gaddi

                रैना का मन बहुत अच्छा था वह सभी की भलाई के बारे में सोचती थी पर हमेशा सभी का भला  करना  आसान नहीं होता । ऐसे ही एक साथी ने उससे एक १० की गड्डी  पति के द्वारा मंगवाने  लिए कहा । रैना  के पति ने 2 गड्डी 10 के  नोटों की घर  में लाकर  रख दी । उन दिनों शादी के दिन चल रहे थे । उसी दिन पडोसी को गद्दी की जरूरत पड़ी । रैना के पति ने एक गद्दी पडोसी की जरूरत समझते हुए उस पडोसी को दे दी । दूसरी गड्डी  अभी घर में बची हुई थी । रैना को संतोष था एक गड्डी की उसे जरूरत हे वो तो अभी घर में है । उसकी जरूरत पूरी हो जाएगी । ये सोचकर वो संतुष्ट थी ।
          अगले दिन जब रैना विद्यालय पहुंची एक सहेली सीमा ने अपने रिश्तेदार के घर भात  ले जाने की बात उसे बताई । उसे लोगो को देने के लिए साथ में10 की गद्दी की जरूरत  थी उन दिनों 10 की गड्डी बाजार में आसानी से नही मिलती थी ।शादी आदि समारोह में सगन के रूप में देने  के लिए 10 की गद्दी की   जरूरत पड़ती थी । ऐसे में सभी ऐसे लोगो से अपनी परेशानी के बारे में बताते थे ।जिनके जानने वाले बैंक में काम करते थे  उनके द्वारा ही सभी की समस्या का  हल निकल सकता था ।उसने   भी रैना के सामने यही सोच  कर अपनी समस्या रखी थी । उसने उससे प्रार्थना की किसी तरह मेरे लिए एक गड्डी का इंतजाम करवा दो । रैना पर वो दबाब बनाये जा रही थी । रैना उसके शब्दों के जाल  में फंस गयी उसके मुह से निकल गया -"एक गड्डी मेरे पास अभी है । पर वह गड्डी  मीना  के लिए लाई हूँ । वह कई दिनों से मुझ से मांग रही थी ।  तुम्हारे  लिए इनसे कहकर मंगा दूंगी ।" ये सुनते ही सीमा ने उससे जबरदस्ती  गड्डी ले ली उसके हाथ में  एक हजार रूपये रख दिए । रैना ने इस बात की कल्पना भी नही की थी । वह हक्की-बक्की रह गयी उसे समझ ही नही आ रहा था । इस हालत को कैसे बदले । सीमा ने रैना के सामने अपनी मज़बूरी इस तरह बयान की रैना को चुप होना पड़ा ।
         उस  दिन दोनों का सामना एक दूसरे से अभी नहीं हुआ था । मीना को किसी और के दवारा पता चला की रैना उसके लिए गड्डी  लाई थी पर सीमा ने उससे गड्डी  ले ली है । ये सुनते ही मीना आपे से बाहर हो गयी जोर -जोर से रोने लगी-" उसे कल ही शादी में जाना हे । उसने पति को पूरा भरोसा दिलाया था की आज में गड्डी जरूर ला  दूंगी । अब उन्हें कैसे यकींन  दिलाऊ मेने गड्डी लाने की पूरी कोशिश की थी । वो मेरे ऊपर कभी भरोसा नही करेंगे । "मीना  के आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे । कोई  भी उसकी मुसीबत का हल नही निकाल सकती थी ।
          दूसरी तरफ रैना घबरा रही थी।  मीना का सामना करने की रैना में हिम्मत नही हो रही थी । मीना कई दिनों से उसकी खुशामद कर रही थी रैना ने उसे पूरा भरोसा दिलाया था । एन मौके  पर सब उल्टा हो गया दोनों ही दुखी थी । दोनों को इस समस्या का हल सुझाई नही दे रहा था। रैना  के अंदर मीना  का सामना करने की हिम्मत नही थी । वो घबरा कर आधे दिन की छुट्टी लेकर घर चली गयी । इस समस्या का हल उसने छुट्टी लेकर किया । जो हमें आज तक समझ नही  आया  । 
      

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