंदगी में हमेशा न सुख रहते ना ही दुःख हमेशा रहते । यदि दुःख न हो तो  सुख कैसे पता चलेँगे ।"  
       मेने जब उनके बारे में लिखने का सोचा मै खुद भावुक होती चली गयी ये सोचकर यदि इतना दुःख किसी और के जीवन में आया होता तो उसे कैसा महसूस होता । ऐसे बहुत लोग होते हे जिनका जीवन दुखो की अमित दास्ताँ होती है ।   वे उसमे से भी खुशियो के पल चुरा लेते हे । वे कभी भी थकती नही थी । उन्हें हर मुश्किल का तोड़ मालूम होता था । उन्होंने मेरे भी बहुत से काम करवाये यदि वो मेरे जीवन में न आई होती तो में कभी इतनी सफल ना  होती । मै उनसे काफी छोटी हु वो मुझे छोटी बहन की तरह मानती थी यदि मेरे चेहरे पर चिंता की रेखाएं देखती एकदम कारण पूछकर उसका हल निकाल देती । उन्हें दुःख में डूबा मेने कभी नहीं देखा । उनका दुःख उनकी तन्हाइयो का साथी था । महफ़िल की तो हमेशा रौनक बनी रही । ऐसी कोई जगह नही होती जहाँ उनकी जरूरत महसूस नहीं लोग करते । उनके पास हर परेशानी का हल होता था । उनके शब्द हमेशा मेरे कानो में गूंजते रहते हे -"मुझे कोई इंसान हरा नही सकता लेकिन भगवान का में सामना नही कर सकती ।" उनके जैसे जीवट वाली औरत इसके आलावा मेने कोई और नही देखी । । 
          मेने भगवान को कोसते हुए बहुत से लोगो को देखा है पर उनके ऊपर जितने दुःख आये वो उन्हें तोड़ नही सके बल्कि उनमे नया जोश भर गए । उन्हें देखकर कोई उनकी उम्र का अंदाजा नही लगा सकता ।वो हमेशा जोश से भरपूर रहती हे  । मुझे  कई कामो को करने से डर लगता तो एकदम कहती -"डर मत मै तेरे साथ हु । " उनके ये शब्द मेरे डर को गायब कर देते थे । मेरे जीवन में ऐसे बहुत से लोग आये जिनके जीवन को दुःख की अग्नि जला नही पायी वे और भी निखर कर जमाने के सामने आये । दुखो की तपिश उन्हें जला  नहीं पाई । ऐसे लोग ही वक्त को बदलने की ताकत रखते हे । वे आज भी मेरी मार्गदर्शिका हे आज उनके गुन मेरे अंदर देखे जा सकते हे । उन्हें कोई दुःख तोड़ नही पायेगा । नेहा सभी का संबल बनी हे और बनेगी । आज भी जिस जगह खड़ी हो जाती है लोग उनके मुरीद हो जाते हे । दुःख लोगो को तोड़ता ही नही हे उन्हें लोगो से जोड़ता भी हे उन्हें देखकर लगता हे सारे दुःख उनसे टकरा कर अपने को छोटा महसूस करते हे फिर से दुगने जोश और उससे भी बड़ा दुःख लेकर उनके सामने खड़े हो जाते हे । वो फिर भी हारती नहीं नए जोश से उसका सामना करती है ।
         एक बार मेने उनसे कहा _"आप दुखी और उदास क्यों नहीं रहती । आपका जीवन दुखो से भरा हुआ हे ।" उन्होंने कहा -" भगवान का काम तो हे मुझे दुःख देना ।वो अपनी आदत नहीं बदल रहे । उन्हें तो सारे जहाँ को संभालना हे । मुझे सिर्फ अपने अंदर ताकत पैदा करके खुश रहना हे । यदि में हमेशा मुह लटकाये और उदास रहूंगी तो कौन मेरे पास आयेगा और मुझसे बात करेगा ।"उनकी हंसी का राज जान कर मेने भी अपने दुःख का दिखावा करना बंद कर दिया । सुख हो या दुःख मेँ हर हाल में मस्त रहती हु क्योंकि मेरे दुखी होने से दुःख चले तो नहीं जाएगे। बल्कि बीते हुए दुःख कभी कम नही होंगे । हर इंसान के ऊपर दुःख अलग -अलग असर करता हे । कुछ लोगो के सामने बडे  से बड़ा दुःख भी बेअसर हो जाता हे । नेहा जी वैसी  ही औरत हे जिन्हे दुःख झुका नहीं पाया।  नेहा कहती हे -"भगवान का काम हे मुझे दुःख देना । मै भगवान से सिर्फ हिम्मत मांगती हु की उन दुखो का सामना करने का हौंसला मुझमे पैदा कर दे । उसी हौंसले के कारण ही मै जीवित हु ये भी भगवान का ही आशीर्वाद हे । " में पूरी शक्ति बटोर कर जीवन की मुश्किलो का सामना कर रही हूँ । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...