रेखा के दूसरे बेटे का नाम महेश हे वह अच्छी जगह नौकरी में लगा हुआ हे । उसकी पत्नी भी अच्छी जगह नौकरी कर रही है । उसकी नौकरी दूतावास में है । उसका एक पैर भारत तो दूसरा विदेश में रहता हे। वे दोनो आर्थिक रूप से समृद्ध है । पैसे को लेकर कोई परेशानी नही है । उनका एक बेटा हो गया हे वे चाहते है कि सास उनके साथ रहे । उनका दूसरा मकान और है उन्होंने दोनों बेटो को एक ही जगह रहकर परेशानी ना हो इसलिए दूसरे बेटे को दूसरे मकान में रहने के लिए भेज दिया । पहले उन्हें उस मकान में रहना बहुत अच्छा लगा । उनकी बहु ममता के एक बेटा हो गया तब उन्हें अपनी सास की बहुत याद आने लगी । नौकरी के साथ बच्चे को पालना बहुत मुश्किल हो रहा था । उन्हें भरोसेमंद इंसान की जरूरत महसूस होने लगी । सास के आलावा उन्हें किसी और पर भरोसा नही हो पा रहा था । सास की मज़बूरी थी क्योंकि उनकी नौकरी जारी थी । वे नौकरी छोड़कर दूसरी बहु की देखभाल के लिए उसके पास नही रह सकती थी । कुछ समय ममता के घर जाकर रही पर उसके घर से से नौकरी के लिये आना बहुत मुश्किल था । ममता का घर काफी दूर था । उन्होंने अपने घर आकर रहने के लिए कहा पर ममता तैयार नही हुई । उसे अकेले घर में रहने की आदत पड़ चुकी थी ।
उनके चार पोते हो गए थे उनको चारो पोते जान से प्यारे थे । उनके लिए चारो पोतो की जिम्मेदारी अलग अलग जगह पर जा कर निभाना बहुत मुश्किल हो रहा था । उन्होंने दोनों बहुओ को एक साथ रहने के लिये कहा । दोनों साथ रहने के लिये तैयार नहीं थी । इस कारण रेखा फैसला नही कर पा रही थी ऐसे में उचित क्या हे । बड़ी बहु के लिए अकेले तीनो बच्चो को पालना कठिन था । वे भी उसी घर में बरसो से रह रही थी उनका उस घर में मन लगता था दूसरा नौकरी की जिम्मेदारी भी इसी घर से निभाना आसान था ।
ममता ने अपनी माँ के पास बच्चा रखना पसंद किया अब वह दफ्तर जाते हुए बच्चे को मायके में छोड़ती हुई चली जाती थी । आते हुए बेटे को साथ ले आती थी । । ममता ने एक नौकरानी अपने घर में लगा रखी थी जिसके कारण घर के कामो में उसकी मदद हो जाती थी । दूसरी नौकरानी ममता ने मायके में अपने बेटे की देखभाल के लिए लगवा दी । उस नौकरानी की पगार ममता देती थी लेकिन रेखा को उसका दूसरी नौकरानी की पगार देना बिलकुल पसंद नही था उन्हें लगता ये नौकरानी बच्चे के साथ उस परिवार का भी बहुत सारा काम करती हे इसलिए उसके मायके वालो को नौकरानी की पगार देनी चाहिए पर ममता का आत्मसम्मान उसे इस के लिए राजी नही कर पाता था । ममता के माता पिता भी अच्छी हैसियत के हे वे नौकरानी का खर्चा देने के लिए तैयार हे । पर ममता को गवारा नही उसके बच्चे की नौकरानी का खर्चा कोई और दे । रेखा को ये बात गवारा नही होती । वे बहु को कई बार समझाने की कोशिश कर चुकी है । कि वह दूसरी नौकरानी की पगार ना दे पर ममता उनकी इस बात को मानने के लिए तैयार नही होती । रेखा मन ही मन किलसती रहती है छोटी बहु पेसो की फिजूल खर्ची कर रही हे उन्हें कोन समझाये जो बच्चे कमाते हे उनके लिए आत्मसम्मान पैसे से ज्यादा कीमती होता है ।
उनके चार पोते हो गए थे उनको चारो पोते जान से प्यारे थे । उनके लिए चारो पोतो की जिम्मेदारी अलग अलग जगह पर जा कर निभाना बहुत मुश्किल हो रहा था । उन्होंने दोनों बहुओ को एक साथ रहने के लिये कहा । दोनों साथ रहने के लिये तैयार नहीं थी । इस कारण रेखा फैसला नही कर पा रही थी ऐसे में उचित क्या हे । बड़ी बहु के लिए अकेले तीनो बच्चो को पालना कठिन था । वे भी उसी घर में बरसो से रह रही थी उनका उस घर में मन लगता था दूसरा नौकरी की जिम्मेदारी भी इसी घर से निभाना आसान था ।
ममता ने अपनी माँ के पास बच्चा रखना पसंद किया अब वह दफ्तर जाते हुए बच्चे को मायके में छोड़ती हुई चली जाती थी । आते हुए बेटे को साथ ले आती थी । । ममता ने एक नौकरानी अपने घर में लगा रखी थी जिसके कारण घर के कामो में उसकी मदद हो जाती थी । दूसरी नौकरानी ममता ने मायके में अपने बेटे की देखभाल के लिए लगवा दी । उस नौकरानी की पगार ममता देती थी लेकिन रेखा को उसका दूसरी नौकरानी की पगार देना बिलकुल पसंद नही था उन्हें लगता ये नौकरानी बच्चे के साथ उस परिवार का भी बहुत सारा काम करती हे इसलिए उसके मायके वालो को नौकरानी की पगार देनी चाहिए पर ममता का आत्मसम्मान उसे इस के लिए राजी नही कर पाता था । ममता के माता पिता भी अच्छी हैसियत के हे वे नौकरानी का खर्चा देने के लिए तैयार हे । पर ममता को गवारा नही उसके बच्चे की नौकरानी का खर्चा कोई और दे । रेखा को ये बात गवारा नही होती । वे बहु को कई बार समझाने की कोशिश कर चुकी है । कि वह दूसरी नौकरानी की पगार ना दे पर ममता उनकी इस बात को मानने के लिए तैयार नही होती । रेखा मन ही मन किलसती रहती है छोटी बहु पेसो की फिजूल खर्ची कर रही हे उन्हें कोन समझाये जो बच्चे कमाते हे उनके लिए आत्मसम्मान पैसे से ज्यादा कीमती होता है ।
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