उज्जैन कर्करेखा के पास है
संसार में कई रेखाएं हे जो धरती को कई भागो में बांटती है। उनमे से कर्क रेखा उज्जैन से गुजरती है। 21 जून को कहा जाता है भारत में सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है। कर्क रेखा पर पड़ने वाले शहरो में 12 . 30 से 1. 00 बजे तक परछाई धरती पर नहीं बनती है। इस रेखा पर सूर्य की इस दिन सीधी किरणे पड़ती है। भारतीयों के लिए 21 जून का विशेष महत्व है। इसी कारण इस दिन को योग दिवस घोषित करवाया गया। इसी कारण सवाया जय सिंह ने वैध शाला बनवाई थी। इसके अनुसार तारो की गति की गणना की जाती है। यानी पुराने जमाने की घडी थी।
इस वैध शाला को जंतर मंतर के नाम से भी जाना है। पुरे भारत में चार वैध शाला तारो की गणना के लिए बनायी गई थी । उनमे दिल्ली ,मथुरा,जयपुर और उज्जैन है। उसमे उज्जैन की वैधशाला का बहुत महत्व है। यह पहला ज्योतिर्लिंग है जो कर्करेखा के पास बना हुआ है इसका बहुत महत्व है। यहां गर्मी बहुत पड़ती है।
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