#manipur ke mandir ka apnapn

                        मणिपुर का इस्कॉन मंदिर 

     


          मणिपुर के इस्कॉन मंदिर का अनुभव निराला था। यह   वहां के एयरपोर्ट के रस्ते में   पड़ता है। दिल्ली वालो के लिए इम्फाल बहुत छोटा सा इलाका है। क्योंकि दिल्ली के लोग बहुत दूरियां तय करते है। यह मंदिर अभी बन रहा है। लेकिन जितना बन चूका है वह बहुत सुंदर है। 
         जब हम इस मंदिर में पहुंचे तब इसके कपाट  बंद हो चुके थे।  इस कारण हम अच्छी तरह पूरा मंदिर नहीं देख सके। लेकिन जितना देख सके वह  हमेशा के लिए मन में बस गया। उसकी छत पर बनी कलाकृति  बहुत सूुदर थी। केवल  प्रभुपाद जी की मूर्ति  के दर्शन कर सके। मुझे लगा इन मंदिरो में यह ही होता है। 
       उसके बाद हमारी  एक मणिपुरी औरत  से मुलाकात हुई। उसका अपनापन देखकर हमें हैरानी हुई। हमारे एक साथी ने मणिपुरी पोशाक पहन रखी  थी। उससे वह बहुत प्रभावित हुई। हमसे बहुत प्रेमभाव से मिली। हमे बहुत हैरानी हो रही थी। जिस देश के लोगो को लेकर हमारे मन में डर  था। वहां इतना अपनापन देखकर मन भावुक हो गया। 
      वहां के लोग अपने जीवन में  सुख और दुःख के समय  मंदिर में इकट्ठे  होते है। उनके एक रिस्तेदार की मृत्यु की बरसी थी। उनके भोज के लिए सभी इकठ्टे हुए थे। उन्होंने हमें उसमे शामिल होने के  लिए बुलाया. हमें भी एक नयी संस्कृति को पहचानने का मौका मिल रहा था इसलिए हम उसमे शामिल हो गए। 
      हमने अब तक अधिकतर भारत के अन्य शहरो   का खाना खाया था। पहली बार मणिपुरी खाने का मौका मिला। हम उसके प्रेम से वशीभूत होकर उसमे शामिल हो गए। 
        पहली बार हमने मणिपुरी खाना खाया जो दिल्ली के खाने से अलग था। लेकिन हमे अच्छा लगा। उसमे बहुत सारा खाना हमारे सामने परसा गया। जो हम जैसे लोग पूरा खा नहीं सकते थे। बहुत सारी  सब्जियों के हमे नाम भी नहीं पता थे जिसका सेवन इससे पहले नहीं किया था । सबसे बाद में खाने के बाद नमक परसा जाता है। जिसका मतलब है। इसके बाद अब कुछ नहीं आएगा। खाना समाप्त हो गया। 
        हम वहां के अजनबी लोगो का अपनापन आज भी भूल नहीं पाए है।यह मंदिर बहुत बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। निर्माणाधीन होने के कारण उसका पूरा स्वरूप नहीं देख सके लेकिन जितना देखा वह बहुत सूंदर था।  

 



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