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नम्रता को नेहा ने इसी बीच बी,एड करवा  दी जबकि शादी से पहले नम्रता ने बी, लिब की पढ़ाई पूरी कर रखी थी । काफी समय से लाब्रेरियन की नौकरी नही निकली थी नेहा को लगने लगा था अब नम्रता के लिए नौकरी करना जरूरी हे इसलिए एक डिग्री और दिलवा दी जिसमे भी पहले नौकरी निकलेगी  वह आवेदन कर देगी । सरकारी नौकरी नही निकल रही थी इसी बीच गेस्ट टीचर की नौकरी निकली । नम्रता  ने  विद्यालय में आवेदन कर दिया उसकी नौकरी लग गयी । अब वह घर और नौकरी दोनों जिम्मेदारी भलीभांति निभाने लगी । उसकी बेटी समझदार होती जा रही है । शायद भगवान  भी ऐसे हालत में बच्चो को समझदार बनाने में सहयोग करता हे ।
             नम्रता अपने पति को एक दुकान करवाने की सोचने लगी हे जहाँ राकेश नौकरो की मदद से काम संभाल सके । राकेश में विश्वास पैदा कर रही है । एक साल की बीमारी में राकेश अपने ऊपर विश्वास खो चूका है । वह हर दम बेटी के साथ रह कर निया की जिम्मेदारी तक अपने को सीमित समझने लगा है । अब नम्रता राकेश को याद दिलाने की कौशिश करती हे उसने कभी एक व्यापर खड़ा किया था तब उसकी उम्र कम थी अब उसको जिंदगी का अनुभव भी हे इसलिए वह पहले से अच्छा काम कर पायेगा । नम्रता राकेश को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने की कौशिश में दिन रात लगी रहती है । राकेश में दुकान खोलने का हौसला पैदा हो गया हे ।
            नेहा का बेटा  राहुल जर्मनी से ऑटोमोबाइल इंजीनिरिंग की डिग्री ले कर आ गया  हे उसकी अच्छी जगह नौकरी लग गयी हे अब नेहा राहुल  के लिए रिश्ते देखने लगी हे । पर साथ ही उसे किस्मत से भी डर लगता हे कव खुशियो पर ग्रहण लग जायेगा उसे पता नहीं हे नए की उम्मीद कभी नही छोड़नी चाहिए । नेहा ने राहुल की शादी कामिनी से तय कर दी हे । कामिनी सुंदर ,सुशील और खूब पड़ी हुई  हे । नेहा दिन रात शादी की तैयारी में मग्न हे । उसे उम्मीद हे आने वाला कल सुंदर होगा । हमे भी लगता हे नेहा का बक्त अब बदल जायेगा । खुशियाँ उसके दरवाजे दस्तक देने अ गयी हे । 

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