purani jamane ki orte

          कुछ साल पहले तक ओरते सहन शक्ति की मूर्त होती थी उनके सामने पति गलत भी बोल देते थे वो उन शब्दों को कभी गलत नहीं कहती थी । उनके पति सपने की बात भी पत्नी को बताते वो उनको सच मान लेती थी ।वे साथियो को बताने में  गर्व महसूस करती थी   ।  ऐसा ही एक वाकया मेरे सामने उपस्थित हुआ । में एक रिश्तेदार के घर में  थी उन्होंने जब सपने की बात बताई मेंने हंसी में उडा  दी ये सपना हे सपने पर क्या यकींन  करना  उनको मेरा हँसाना नागवार गुजरा और कहने लगी -" सच्ची जीजी ये जो बोलते हे वो  बिलकुल सच हो जाता हे " मेने काफी बहस की पर वे पति भक्ति पर अडिग रही मुझे ही उनके सामने चुप हो जाना पड़ा ।
              मै ऐसे परिवार से ताल्लुक नही रखती थी ।जहॉ पति के हर शब्द पर हा कहने या चुप रह जाने का रिवाज था । मेरा दिल ऐसे लोगो को देखकर कसमसाता था  उनका पति की गलत बात पर हाँ कहना  नागवार लगता  था मुझे बहुत अजीब लगता था । एक बार मेने एक घर में पति को प्रेस ठीक करते देखा । पति काफी देर से प्रेस ठीक करने में लगे थे पर प्रेस ठीक होने का नाम ही नहीं ले रही थी । मै भी चुपचाप देख रही थी । मुझे प्रेस के बारे में कोई जानकारी नही थी इसलिए  मै चुपचाप देखती रही काफी मशक्क़त के बाद प्रेस गर्म हो गयी । पति ने कहा " -ये फिलामेंट बार -बार गलत लग जाता था इसलिए प्रेस ठीक नहीं हो रही थी । " उस वक्त उनकी पत्नी बोली -"मुझे काफी देर से पता था कि आप उल्टा लगा रहे हे पर मे   नही बोली मेरे बोलने पर  आपको गुस्सा आ जाता । " इस बात पर उनके पति को संतुष्टि नहीं हुई बल्कि वो और भी जोर से अपनी पत्नी को डाटने लगे । ये सब देखकर मुझे बहुत हैरानी होती थी । पुरानी औरते सारे दिन   घर का काम करके भी पति का एक अच्छा शब्द  सुनने के लिए तरस जाती थी । उनके नसीब में प्यार भरे शब्द नही होते थे ।           

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