bhai -bahan

      रैना बहुत संवेदनशील थी । अब उसे भी दूसरे बच्चे के जरूरत महसूस होने लगी । रैना की  बेटी अब 4  साल की हो गयी थी रेना की बेटी श्वेता दुसरो के भाई -बहन देखकर माँ से जिद करती -"मेरा भाई कहाँ  है । मै किसके साथ खेलू । सभी अपने भाई के साथ खेलते हे । मेरा भाई लाओ । " रैना को भी बेटे की इच्छा होने लगी । उसने अपनी इच्छा के बारे में पति को बताया ।   पति राकेश दूसरे बच्चे के लिए राजी हो गए । रैना और पति  राकेश दूसरे बच्चे के सपने देखने लगे । ।
          कुछ समय बाद रैना के सपनो को सुनहरे पंख मिल गए उसके घर एक सुन्दर से शिशु ने जन्म लिया । अब रैना का घर खुशियो से भर गया था । उसकी बेटी श्वेता अपने भाई रमन से बहुत प्यार करती थी वह उसके सारे काम ख़ुशी -ख़ुशी कर देती थी । उसमे ऊर्जा का संचार हो गया था । अब श्वेता रैना से किसी भी बात के लिए जिद नही करती थी । उसको रमन के रूप में जीता -जागता खिलौना जो मिल गया था | रैना श्वेता के सामने रमन को कभी भी ज्यादा प्यार करने की कोशिश नही करती थी । वह श्वेता को हमेशा कहती -" तेरा भाई रो रहा हे देख क्या हुआ ।"
श्वेता उसका कारण ढूंढने की कोशिश करती और माँ को जाकर बता देती । इस तरह श्वेता समझदार और जिम्मेदार लड़की बनती जा रही थी । उसके मन में भाई के प्रति जलन की भावना पैदा नही हो रही थी । उसके मन में हमेशा रैना ये भावना पैदा करने की कोशिश करती -"तेरा भाई मुझे बहुत तंग करता है मुझे कुछ भी नही करने देता । जब से तेरा भाई हुआ है । मै तेरा सही ढंग  से काम भी नही कर पाती  हूँ । "
      श्वेता जबाब देती -"माँ अब मै बड़ी हो गयी हूँ । में अपने सब काम खुद कर लूँगी । आप बस भाई का ध्यान रखो ।" श्वेता बड़ी और समझदार बहन के सामान रमन का ध्यान रखती थी । जब उसे भाई के रोने का कारण समझ नही आता था । सारे प्रयत्न करने पर भी वह  चुप नही होता था । तब खुद रुआँसी होकर माँ के पास जाकर कहती -" माँ रमन तो चुप ही नही हो रहा ।"तब रैना हाथ का काम छोड़कर आती । और रमन की जरूरत पूरी करती ।रमन चुप हो जाता । ऐसे में श्वेता को बहुत हैरानी होती ये चुप कैसे हो गया ।  कई बार रैना को श्वेता की हालत देखकर हंसी भी आती थी । उसने रमन की जिम्मेदारी श्वेता को सिर्फ इसलिए सौंपी थी की दोनों में जलन पैदा न हो । श्वेता ने उसे दिल से लगा लिया । लेकिन इस कोशिश का परिणाम भी सुखद रहा । दोनों भाई -बहन सदा प्यार और दुलार से रहे । दोनों वक्त आने पर एक दूसरे की ढाल बन जाते थे । बड़े होने पर भी दोनों का परस्पर प्यार बना रहा । कई बार श्वेता माँ से भाई के लिए झगड़ने के लिए भी तैयार हो जाती थी ।
        

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