रैना मन की बहुत अच्छी थी । उससे किसी का दुःख नही देखा जाता था । वह सभी को खुश देखना चाहती थी । हमारे यहाँ एक नैना नामक औरत को उसके ससुराल वाले बच्चो के लिए बहुत सुनाते थे । उसकी एक बेटी हो चुकी थी । बेटा नही हुआ था । उन्हें इस बात का संतोष नही था कि जिसकी बेटी शादी के एक साल के बाद हो सकती है । उसका बेटा भी हो सकता है । ससुराल वालो को इस बात का सब्र नही था । उसे अनेक तरह से प्रताड़ित किया जाता था । जिसके बारे में वह नैना के सामने अपना दर्द व्यान करती थी । रैना को उससे हमदर्दी थी । नैना की बेटी पालने में उसकी कोई मदद भी नही करता था । उसके लिए बेटी की परवरिश करना ,अपनी पढ़ाई पूरी करना ,और नौकरी करना बहुत कठिन था । इसलिए वह अपने सपनो को पूरा करने के लिए दूसरे बच्चे को बुलाने से झिझक रही थी । सारी जिम्मेदारी उसके अकेले के बस की नही थी । उसके सुझाब पर उसने दूसरी बार माँ बनने का विचार किया । किस्मत ने कुछ और ही सोच रखा था ।
नैना के घर दूसरी बार फिर बेटी ने जन्म लिया । बेटी के पैदा होने पर माँ को दुःख हुआ लेकिन किस्मत को कौन बदल सकता है । नैना ने अपनी किस्मत से समझोता कर लिया । भगवान से कौन लड़ सकता है । इसमें भी भगवान की मर्जी है । जो भी नैना के पास आता दुःख भरे शब्द बोल के चला जाता । नैना को बेटी पैदा होने पर जो दुखभरे शब्द सुनने को मिलते वह उसे अच्छे नही लगते थे बेटी पैदा हो गयी है ।अपनी बेटी को पालना है उसे हंस के पाले या दुखी होकर पाले । ये सोचकर नैना तटस्थ होकर उसका पालन पोषण करने लगी नैना तीन महीने बच्ची की परवरिश के लिए घर रही। वह अच्छे शब्द सुनने के लिए तरस गयी थी उसे बेटी के पैदा होने का जितना दुःख था उससे ज्यादा लोग उसे सुना जाते । नैना समझ नही पाती थी जब इस लड़की को पालना हमे है सारी जिम्मेदारी हमे निभानी है । तो सारे लोग इतने दुखदायी शब्द क्यों बोल रहे है । पर हमारे समाज में बेटी पैदा करने वाली औरत से सारे अधिकार छीन लिए जाते है । उसे सिर्फ सुनने का ही अधिकार होता है प्रतिवाद करने का अधिकार नही होता है । ऐसा ही नैना के साथ हुआ समाज के शब्द सुनकर वो भी हँसना भूल गयी । अब उसे अच्छे और सामान्य शब्दों की जरूरत थी किसी की दिलासा की भी जरूरत नही थी । नैना का पालन -पोषण ऐसे माहौल में नही हुआ था । जहाँ औरतो को दुत्कारा जाता था । या उनको इज्जत नही दी जाती थी । उसने औरतो को अपमानित होते हुए शादी के बाद ही देखा था । नैना एक साहसी औरत थी । दूसरी बेटी की माँ बनना उसके लिए जीवन का एक हिस्सा था । उसके लिए नैना ने अपने आपको तैयार कर लिया था ।
तीन महीने की छूटी के बाद नैना दुबारा से नौकरी में आयी । विद्यालय का माहौल एक दम बदला हुआ था । जो भी नैना से मिलता हंस के बात करता और बेटी की मुबारक बाद देता । तीन महीने में घर में रहते हुए नैना हंसना भूल चुकी थी । वह लोगो का हंसी में साथ देने के लिए नकली हंसी हँसते -हँसते कब अपना दुःख भूल गयी उसे पता ही नही चला । वो दुवारा खुश रहने लगी । नेना सामान्य जीवन जीने की और अग्रसर होने लगी । नेना फिर से खिलखिलाकर हंसने लगी । उसे देखकर लगता था बेटी की माँ बेटी के पैदा होने पर इतनी दुखी नही होती । जितना उसे समाज के सामने दुखी होने का दिखावा करना पड़ता है ।
जब नैना छुट्टियों पर चल रही थी । उस समय में रैना ने सभी से वादा लिया था । नैना के सामने कोई भी दुखभरे शब्द नही बोलेगा ,सभी उसे मुबारक बाद देंगे । उसे भी सामान्य जिंदगी जीने का अधिकर है । उसकी ये बात सबके मन को छू गयी इसलिए हर इंसान नैना से हंस के मिल रहा था ।
हमारा सामाजिक ढांचा ऐसा है कि दूसरी बेटी की माँ अगर हंसना भी चाहे उसे माँ का घमंड समझा जाता है । ऐसे में रैना जैसी ओरते ही समाज को बदल सकती है । जब माँ समाज को बदलने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रही है । वह अपनी किस्मत बदल सकती है । तो ऐसी औरत की बेटी क्या मुश्किलो का सामना नहीं कर पायेगी । कहते हे _" पड़ी लिखी माँ का परिवार भी पड़ा लिखा होता हे । ऐसी माँ की बेटी भी अपनी भाग्य विधाता बन सकती है । उसे नकारो मत । "
नैना के घर दूसरी बार फिर बेटी ने जन्म लिया । बेटी के पैदा होने पर माँ को दुःख हुआ लेकिन किस्मत को कौन बदल सकता है । नैना ने अपनी किस्मत से समझोता कर लिया । भगवान से कौन लड़ सकता है । इसमें भी भगवान की मर्जी है । जो भी नैना के पास आता दुःख भरे शब्द बोल के चला जाता । नैना को बेटी पैदा होने पर जो दुखभरे शब्द सुनने को मिलते वह उसे अच्छे नही लगते थे बेटी पैदा हो गयी है ।अपनी बेटी को पालना है उसे हंस के पाले या दुखी होकर पाले । ये सोचकर नैना तटस्थ होकर उसका पालन पोषण करने लगी नैना तीन महीने बच्ची की परवरिश के लिए घर रही। वह अच्छे शब्द सुनने के लिए तरस गयी थी उसे बेटी के पैदा होने का जितना दुःख था उससे ज्यादा लोग उसे सुना जाते । नैना समझ नही पाती थी जब इस लड़की को पालना हमे है सारी जिम्मेदारी हमे निभानी है । तो सारे लोग इतने दुखदायी शब्द क्यों बोल रहे है । पर हमारे समाज में बेटी पैदा करने वाली औरत से सारे अधिकार छीन लिए जाते है । उसे सिर्फ सुनने का ही अधिकार होता है प्रतिवाद करने का अधिकार नही होता है । ऐसा ही नैना के साथ हुआ समाज के शब्द सुनकर वो भी हँसना भूल गयी । अब उसे अच्छे और सामान्य शब्दों की जरूरत थी किसी की दिलासा की भी जरूरत नही थी । नैना का पालन -पोषण ऐसे माहौल में नही हुआ था । जहाँ औरतो को दुत्कारा जाता था । या उनको इज्जत नही दी जाती थी । उसने औरतो को अपमानित होते हुए शादी के बाद ही देखा था । नैना एक साहसी औरत थी । दूसरी बेटी की माँ बनना उसके लिए जीवन का एक हिस्सा था । उसके लिए नैना ने अपने आपको तैयार कर लिया था ।
तीन महीने की छूटी के बाद नैना दुबारा से नौकरी में आयी । विद्यालय का माहौल एक दम बदला हुआ था । जो भी नैना से मिलता हंस के बात करता और बेटी की मुबारक बाद देता । तीन महीने में घर में रहते हुए नैना हंसना भूल चुकी थी । वह लोगो का हंसी में साथ देने के लिए नकली हंसी हँसते -हँसते कब अपना दुःख भूल गयी उसे पता ही नही चला । वो दुवारा खुश रहने लगी । नेना सामान्य जीवन जीने की और अग्रसर होने लगी । नेना फिर से खिलखिलाकर हंसने लगी । उसे देखकर लगता था बेटी की माँ बेटी के पैदा होने पर इतनी दुखी नही होती । जितना उसे समाज के सामने दुखी होने का दिखावा करना पड़ता है ।
जब नैना छुट्टियों पर चल रही थी । उस समय में रैना ने सभी से वादा लिया था । नैना के सामने कोई भी दुखभरे शब्द नही बोलेगा ,सभी उसे मुबारक बाद देंगे । उसे भी सामान्य जिंदगी जीने का अधिकर है । उसकी ये बात सबके मन को छू गयी इसलिए हर इंसान नैना से हंस के मिल रहा था ।
हमारा सामाजिक ढांचा ऐसा है कि दूसरी बेटी की माँ अगर हंसना भी चाहे उसे माँ का घमंड समझा जाता है । ऐसे में रैना जैसी ओरते ही समाज को बदल सकती है । जब माँ समाज को बदलने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रही है । वह अपनी किस्मत बदल सकती है । तो ऐसी औरत की बेटी क्या मुश्किलो का सामना नहीं कर पायेगी । कहते हे _" पड़ी लिखी माँ का परिवार भी पड़ा लिखा होता हे । ऐसी माँ की बेटी भी अपनी भाग्य विधाता बन सकती है । उसे नकारो मत । "
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें