asmanjas

नेहा और श्याम  एक और बच्चे के बारे में सोचने लगे । उन्हें बेटे की चाह सत्ता रही थी । उनके जीवन में फिर से बाहर आ गयी । उनके घर एक नन्हा सा बेटा  आ गया । अब बे दोनों फुले नही समां रहे थे । उनका घर बच्चो से गुलजार था । हर तरफ बच्चो की किलकारियाँ गूंज रही थी । दोनों आनंद में डूबे रहते थे । इतने बरसो की चाहत अब पूरी हुई थी ।
             कुछ ही समय गुजरा था कि विपदा ने उन्हें फिर से घेर लिया । श्याम के पेट में बहुत दर्द रहने लगा । वो दर्द को बर्दास्त नहीं कर पाते थे नेहा से उनकी पीड़ा देखी  नही जाती थी । उन्होंने डॉक्टर को दिखाया उनके अनुसार श्याम को अपेंडिक्स का दर्द था । उसका इलाज सिर्फ़ ऑपरेशन था । ऑपरेशन करवाने की हिम्मत जुटाना बहुत मुश्किल हो रहा था क्योंकि नेहा की उम्र भी अभी बहुत कम थी । तीन छोटे -छोटे बच्चो की जिम्मेदारी के  साथ अस्पताल के चककर लगाना नेहा के बस की बात नहीं थी । उन्होंने एक दूसरे से विचार-विमर्श किया तब श्याम ने कहा थोड़े और बच्चे बड़े हो जाये तब देखा जायेगा । धीरे -धीरे समय गुजरने लगा पर श्याम का दर्द कम होने की जगह बढ़ता ही जा रहा था । जब दर्द सहने की ताकत खत्म होने लगी तब उन्होंने ऑपरेशन करवाने का  सोचा । उन्होंने श्याम के घरवालो को बुलाया । वे सब उनके घर आकर रहने लगे तब श्याम ने डॉक्टर के पास जाकर ऑपरेशन करवा लिया। 
             नेहा  दिन -रात श्याम के साथ अस्पताल में ही रहती थी उसे श्याम के सिवा कुछ सूझ नहीं रहा था । उसके दिमाग में सिर्फ श्याम की बीमारी के आलावा कुछ नहीं था ।  नेहा चाहती थी श्याम जल्दी से जल्दी ठीक होकर घर आ जाए । पर उन्हें १० दिन तक डॉक्टर ने अपनी देखभाल में रखा । इस बीच उनकी दूसरी बेटी करुणा बीमार पड़  गयी । उन्होंने उसकी बीमारी पर ज्यादा ध्यान नही दिया । नेहा को लग रहा था कि  बड़े करुणा को संभाल लेंगे । करुणा को बुखार हो गया था । बुखार का इलाज ४ दिन चला । पांचवे दिन करुणा उन्हें छोड़कर जा चुकी थी । एक तरफ पति की देखभाल दूसरी तरफ करुणा की मौत का गम , इसी बीच श्याम उनसे   बेटी करुणा के बारे में पूछते नेहा झूठ बोल देती" सब ठीक हे ।" एक तरफ बीमार पति दूसरी तरफ करुणा का दुःख नेहा के लिए स्वयं को सम्भालना कठिन हो रहा था । 
          करुणा उनके सब बच्चो में सबसे सुन्दर थी । वो श्याम की लाड़ली थी दोनों करुणा को सबसे ज्यादा प्यार करते थे । श्याम जब भी नेहा से पूछते करुणा के बारे में ही पूछते । नेहा की आखो में आंसू आने को होते वो मुश्किल से अपनी भावनाओ पर नियंत्रण रख पाती और  कहती -"चिंता मत करो सब ठीक है ।" इस तरह १० दिन बीत  गए । 
          श्याम से बच्चो की जुदाई बर्दाश्त नहीं हो रही थी । उन्होंने घर  आते हे सबसे पहले बच्चो को अपने पास बुलाया । बच्चो के बीच करुणा को ना  पाकर  बोले - " करुणा को मेरे पास लाओ । "नेहा की आँखों में रुका सैलाव वह निकला । श्याम को कुछ भी समझ नही आ रहा था नेहा इतनी जोर से क्यों रो रही है । उन्होंने व्यग्र होकर पूछा -" क्या हुआ । तुम क्यों रो रही हो । " कुछ देर में नेहा की भावनाओ का तूफान रुका तब नेहा ने बताया -"करुणा भी उन्हें छोड़कर चली गयी । 'यह सुनकर श्याम भी असहज हो गए वो आदमी होकर रो नहीं सकते थे । लेकिन उनकी पीड़ा उनको देखकर समझी जा सकती थी । 
            उन दोनों को बच्चो को लेकर सोचा हुआ डर हमेशा सच हो जाता था । वो डर के कारण अपने बच्चो के लिए कोई नई चीज नही लाते  थे । उन्होंने ५ साल की उम्र तक बच्चो को दुसरो के दिए हुए   कपड़े  ही पहनाये । शायद इस टोटके से ही उनके बच्चे जीवित रह सके । भगवान  उनकी बार -बार परीक्षा ले रहा था । नामालूम वो अपनी इस तरह की परीक्षा से कब तक जूझते रहेंगे । 

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