नागा साधु और भस्म का इस्तेमाल क्यों
ये भस्म शिव की शोभा बढ़ाती है। तो नागा साधु और अघोरी भी इसका इस्तेमाल करने से पीछे नहीं रहते है। आप सोच कर देखिये शिव भक्त भस्म का लेपन क्यों करते है। आपने साईं बाबा के मंदिरो में भभूति मिलती देखी होगी। इसे जनसाधारण माथे पर लगा कर गौरवान्वित होते है। क्योंकि भस्म लगाने के कई फायदे है।
कोई भी चीज इतने सालो से इस्तेमाल हो रही है। इसके फायदे जरूर होंगे। जब तक जिस चीज का फायदा नहीं होता है। तब तक जनमानस उसका प्रयोग नहीं करता है। गाय का गोबर ,पाकड़ ,बेलपत्र ,पीपल ,रसाला और केले के पत्तो को जलाकर जो भस्म प्राप्त होती है। उसमे औषधीय गुण आ जाते है। उनके उपयोग से कई बीमारियां ठीक हो जाती है।
नागा साधु इस भस्म में गाय का दूध मिला कर इसे पूरे शरीर पर लगाते है। इसे लगाने से वे बहुत सारी बीमारियों से बच जाते है। ये राख उनके रोम कूपो को बंद कर देती है। जिससे शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती है। बाहर की सर्दी का असर उनके शरीर पर प्रभाव नहीं डाल पाता है। तभी तो नागा साधु किसी तरह के कपड़ो का इस्तेमाल नहीं करते वे अपने पूरे जिस्म पर भस्म मल कर सारे मौसम का सामना कर लेते है।
बाहर के मच्छर और मक्खीउ न्हें परेशान नहीं करती। उनके संक्रमण का उनपर असर नहीं होता है। तभी तो नागा साधु भारत के ठन्डे और गर्म हर स्थान का सामना बड़ी आसानी से कर लेते है।
आपको सुनकर हैरानी होगी जब गैस का इस्तेमाल नहीं होता था। सबके घरो में कोयले या उपलों का इस्तेमाल होता था। उस समय बर्तन मांजने ,दांत साफ करने और गंदे हाथ धोने के लिए राख का इस्तेमाल किया जाता था। इनका इस्तेमाल मैंने अपने सामने तक होते देखा है। क्योंकि जो काम आज साबुन करते है वे पहले समय में राख करती थी।
विदेशी वैज्ञानिको ने भी माना है। राख में ऐसे गुण होते है। जो विषाणुओ को मार देते है। जिससे बीमारी होने से इंसान बच जाते है। इसका सबुत नागा साधु है। तभी तो हजारो सालो से वे इनका इस्तेमाल करते आ रहे है। आज के जमाने में अघोरी और नागा साधु ही शिव की परम्परा को आगे बड़ा रहे है।
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