neha ki sithiti

नेहा और श्याम धीरे -धीरे करुणा के दुःख को भूलने लगे थे । उनकी जिंदगी आराम से कट रही थी । उन्ही दिनों अद्यापको की नौकरी निकली । नेहा बी.ए , बी. एड थी । उसने भाग्य आजमाने के तौर पर नौकरी के लिए आवेदन कर दिया । उसे  घर के पास के विद्यालय में नौकरी मिल गयी इतनी पास  नौकरी की उसे भी उम्मीद नहीं थी । आधे दिन की नौकरी के साथ घर अच्छी तरह से संभल जाता हे । ये सोच कर श्याम ने भी नौकरी करने की इजाजत दे दी थी ।
            पिछले गमो को भूलकर वे अपनी खुशियो से भरी जिंदगी का तहे दिल से स्वागत करने लगे । उन्होंने ऐसी जिंदगी बहुत दिन बाद देखी  थी । अब पड़ोस के लोगो को उनकी खुशियो से जलन होने लगी थी । सभी को लगता दोनों पति -पत्नी दोनों हाथो से धन बटोर रहे है । या चोरो को उनकी सम्पन्नता का पता चल गया था । एक रात  उनके घर में चोर आ गए सभी कीमती चीजे चुरा के ले गए । दिल्ली में आने के बाद सब कुछ उन्होंने अपने प्रयासों से बनाया था । एक ही दिन में सब खत्म हो गया । थोड़े पैसे में उन्होंने घर भी ख़रीदा था वे अब उसमे रहने से भी डरने लगे । उनको लगता ये सब पड़ोसियों के कारण ही  हुआ   हे । आगे भी पड़ोसी चोरी करवा सकते हे । उन्होंने उस मकान को बेचकर   दूसरे इलाके में नया मकान खरीद लिया । अब ये अपनी खुशियो का जिक्र किसी से नहीं करते थे ।
         अब वे अपने गम से उबरने लगे थे । नेहा और श्याम कभी -कभी भगवान का धन्यवाद करते आखिर उन्हें खुशियो का  मुँह दिखा दिया । बेटी नमिता अब कक्षा ८ में और बेटा राहुल कक्षा 2  में आ  गया था । अब नेहा और श्याम आपस में कहते _ " अब हमें भगवान ने सब दे दिया हे ।जिसकी हमे जरूरत थी ।" श्याम को नेहा के स्वास्थ्य को लेकर परेशानी थी । वह पूरी तरह से स्वस्थ नही थी । उसके इलाज के लिए हर तरह के डॉक्टर से मिलते रहते थे । एलोपेथी ,होमेओपेथी ,आयुर्वेदिक सभी से वे इलाज करवा चुके थे पर नेहा की तबियत में सुधार नहीं   आ रहा था श्याम हर समय तनाव में रहते थे कि किसी भी तरह या उपाय से नेहा ठीक हो जाये । जो भी कहता उस उपाय को करने के लिए वे तैयार हो जाते । उन्हें नेहा के स्वास्थ्य के सामने अपना आत्मसम्मान और पोस्ट कोई मायने नहीं लगती थी । वे नेहा से इतना प्यार करते थे  कि  एक बार पड़ोसी ने कहा -"नेहा के ऊपर भूतो का साया हे । " उन्होंने कहा - नेहा को इससे मुक्ति कैसे मिलेगी । पडोसी ने कहा -"मेहँदी पुर बालाजी जाओगे तब नेहा ऊपरी बलाओ से मुक्त हो जाएगी ।" वो इस काम के लिए भी तैयार हो गए । नेहा का मन नहीं मान रहा था । नेहा उन्हें मना करती रह गयी पर श्याम नही माने । वे बालाजी चले गए ।
              नेहा उनका इंतजार करने लगी । उनकी किसी भी तरह खबर नहीं मिल पा रही थी । चौथे दिन उन्हें श्याम के दर्शन हुए । श्याम को रस्सियों से बांध कर लोग ला  रहे थे ।उनके कपड़े फटे हुए थे ' उन्हें देखकर राधा बेहोश हो गयी उसे समझ नहीं आ रहा था । एक स्वस्थ इंसान के साथ ऐसा क्या हो गया जो लोगो को ऐसा करना पड़ गया । लोगो के अनुसार -"इनकी हालत पागलो जैसी हो गयी हे । इन्हे सुध नही हे अपने कपड़े फाड़ देते हे । कही भी भागने लगते हे कुछ भी बोलने लगते हे जो किसी को समझ नहीं आता ।"मेहंदीपुर से किस तरह अपने भाई के घर पहुंचे हे ये अजूबा हे । एक अकेले  इंसान के  वस में नहीं आ  रहे थे चार लोग उन्हें संभाल पा  रहे थे ।
          नेहा की हालत और भी खराब हो गयी सभी लोग श्याम की तीमारदारी में लग गए पर श्याम दो दिन में सभी को रोता विलखता छोड़कर चला गया । नेहा एकदम बूत बन गयी थी उसे कुछ भी समझ नहीं आ  रहा था बालाजी जाकर उन्हें क्या हो गया , या उस पर आयी सारी बलाए अपने उपपर  ले कर चले गए । उसके बाद नेहा का स्वास्थ्य ठीक होता चला गया । श्याम हमेशा कहते थे-" मै तेरी सारी बलाए  अपने उपपर ले लूंगा । मुझसे तेरी तकलीफ देखी नही जाती ।" आज भी नेहा श्यामऔर उसके प्यार को भूल नही पाती  । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...