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नेहा बड़ी ही गंभीर और तेज तरार ओरतो में आती  थी । उसका व्यक्तित्व प्रभावशाली था ।  हर इंसान को अपने बस में करने का हुनर उनमे था । बचपन से ही हर कोई उससे प्रभावित हो जाता था । वो बोलने में बहुत चतुर थी । सामने वाले के मन में उत्तर कर उसकी बात जान लेना उनके लिए मुशकिल  नहीं था । वो जिससे भी जो करने के लिए कहती वो बिना ना -नुकुर किये काम कर देता था में उनसे समझने की कौशिश करती।  वो हमेशा  कहती -"इंसानो से काम करवाना मेरे लिए कोई मुश्किल नहीं हे में जव भी हारी  हु भगवान  से हारी हूँ । उनके बारे में जितना जानती उतना ही भगवान पर भरोसा बढ़ता जाता ।
                 कॉलेज के समय की बात हे एक लड़का राज उन्हें बहुत पसंद करता था । वो हर हाल में उनसे शादी करना चाहता था । नेहा उसे इतना पसंद भी नहीं करती थी सिर्फ बात तक ही सब कुछ सीमित था । पर उसे इसके आलावा भी बहुत उम्मीदे थी । ये बात नेहा समझ नहीं पाई थी । उसने उसकी दोस्ती को सिर्फ दोस्ती ही समझा था । राज उसके घर के पास ही रहता था । उसका उनके घर में आना -जाना था । नेहा उसको इतनी गहराई तक समझने की कौशिश भी नहीं करती थी ।
          एक बार नेहा के अभिभावक शहर से बाहर एक शादी में चले गए ।नेहा के पेपर के कारण वह शादी में ना  जा सकी । उसके पास एक बूढ़ी औरत को उसकी देखभाल के लिए छोड़ वे चले गए थे ।  वह अकेली घर में रह गई । इतने में राज उसके घर आ गया । राज नेहा से बात करने लगा वो भी उससे बाते करती रही कुछ समय बाद राज अपने घर चला गया । उस दिन नेहा के घर में एक बुड़ी औरत भी थी उसने इतना ध्यान नहीं दिया । कुछ समय बाद नेहा के घरवाले वापस आ  गए ।
           राज उसे गहराई   से  चाहने लगा था वो इस रिश्ते को  अंजाम तक पहुचाना चाहता था उसने उसके पिता से शादी के बारे में बात चलाई पर उन्होंने साफ मना  कर दिया । उसे बहुत गुस्सा आ  रहा था । उसने गुस्से में काफी कुछ  गलत बोल दिया । जिसे सुनकर नेहा के पिता जी भी भड़क गए उन्होंने कह दिया -" जा तुझसे में अपनी  बेटी की शादी नहीं करता जो तेरे मन में आये कर ले ।" राज हर हालत में नेहा से शादी करना चाहता था । उसने नेहा के बारे में गलत बाते  फैलानी शुरू कर दी ।
         उन्हें सुनकर नेहा के पिताजी को लगने लगा दोनों एक दूसरे को पसंद करते होंगे शायद में ही गलत हु उन्होंने नेहा से पूछा -"क्या तुम राज से शादी करना चाहती हो । " पर राज ने उसके बारे में इतना कुछ गलत अफवाह फैला दी थी कि जो उसके मन में प्यार की नन्ही सी चिंगारी जल रही थी वो भी बुझ गयी थी । नेहा ने उन्हें साफ मना  कर दिया । " मुझे राज से शादी नहीं करनी ।"
        राज और नेहा एक दूसरे को पसंद करते थे । पर राज की जल्दबाजी ने सब कुछ बिगाड़ दिया । यदि राज उसकी पढ़ाई पूरी होने का इंतजार कर लेता तो शायद दोनों साथ होते । आज भी नेहा के मन में राज की यादे  बसी हुए है । राज के कारण नेहा अपने शहर में इतनी बदनाम हो गयी उसकी शादी होना मुश्किल हो गया । उससे कोई भी लड़का शादी नहीं करना चाहता था । शादी के नाम से रिश्ते बाले बिदक जाते । राज भी यही चाहता था कि  जब उसकी शादी के लिए कोई तैयार नहीं होगा तब हार कर उसके पिताजी राज से ही अपनी बेटी की शादी कर देंगे । जब नेहा की शादी के लिए हर तरफ से ना  होने लगी । एक दिन हार कर नेहा के पिताजी बोले -" तेरी शादी राज से ही कर देते है । तू शहर में इतनी बदनाम हो गयी हे कि तुझसे कोई भी लड़का अब शादी नहीं करेगा । " अब राज से नेहा को इतनी नफरत हो गयी थी । उसने अपने पिताजी से साफ मनाकर दिया "-में बिना शादी के रह लुंगी पर राज से शादी नहीं करुँगी । उसने मेरी जिंदगी का  खिलवाड़ बना डाला हे ।" उसके पिताजी भी अब चुप हो गए ।
      नेहा की शादी के लिए उसके पिताजी जो प्रयास कर रहे थे रंग लाये । उसका एक गाँव  में डॉक्टर से रिश्ता  तय हो गया । कुछ समय नेहा पति के साथ गाँव  में रही । बाद में उनकी नौकरी शहर में लग गयी वह वापस अपने शहर आ  गयी । आज भी जब नेहा राज को देखती हे उसके मन में हूक  सी उठती हे । इसने ऐसा क्यों किया ।
         

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