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नेहा अपने शहर में दुबारा से जीवन की जद्दोजहद में लग गयी । नेहा के पति डॉक्टर होने के कारण उसे भी नर्सिंग की पढ़ाई करने के लिए जोर देने लगे । उनके अनुसार दोनों एक व्यवसाय में रहेंगे तो साथ रहने का मौका ज्यादा मिलेगा । नेहा ने पति स्याम की इच्छा को पूरा करने के लिए नर्सिंग की पढ़ाई  शुरू कर दी कुछ समय में नेहा की पढ़ाई  पूरी हो गयी । उन दोनों ने मिलकर एक क्लिनिक खोला उसमे दोनों काम करने लगे । उनका जीवन सुचारू रूप से चलने लगा ।
           अब नेहा ने अपना परिवार बढ़ाने के बारे में सोचा । उनके परिवार में पहले  बच्चे के  समय कुछ दिक्क़ते पैदा हो गयी।  डॉक्टर  के अनुसार - " हम माँ या बच्चे में से किसी एक को ही बचा पाएंगे ।" उनके पति को जब कागजो पर दस्तखत करने पडे  तो उनके  मन की आप कल्पना कर सकते हो । उन्हें कितनी तकलीफ हो रही होती थी । उनका पहला बच्चा संसार में आ गया उन्हें उसके जीवित बचने की बहुत ख़ुशी हो रही थी । उनका घर खुशियो से भर गया । वो पुराने सारे गम भूल कर उसका पालन पोषण करने लगे लेकिन भगवान से उनकी खुशिया देखी  नही गयी वह बच्चा केवल दो महीने ही जीवित रहा । कुछ ही समय में सारे  सुख देकर दुनिया से चला गया । उनकी दुनिया वीरानी ओर बेरौनक हो गयी ।इस बच्चे के कारण नेहा के शरीर में परेशानिया पैदा हो गयी थी । जिनका इलाज नहीं हो पा रहा था । एक तरफ बच्चे का दुःख ,दूसरी और अपने शरीर की परेशानिया उसके दुखो को बढ़ाती  जा रही थी ।
           धीरे-धीरे नेहा और उसके पति दुःख से बाहर आये । उन्होंने दूसरे बच्चे के बारे में सोचा फिर उनके जीवन में खुशियो की झलक दिखाई दी ।फिर वही विडंबना डॉक्टर ने फिर कागजो  पर दस्तखत करवाये -"माँ बचेगी या बच्चा "। उनके घर एक बेटे ने जन्म लिया ।  अब वे दोनों बच्चे की परवरिश के प्रति काफी सतर्क थे उन्होंने अपनी माँ को बुलवा लिया था अब कोई लापरवाही नहीं होने देंगे । उनकी आँखों का तारा  उनकी आँखों के सामने बड़ा होने लगा । भगवान से फिर उनकी खुशिया ना  देखी  गयी ये बच्चा ६ मास का हो कर चला गया । उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि  भगवान उन्हें किस गलती की सजा इस रूप में दे रहा हे हर बार  बच्चा जीवित पैदा होता हेफिर  कुछ समय में उनके जीवन से चला जाता हे । अब वे लोग अपने दुःख को भूलने के लिए पूजा -पाठ में लगे रहने लगे । साधारण इंसान के बच्चे की परवरिश में गलती हो सकती हे पर माँ-पिता दोनों डॉक्टरी की पढ़ाई  कर चुके है । बड़ो का साथ भी रहा पर बच्चा अब भी जीवित नहीं रहा । उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि उनके साथ ऐसा क्यों हो रहा हे ।
                   भगवान जितना उनसे बच्चे छीनते  जा रहे थे उतनी ही उनके जीवन में बच्चे की इच्छा बड़ती  जा रही थी । उनके जीवन में उम्मीदों की रोशनी दिखायी दी । अब उनके जीवन में उत्साह नहीं था बल्कि डर लग रहा था कि अब क्या होगा उनकी उम्मीदे पूरी होंगी या फिर रौशनी की किरण धुंधला जाएगी । फिर वही डॉक्टर की लिखापड़त के बाद एक बच्ची ने जन्म लिया । ये लड़की ठीक-ठाक  रही इसके बाद एक और बच्ची ने जन्म लिया ।  अब वे दोनों बेटियो के साथ खुश थे उनके जीवन की खुशिया जैसे वापस लोट आयी थी अब वे दोनों बेटियो के साथ जिंदगी के मजे ले रहे थे ।
                      

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