रेखा बहुत खुश रहने लगी थी उसके तीनो बेटे व्यवस्थित हो गए थे । उसके तीसरे बेटे सुरेश के घर में नई रौशनी की किरण दिखाई देने लगी थी । रेखा अपने परिवार के विस्तार को देखकर खुश थी । समय के साथ खुशिया बढ़ती जा रही थी । बहु का पूरा समय चल रहा था । उन्ही दिनों सुरेश अपनी बाइक से घर आ रहा था । उसकी बाइक की कार से टककर हो गयी । बाइक को काफी नुकसान पहुंचा । सुरेश की टांग टूट गयी उसे तीन महीनो के लिए प्लास्टर चढ़ गया ।
सुनीता का पूरा समय चल रहा था । सुनीता ने दफ़्तर से छूट्टी ले ली थी । रेखा अपने बेटे के पास चली गयी । उन दोनों को रेखा की बहुत ज्यादा जरूरत महसूस हो रही थी । उनकी बहु सुनीता के घर बेटी ने जन्म लिया । रेखा को एक बेटी की चाहत थी । उसके घर बेटी ने दर्शन नही दिए ।सारे जीवन उसे लड़कियों के कपड़े खरीदने की बहुत इच्छा होती थी उसके तीन बेटे थे । उसकी बहन के घर एक बेटा था ।दोनों बहनो को बेटी की बहुत इच्छा थी उनकी बेटी के रूप में तो इच्छा पूरी नहीं हुई । अब वह पोती के रूप में अपने सपनो को पूरा करने के बारे में सोचती थी । किसी एक बेटे के घर तो बेटी होगी वो सुहाना दिन आज आया था । चार पोतो के बाद उनके घर नन्ही सी परी ने जन्म लिया । सबके चेहरे पर रौनक आ गयी । छोटे -छोटे परिवारो में बेटा - बेटी दोनों मुश्किल से मिल पाते हे । यदि दो या तीन परिवारो में भी इच्छा पूरी हो जाए ये भी बहुत बड़ी बात है ।
आमतौर पर जितनी ख़ुशी बेटे के पैदा होने पर मनाई जाती हे । उससे ज्यादा ख़ुशी उनके घर बेटी होने पर मनाई जा रही थी । दादा -दादी के लिए पोती अलग महत्ब रखती थी । उन्होंने बेटी का बरसो इंतजार किया था । आप कहोगे लडकिया तो आस - पास बहुत होती हे पर अपनी बेटी को लेकर जो हम सपने देखते हे वह बिलकुल अलग होते हे उनका साकार होना अलग मायने रखता हे वो खुशदिन आज आया था । चाचा -चाची उसे देखकर नही थकते थे । ताऊजी -ताईजी उस छुटकी के लिए उसके पैदा होने के साथ ही नए सपने सजाने लगे थे । उसका नाम सौम्या रखा गया । उसके चारो भाई सौम्या को गॉद में उठाने के लिए खुशामत करते रहते थे ।" बस एक बार हमे गोद में लेने दो हम उसे तंग नही करेंगे प्यार से उठाएंगे ।" सब अपनी बारी का इंतजार सब्र से करते रहते । उनकी सारी शरारत खत्म हो जाती वे सब आज्ञाकारी बच्चे बन जाते । सौम्या बच्चा कम खिलौना ज्यादा बन गयी थी । जैसे प्रसाद भले ही थोड़ा मिले सबको उसकी चाहत होती हे वैसे ही सौम्या सबको प्रसाद की तरह मिलती थी ।
ऐसी किस्मत कितनी लड़कियों की होती हे । जिसे हर कोई प्यार करना चाहे । सौम्या के लिए कपड़ो और खिलोनो के ढेर लग गए । जब से सौम्या दुनिया में आई सबने उसके लिए सामान खरीदने शुरू कर दिये । बाजार में लड़को के कपड़ो में इतना अंतर नही होता । लड़कियों के कपड़े अलग-अलग रंग ,अलग-अलग मनमोहक डिजायनों के मिलते हे यदि खरीदने की जरूरत ना हो तब भी देखना बहुत अच्छा लगता हे । रेखा के मन में बेटी की बहुत इच्छा थी इसलिए उसने बचपन में सुरेश के लिए दो फ्राक खरीद रखी थी । वह बचपन में सुरेश को ही फ्राक पहना कर अपना शोक पूरा करती थी । अब बरसो बाद उसकी बलबती इच्छा पूरी हुई । सुरेश का प्लास्टर भी उत्तर चूका था । उसकी दुर्घटना का दुःख सब सौम्या को देखकर भूल गए थे । सुरेश अब नौकरी पर जाने लगा था । सबने सोचा सौम्या के पैदा होने का जशन उसके सवा महीने की होने पर मनाया जाएगा । तब तक सुनीता भी काम करने लायक हो जाएगी । सब अपने -अपने सपने को पूरा करने में लगे हुए थे ।
सुनीता का पूरा समय चल रहा था । सुनीता ने दफ़्तर से छूट्टी ले ली थी । रेखा अपने बेटे के पास चली गयी । उन दोनों को रेखा की बहुत ज्यादा जरूरत महसूस हो रही थी । उनकी बहु सुनीता के घर बेटी ने जन्म लिया । रेखा को एक बेटी की चाहत थी । उसके घर बेटी ने दर्शन नही दिए ।सारे जीवन उसे लड़कियों के कपड़े खरीदने की बहुत इच्छा होती थी उसके तीन बेटे थे । उसकी बहन के घर एक बेटा था ।दोनों बहनो को बेटी की बहुत इच्छा थी उनकी बेटी के रूप में तो इच्छा पूरी नहीं हुई । अब वह पोती के रूप में अपने सपनो को पूरा करने के बारे में सोचती थी । किसी एक बेटे के घर तो बेटी होगी वो सुहाना दिन आज आया था । चार पोतो के बाद उनके घर नन्ही सी परी ने जन्म लिया । सबके चेहरे पर रौनक आ गयी । छोटे -छोटे परिवारो में बेटा - बेटी दोनों मुश्किल से मिल पाते हे । यदि दो या तीन परिवारो में भी इच्छा पूरी हो जाए ये भी बहुत बड़ी बात है ।
आमतौर पर जितनी ख़ुशी बेटे के पैदा होने पर मनाई जाती हे । उससे ज्यादा ख़ुशी उनके घर बेटी होने पर मनाई जा रही थी । दादा -दादी के लिए पोती अलग महत्ब रखती थी । उन्होंने बेटी का बरसो इंतजार किया था । आप कहोगे लडकिया तो आस - पास बहुत होती हे पर अपनी बेटी को लेकर जो हम सपने देखते हे वह बिलकुल अलग होते हे उनका साकार होना अलग मायने रखता हे वो खुशदिन आज आया था । चाचा -चाची उसे देखकर नही थकते थे । ताऊजी -ताईजी उस छुटकी के लिए उसके पैदा होने के साथ ही नए सपने सजाने लगे थे । उसका नाम सौम्या रखा गया । उसके चारो भाई सौम्या को गॉद में उठाने के लिए खुशामत करते रहते थे ।" बस एक बार हमे गोद में लेने दो हम उसे तंग नही करेंगे प्यार से उठाएंगे ।" सब अपनी बारी का इंतजार सब्र से करते रहते । उनकी सारी शरारत खत्म हो जाती वे सब आज्ञाकारी बच्चे बन जाते । सौम्या बच्चा कम खिलौना ज्यादा बन गयी थी । जैसे प्रसाद भले ही थोड़ा मिले सबको उसकी चाहत होती हे वैसे ही सौम्या सबको प्रसाद की तरह मिलती थी ।
ऐसी किस्मत कितनी लड़कियों की होती हे । जिसे हर कोई प्यार करना चाहे । सौम्या के लिए कपड़ो और खिलोनो के ढेर लग गए । जब से सौम्या दुनिया में आई सबने उसके लिए सामान खरीदने शुरू कर दिये । बाजार में लड़को के कपड़ो में इतना अंतर नही होता । लड़कियों के कपड़े अलग-अलग रंग ,अलग-अलग मनमोहक डिजायनों के मिलते हे यदि खरीदने की जरूरत ना हो तब भी देखना बहुत अच्छा लगता हे । रेखा के मन में बेटी की बहुत इच्छा थी इसलिए उसने बचपन में सुरेश के लिए दो फ्राक खरीद रखी थी । वह बचपन में सुरेश को ही फ्राक पहना कर अपना शोक पूरा करती थी । अब बरसो बाद उसकी बलबती इच्छा पूरी हुई । सुरेश का प्लास्टर भी उत्तर चूका था । उसकी दुर्घटना का दुःख सब सौम्या को देखकर भूल गए थे । सुरेश अब नौकरी पर जाने लगा था । सबने सोचा सौम्या के पैदा होने का जशन उसके सवा महीने की होने पर मनाया जाएगा । तब तक सुनीता भी काम करने लायक हो जाएगी । सब अपने -अपने सपने को पूरा करने में लगे हुए थे ।
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