GUN YA SUNDRTA

            रेखा का तीसरा बेटा सुरेश अच्छी नौकरी करने लगा है । उसके लिए रिश्ते आने लगे है । अब उसे नौकरी करने वाली बहु चाहिये । उन्होंने एक लड़की  देखने   का विचार किया।   सारा   परिवार लड़की वालो के घर पहुंचा । लड़की वालो के द्वारा की गयी आवभगत और उनका घर रेखा को पसंद नही आया । उन्होंने अपनी लड़की जव सामने लाये रेखा का मन और भी ख़राब हो गया क्योंकि रेखा के परिवार  मै सब   गोरे हे है । वह लड़की काली थी । सब रेखा के मन मुताबिक नही था । रेखा को पहले ही ये रिश्ता पसंद नही आ रहा था । लड़की तीन बहने और सबसे छोटा एक भाई हे । उसके पिता की आमदनी भी बहुत कम है । लड़की के परिवार की हेंसियत रेखा के परिवार से नीची थी । रेखा पहले ही उस रिश्ते को देखने के लिए तैयार नही थी । पर परिवार के जोर देने के  कारण उन्हें यहाँ आना पड़ा हे  ।
            रेखा ने लड़की वालो के घर कुछ कहना ठीक नहीं समझा । अपने घर में आकर  सबके सामने रेखा ने मना कर दिया । मुझे लड़की बिलकुल पसंद नही हे । बाकि परिवार को भी पसंद नही थी । सारा परिवार एक मत से राजी था । यहाँ शादी नही करनी । लेकिन  बेटा  सुरेश उनके फैसले से असहमत था । उसे सुनीता में कोई कमी नजर नही  आ रही थी । रेखा और उसके परिवार ने उसके काले रंग की दुहाई दी पर सुरेश को उसके काले रंग से कोई एतराज नही था । जितने असहमति के कारण बताये सुरेश को कोई भी कारण वाजिव नही लगा । सुरेश ने कहा - " इतना कमाने वाली लड़की आज के जमाने में कहाँ  मिलती है । " सुनीता की सारी  कमियों पर उसकी नौकरी ने पर्दा डाल दिया । ऐसे वक़्त के लिए कहा  गया है -"मियां बीबी राजी तो क्या करेगा काजी ।"
         सुरेश और सुनीता की शादी रेखा की सोच से काफी हलकी थी । लेकिन वहाँ  रेखा की कौन सुनता । इसलिए रेखा मन मसोस कर चुप रह गयी । रेखा के बेटे और बहु की नौकरी गुड़गांव में थी । उन्हें दिल्ली से गुड़गांव जाने में काफी समय लग जाता था । रेखा को इतनी देर से बहु -बेटे का घर आना पसंद नही आ  रहा था । रेखा की परेशानी को दूर करने के लिये  सुरेश ने दफ्तर बाइक से जाना शुरू कर दिया । अब रेखा को उनके इतनी दूर से बाइक पर आने के कारण डर लगने लगा।  नौकरी की  थकान के कारण अनहोनी की चिंता सताने लगी । उन्होंने पति से इस बारे में सलाह मांगी । उनके पति भी दुरी को लेकर चिंतित थे । रेखा ने सुरेश के लिए गुड़गांव में मकान ढूंढ़ना शुरू कर दिया । उन्हें एक अच्छा मकान पसंद आ  गया । उन्होंने सुरेश को गुड़गांव में मकान खरीद कर दे दिया । अब उनके दिमाग से सुरेश और सुनीता की चिंता खत्म हो गयी थी । सुरेश की गृहस्थी भी सही तरह से चलने लगी । सुनीता नौकरी के साथ घर के कामो में भी सुघड़ थी । उसके काले रंग को सुनीता के गुणों ने छुपा दिया । अब किसी को उसका का ला रंग बुरा नही लगता था । सभी उसके गुणों से अभिभूत थे । 

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